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Lakhimpur Kheri News: उल्ल नदी किनारे मिला अवैध अतिक्रमण, पिलर हटवाए
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महेवागंज। अतिक्रमण और घुसपैठ से नदियों का स्वरूप बिगड़ता जा रहा है। उल्ल नदी किनारे अतिक्रमण मिलने पर तहसील प्रशासन ने निर्माणाधीन इमारत के प्रपत्र तलब किए हैं।
शहर से चंद मीटर दूर उल्ल नदी के पास एक निर्माणाधीन इमारत में घेराबंदी के लिए रातोंरात कई पिलर लगा दिए गए। शिकायत सामने आने पर अधिकारी नींद से जागे। राजस्व कर्मियों की टीम मौके पर पहुंची। पिलर हटवाए और जांच करने की बात कही। तहसीलदार सदर सुशील प्रताप सिंह ने बताया कि लेखपाल को मौके पर भेजा गया था। पिलर हटवा दिये गए हैं। भवन के प्रपत्र तलब किए गए है। जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
अतिक्रमण से सिकुड़ रही नदियां
नदी किनारे अवैध कब्जे और निर्माण कोई नई बात नहीं। इससे नदियों के अस्तित्व पर संकट के बादल है। उल्ल नदी में कचरा फेंका जा रहा। वर्षों से सिल्ट जमा है। झाड़ियों से नदी अटी पड़ी है। कुछ लोगों ने धोबी घाट बना रखा है। रसायन घुलने से पानी विषैला हो जाता है। इसी तरह लिलौटी धाम के करीब बहने वाली जुनई और कंडवा नदी भी आज विलुप्त होने की कगार पर है।
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डूब क्षेत्र में प्रतिबंधित है निर्माण
पर्यावरण के नियमों की बात करें तो नदी के बीच से सौ मीटर के दायरे में कोई पक्का निर्माण नहीं किया जा सकता। ये नदी का डूब क्षेत्र होता है। सूत्र बताते हैं कि इस क्षेत्र में किसी इमारत के निर्माण पर पहली जिम्मेदारी सिंचाई विभाग की होती है। जबकि मकानों के सीमांकन रिपोर्ट में प्रशासन की अनदेखी से भी ये हालात पनप रहे है। आलम यह है कि नदियां सिकुड़ती जा रही हैं।
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शहर से चंद मीटर दूर उल्ल नदी के पास एक निर्माणाधीन इमारत में घेराबंदी के लिए रातोंरात कई पिलर लगा दिए गए। शिकायत सामने आने पर अधिकारी नींद से जागे। राजस्व कर्मियों की टीम मौके पर पहुंची। पिलर हटवाए और जांच करने की बात कही। तहसीलदार सदर सुशील प्रताप सिंह ने बताया कि लेखपाल को मौके पर भेजा गया था। पिलर हटवा दिये गए हैं। भवन के प्रपत्र तलब किए गए है। जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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अतिक्रमण से सिकुड़ रही नदियां
नदी किनारे अवैध कब्जे और निर्माण कोई नई बात नहीं। इससे नदियों के अस्तित्व पर संकट के बादल है। उल्ल नदी में कचरा फेंका जा रहा। वर्षों से सिल्ट जमा है। झाड़ियों से नदी अटी पड़ी है। कुछ लोगों ने धोबी घाट बना रखा है। रसायन घुलने से पानी विषैला हो जाता है। इसी तरह लिलौटी धाम के करीब बहने वाली जुनई और कंडवा नदी भी आज विलुप्त होने की कगार पर है।
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डूब क्षेत्र में प्रतिबंधित है निर्माण
पर्यावरण के नियमों की बात करें तो नदी के बीच से सौ मीटर के दायरे में कोई पक्का निर्माण नहीं किया जा सकता। ये नदी का डूब क्षेत्र होता है। सूत्र बताते हैं कि इस क्षेत्र में किसी इमारत के निर्माण पर पहली जिम्मेदारी सिंचाई विभाग की होती है। जबकि मकानों के सीमांकन रिपोर्ट में प्रशासन की अनदेखी से भी ये हालात पनप रहे है। आलम यह है कि नदियां सिकुड़ती जा रही हैं।