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208 बीघा फसलों की कुर्की के डेढ़ माह बाद भी तहसील प्रशासन लेता रहा फिरकी

Mon, 31 Oct 2022 12:48 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 31 Oct 2022 12:48 AM IST
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Illegal occupants took away the attached crop, the officers were helpless in front of the land mafia
गुलचौरा गांव में फसल कुर्की के लिए झंडी लगवातीं एसडीएम श्रद्धा सिंह (फाइल फोटो) - फोटो : LAKHIMPUR
लखीमपुर खीरी। सदर तहसील की ग्राम पंचायत गुलचौरा में करीब डेढ़ माह पहले एसडीएम सदर श्रद्घा सिंह के नेतृत्व में तहसील प्रशासन ने ग्राम समाज की 208 बीघा जमीन में अवैैध रूप से बोई गई फसलों को कुर्क किया था। इसकी नीलामी कर धनराशि सरकारी खजाने में जमा की जानी थी मगर डेढ़ माह में प्रशासन ने कुछ नहीं किया। नतीजा ये हुआ कि कब्जेदारों ने 50 बीघा फसल काटकर नई फसल बोने की तैयारी भी शुरू कर दी है।
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सदर तहग्राम पंचायत गुलचौरा में तालाब, बंजर, झाड़ी आदि की 348 बीघा जमीन पर 1995 में अवैध रूप से पट्टे बनाए गए थे। सरकार बनाम सोहनलाल आदि के कोर्ट में जाने के बाद सभी पट्टे 2001 में खारिज कर आवंटन निरस्त कर दिया गया था। पट्टेदारों ने हाईकोर्ट में अपील की थी, जो 2005 में खारिज हो गई। तहसील प्रशासन की लापरवाही के कारण 17 साल तक अवैध कब्जेदार भूमि पर काबिज रहे।
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ग्राम प्रधान इश्तियाक खां ने मामले में कार्रवाई शुरू की, जिसके बाद तहसील प्रशासन ने 14 सितंबर 2022 को 208 बीघा जमीन को कब्जा मुक्त कराने की कार्रवाई की, लेकिन 140 बीघा जमीन को कब्जा मुक्त कराने की कार्रवाई नहीं की गई। तहसील प्रशासन ने 14 सितंबर 2022 को 208 बीघा जमीन की फसलों को कुर्क किया था और नीलाम करके धनराशि को सरकारी खजाने में जमा कराने की योजना थी मगर कब्जेदारों ने करीब 50 बीघा धान की फसल काट डाली और खेतों में नई फसल की बुआई करने के लिए जुताई भी कर दी है।
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इस पर तहसीलदार ने बताया कि कुर्क की गई फसलों की नीलामी की प्रक्रिया चल रही थी, लेकिन कब्जेदारों ने हाईकोर्ट में रिट के रिकाल होने की सूचना दी है। हालांकि अभी स्टे आर्डर नहीं हुआ है। सोमवार को प्रश्नोत्तरी डालकर डीजीसी की राय ली जाएगी, जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कार्रवाई में देरी से कब्जेदारों को मिला लाभ
तहसील प्रशासन द्वारा कुर्क की गई फसलों की नीलामी कराने में अनावश्यक रूप से देरी की गई। जिससे कब्जेदारों को कोर्ट में अपील करने का मौका मिला। कब्जेदारों को फसलों को काटने की अनुमति किसने दी। यदि नहीं तो फिर तहसील प्रशासन व लेखपालों ने अभी तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। यह सवाल तहसील प्रशासन के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

‘मामला संज्ञान में आते ही तहसीलदार के माध्यम से स्थानीय लेखपाल को फसलों की कटाई की रोकने के निर्देश दिए गए हैं। मामले में जांच कराई जाएगी। फसल काटने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर फसल मूल्य की भरपाई के लिए वसूली कराई जाएगी।’ - श्रद्घा सिंह, एसडीएम सदर

फसल कटने के बाद खाली पड़ा खेत

फसल कटने के बाद खाली पड़ा खेत- फोटो : LAKHIMPUR

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