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इंसानी दखल कम हो तो रुकें मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं : केंद्रीय मंत्री

Thu, 19 Jun 2025 11:52 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 19 Jun 2025 11:52 PM IST
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If human interference is reduced then incidents of human-wildlife conflict will stop: Union Minister
दुधवा के सभागार में आयोजित बैठक में शामिल मंत्री व अन्य लोग। स्रोत विभाग
पलियाकलां। दुधवा नेशनल पार्क के पर्यटन परिसर में केंद्रीय वन, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन संबंधी कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों के साथ ही विभागीय लोगों के बीच मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने पर चर्चा की गई।
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बैठक में प्रदेश के वन मंत्री डाॅ. अरुण कुमार सक्सेना के साथ ही वन राज्यमंत्री केपी मलिक भी शामिल रहे और इनकी मौजूदगी में कई बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा करने के बाद अधिकारियों के साथ आगे साझा किया गया।
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दुधवा के पर्यटन परिसर स्थित सभागार में आयोजित बैठक में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि टाइगर रिजर्व वन्यजीवों के लिए है। ऐसे में अगर इंसानी दखल होता है तो मानव-वन्यजीव संघर्षों की घटना सामने आती हैं। इसको रोकने के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता वन्यजीवों की सुरक्षा होनी चाहिए। वन्यजीवों के क्षेत्र में कोई भी दखलअंदाजी न हो, इसके लिए अफसर अपने कार्यक्षेत्र तय करते हुए घटनाओं पर अंकुश लगाएं।
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वनाधिकारियों ने कार्यशाला में कहा कि जंगल से सटे क्षेत्रों में लोग गन्ने की खेती करते हैं, जिसे वन्यजीव जंगल ही समझते हैं। वन्यजीव उसे अपना ठिकाना बना लेते हैं और जब खेत में कोई जाता है उन पर हमला कर देते हैं। इसपर अंकुश लगाने की रणनीति तैयार करने के निर्देश मंत्रियों द्वारा दिए गए हैं।

सांसद ने करंट युक्त बाड़ लगाने की कही बात

धौराहरा सांसद आनंद भदौरिया ने जंगल किनारे करंट युक्त बाड़ लगाने की बात कही। उन्होंने कहा कि बाड़ से वन्यजीव जंगल से बाहर नहीं निकल सकेंगे। अधिकारियों ने इस योजना को वृहद रूप देने का प्रयास करने की बात कही।

विधायक ने सुहेली नदी को साफ कराने की रखी मांग

बैठक के बाद विधायक रोमी साहनी ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव को अलग से ज्ञापन देकर सुहेली नदी को साफ कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि सुहेली नदी की हर साल आने वाली बाढ़ किसानों की सैकड़ों एकड़ फसलों को तहस-नहस करने के साथ ही बर्बाद कर देती है। इस पर केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों से वार्ता कर नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा है।

कम बजट मिलने की भी उठी बात

दुधवा नेशनल पार्क उत्तर प्रदेश में अपनी अलग पहचान बना चुका है, लेकिन पार्क प्रशासन को बजट कम मिलता है। इसके चलते रखरखाव के साथ ही चलाए जा रहे प्रोजेक्ट में दिक्कतें आती हैं। पार्क सूत्रों के अनुसार, कई बार ऐसा होता है कि वर्षों से बजट नहीं मिलता है। अगर मिलता भी है तो 40 प्रतिशत के हिसाब से तीन हिस्सों में आता है। कार्यशाला के दौरान बजट का मुद्दा भी उठा। जिसको गंभीरता से लेने की बात मंत्री ने कही।


यह लोग रहे मौजूद

सांसद खीरी उत्कर्ष वर्मा, धौरहरा सांसद आनंद भदौरिया, बहारइच सांसद आनंद कुमार गौड़, श्रावस्ती सांसद राम शिरोमणि, पलिया विधायक रोमी साहनी, दिल्ली से आए वन महानिदेशक व विशेष सचिव पर्यावरण सुशील कुमार अवस्थी, अपर वन महानिदेशक राष्ट्रीय बाघ संरक्षण गोविंद सागर भारद्वाज, अपर वन महानिदेशक पर्यावरण मंत्रालय रमेश कुमार पांडेय, उप महानिरीक्षक वन राकेश कुमार जगेनिया, उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव पर्यावरण एवं वन अनिल कुमार, प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुनील चौधरी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक अनुराध वेमुरी, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक ललित कुमार वर्मा, एफडी दुधवा डाॅ. एच राजामोहन, डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल, एसपी संकल्प शर्मा, डीडी दुधवा डाॅ. रंगाराजू टी., पीटीआर के प्रभागीय वनाधिकारी मनीष सिंह, मुरादाबाद वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी सूरज, कतर्निया घाट के प्रभागीय वनाधिकारी शिवशंकर समेत अन्य रेंजों व पार्कों के अधिकारी मौजूद रहे।
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