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अंग्रेजी माध्यम स्कूलों से बदल रही परिषदीय स्कूलों की छवि

Thu, 16 Sep 2021 01:03 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 16 Sep 2021 01:03 AM IST
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Image of council schools changing from English medium schools
बच्चों के साथ प्रधानाध्यापक। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

बच्चों की पढ़ाई पर शिक्षक दे रहे विशेष ध्यान, सामने आ रहे बेहतर परिणाम
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निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे भी अब यहां दाखिले के लिए लगे लाइन में

लखीमपुर खीरी। बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय स्कूल अंग्रेजी माध्यम से संचालित किए जा रहे हैं। इनमें तैनात शिक्षक बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान दे रहे हैं, जिनके अब बेहतर परिणाम सामने आने लगे हैं। यहां खास यह है कि निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे भी अब यहां दाखिले के लिए पहुंचने लगे हैं। छात्रों की संख्या अधिक होने के कारण कुछ स्कूलों में नए प्रवेश पर रोक लगाने की स्थिति बन गई है।
बेहजम ब्लॉक के अंग्रेजी माध्यम स्कूल रतसिया में प्रधानाध्यापक प्रमोद वर्मा ने नए प्रवेश पर रोक लगा दी है। 2018 में यह प्राथमिक विद्यालय से अंग्रेजी माध्यम स्कूल में परिवर्तित हुआ था। तब इसमें कुल बच्चों की संख्या 70 थी, लेकिन वर्तमान में छात्र संख्या 500 से अधिक हो चुकी है। 28 गांवों से बच्चे आटो और कारों के माध्यम से पढ़ने स्कूल आते हैं।
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कोरोना काल में 2020 और 2021 में एकाएक बच्चों की संख्या में वृद्घि हुई, क्योंकि कई अभिभावकों ने जिले के खास निजी स्कूलों से बच्चों के नाम कटवाकर अंग्रेजी माध्यम प्राइमरी स्कूल रतसिया में नाम लिखवाए हैं। बच्चों की संख्या बढ़ने से सीमित संसाधन जैसे कक्षा कक्ष व शिक्षकों की कमी आड़े आने लगी हैं।
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प्रधानाध्यापक प्रमोद वर्मा ने बताया कि स्कूल में चार शिक्षक व दो शिक्षामित्रों की तैनाती है। 500 से अधिक बच्चे होने के कारण उन्हें बैठाने के लिए कक्षा कक्ष कम पड़ गए हैं। इससे नए प्रवेश पर रोक लगानी पड़ी है। इस स्कूल का निरीक्षण स्वयं बीएसए कर चुके हैं और इसे प्रेरक विद्यालय घोषित किया जा चुका है। इसी बेहजम ब्लॉक के दूसरे अंग्रेजी माध्यम प्राइमरी स्कूल करनपुर में भी बच्चों की संख्या 200 के ऊपर पहुंच गई है। 2018 से पहले यहां भी 65 बच्चे पंजीकृत थे। यहां पर पांच शिक्षक व एक शिक्षामित्र कार्यरत हैं।

परिषदीय स्कूलों में अभी प्रवेश प्रक्रिया जारी है और 30 सितंबर 2021 तक बच्चों के नए प्रवेश किए जाएंगे। कोरोना काल में प्राइवेट स्कूलों के कई बच्चों के प्रवेश परिषदीय स्कूलों खासकर अंग्रेजी माध्यम में कराए गए हैं। कुछ स्कूलों में छात्रों की अच्छी संख्या बढ़ी है, जिससे कक्षा कक्ष कम पड़ने के कारण नए प्रवेश लेने में दिक्कतें आ रही हैं। - लक्ष्मीकांत पांडेय, बीएसए

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