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नहर कटने से सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न
अमर उजाला ब्यूरो निघासन।
Updated Tue, 02 Aug 2016 11:44 PM IST
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लापरवाही
- फोटो : अमर उजाला
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सूचना के बाद भी नहीं चेता सिंचाई विभाग, फसल बर्बाद होने से किसान परेशान
घाघी नाले पर बना बंधा फटने के बाद एक बार फिर क्षेत्र के किसानों को सिंचाई विभाग की लापरवाही का खामियाजा भुगतना पड़ा। दरेरी और कोलापुरवा के पास नहर कटने से सैकड़ों एकड़ गन्ने और धान की फसल जलमग्न हो गई है। यदि जल्दी ही नहर बंद नहीं की गई तो कई गांव भी इससे प्रभावित हो जाएंगे। ग्रामीणों का आरोप है कि जब नहर कटने वाली थी उसी समय इसकी सूचना सिंचाई विभाग के जेई को दी गई थी, बावजूद इसके आश्वासन के बाद भी नहर की मरम्मत नहीं की गई जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ा।
सुहेली नदी से निकली नहर में बरसात के पहले एक बूंद पानी नहीं था। किसान अपनी फसल में पानी लगाने के लिए ट्यूबवेल का सहारा ले रहे थे। बरसात होने पर नहर लबालब हो गई। नहर में अधिक पानी होने के कारण दरेेरी और कोलापुरवा के बीच नहर हर साल कट जाती है। किसानों ने सिंचाई विभाग को सूचना देकर नहर सही कराने की मांग की थी। सिंचाई विभाग के जेई ने मौका मुआयना कर नहर सही कराने का आश्वासन दिया था। आरोप है कि इसके बाद भी नहर ठीक नहीं की गई। नतीजा यह निकला कि नहर कट गई। नहर कटने से अजय गिरि का पांच एकड़, रामदुलारे का दो, सोबरन का चार, गुड्डा लाल का तीन एकड़ गन्ना तथा दो एकड़ धान, रतीराम का चार एकड़ गन्ना तथा दो एकड़ धान रामसनेही का पांच एकड़ गन्ना डूब गया है। इसके अलावा, दरेेेरी, घनश्याम पुरवा, कोलापुरवा, चौधरी पुरवा, बजरंग गढ़, ढखेरवा खालसा आदि गांवों के किसानों की फसल चौपट हो रही है।
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मरम्मत के नाम पर खर्च हुए थे बीस लाख रुपये
अप्रैल में सिंचाई विभाग ने नहर सफाई और मरम्मत के नाम पर बीस लाख रुपये खर्च किए था। इन रुपयों से सुहेली बैराज से पढुआ तक नहर में जमा कूड़ा करकट और कटे हुए स्थान को सही कराया गया था। नहर की मरम्मत कैसी हुई थी, नहर कटने से यह तथ्य उजागर हो गया है।
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हरसाल कटती है नहर
सिंचाई विभाग की लापरवाही का यह पहला मामला नहीं है। इसके पहले भी कई सालों से नहर कटती रही है। ग्रामीणों ने किसी तरह से नहर को श्रमदान करके बंद किया है। बरसात के कई महीनों बाद भी कटी हुई नहर सही नहीं की जाती, जिससे लोगों को आने जाने में भी समस्या का सामना करना पड़ता है।
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नहर कटने की सूचना मिली है। सिंचाई विभाग को सूचना दी गई है। शीघ्र ही उसे सही कराया जाएगा। लापरवाही की रिपोर्ट डीएम को भेजी जाएगी।
-रामप्रकाश, एसडीएम
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घाघी नाले पर बना बंधा फटने के बाद एक बार फिर क्षेत्र के किसानों को सिंचाई विभाग की लापरवाही का खामियाजा भुगतना पड़ा। दरेरी और कोलापुरवा के पास नहर कटने से सैकड़ों एकड़ गन्ने और धान की फसल जलमग्न हो गई है। यदि जल्दी ही नहर बंद नहीं की गई तो कई गांव भी इससे प्रभावित हो जाएंगे। ग्रामीणों का आरोप है कि जब नहर कटने वाली थी उसी समय इसकी सूचना सिंचाई विभाग के जेई को दी गई थी, बावजूद इसके आश्वासन के बाद भी नहर की मरम्मत नहीं की गई जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ा।
सुहेली नदी से निकली नहर में बरसात के पहले एक बूंद पानी नहीं था। किसान अपनी फसल में पानी लगाने के लिए ट्यूबवेल का सहारा ले रहे थे। बरसात होने पर नहर लबालब हो गई। नहर में अधिक पानी होने के कारण दरेेरी और कोलापुरवा के बीच नहर हर साल कट जाती है। किसानों ने सिंचाई विभाग को सूचना देकर नहर सही कराने की मांग की थी। सिंचाई विभाग के जेई ने मौका मुआयना कर नहर सही कराने का आश्वासन दिया था। आरोप है कि इसके बाद भी नहर ठीक नहीं की गई। नतीजा यह निकला कि नहर कट गई। नहर कटने से अजय गिरि का पांच एकड़, रामदुलारे का दो, सोबरन का चार, गुड्डा लाल का तीन एकड़ गन्ना तथा दो एकड़ धान, रतीराम का चार एकड़ गन्ना तथा दो एकड़ धान रामसनेही का पांच एकड़ गन्ना डूब गया है। इसके अलावा, दरेेेरी, घनश्याम पुरवा, कोलापुरवा, चौधरी पुरवा, बजरंग गढ़, ढखेरवा खालसा आदि गांवों के किसानों की फसल चौपट हो रही है।
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मरम्मत के नाम पर खर्च हुए थे बीस लाख रुपये
अप्रैल में सिंचाई विभाग ने नहर सफाई और मरम्मत के नाम पर बीस लाख रुपये खर्च किए था। इन रुपयों से सुहेली बैराज से पढुआ तक नहर में जमा कूड़ा करकट और कटे हुए स्थान को सही कराया गया था। नहर की मरम्मत कैसी हुई थी, नहर कटने से यह तथ्य उजागर हो गया है।
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हरसाल कटती है नहर
सिंचाई विभाग की लापरवाही का यह पहला मामला नहीं है। इसके पहले भी कई सालों से नहर कटती रही है। ग्रामीणों ने किसी तरह से नहर को श्रमदान करके बंद किया है। बरसात के कई महीनों बाद भी कटी हुई नहर सही नहीं की जाती, जिससे लोगों को आने जाने में भी समस्या का सामना करना पड़ता है।
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नहर कटने की सूचना मिली है। सिंचाई विभाग को सूचना दी गई है। शीघ्र ही उसे सही कराया जाएगा। लापरवाही की रिपोर्ट डीएम को भेजी जाएगी।
-रामप्रकाश, एसडीएम