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नालों पर बना दिए मकान कैसे निकले वर्षा का पानी
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Tue, 28 Jun 2016 11:23 PM IST
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समस्या
- फोटो : अमर उजाला
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बरसात में हर बार लबालब होती हैं सड़कें, गलियां और मोहल्ले
अतिक्रमण के कारण नहीं हो पाती तलीझाड़ सफाई
हर साल होता है काफी खर्च, नतीजा शून्य
बरसात से पहले हर साल नालों की तलीझाड़ सफाई कर शहर को जलभराव की समस्या से बचाने की कवायद की जाती है, लेकिन इसमें नालों पर हो चुके स्थाई निर्माण मसलन चबूतरे, दुकानें और इमारतें अड़ंगा बन जाती हैं। सफाई कर्मी से लेकर अधिकारी और पालिकाध्यक्ष के सामने भी कोई विकल्प नहीं बचता। कुल मिलाकर पानी निकास के लिए काफी हद तक शहरवासी ही जिम्मेदार नजर आ रहे हैं। वैसे तो शहर में शायद ही कोई नाला बचा हो, जो अतिक्रमण का शिकार न हो। सभी नालों पर अतिक्रमण हैं, जिससे कहीं उनका औचित्य ही खत्म हो चुका है तो कहीं वे नाली का रूप ले चुके हैं। बानगी के तौर पर यहां दो नालों की तस्वीर दी जा रही है।
सीन-1
फल मंडी का नाला: इस नाले से मेन रोड, खपरैला बाजार, मिश्राना, संकट देवी सहित कई मोहल्ले प्रभावित होते हैं। वजह है इस पर जगह-जगह अतिक्रमण हो चुका है। कहीं पर घुमावदार होकर नाली जैसा नजर आता है तो कहीं चौड़ा है। इससे इसकी सफाई भी पूरी तरह नहीं हो पाती और तेज वर्षा के समय समस्या उत्पन्न हो जाती है।
सीन-2
नई बस्ती का नाला: शहर की घनी आबादी वाले इस मोहल्ले में इस नाले की काफी उपयोगिता थी। कई वार्ड इससे जुड़े हैं, लेकिन लोगों ने मकान बनाकर इसका औचित्य ही खत्म कर दिया। यह नाला कहीं पर नजर आता है तो कहीं गायब हो चुका है। लोगों ने मकान और दुकान बनाकर इसको खत्म कर दिया। नतीजतन मामूली वर्षा में ही गलियां में जलभराव हो जाता है।
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कुछ लोगों के कारण समस्या झेलता है पूरा शहर
फल व्यापारी शब्बीर अहमद, अनवार, भल्लू और साजिद का कहना है कि नालों पर अतिक्रमण तो कुछ लोगों ने किया, लेकिन जलभराव की समस्या पूरा शहर झेलता है। वह कहते हैं कि शहर की मंडी के बीच से नाला निकाला है। बरसात के दौरान यही एक जल निकासी का साधन है, लेकिन अब तक इसकी सफाई नहीं हुई है। बारिश के दौरान फल मंडी तालाब बन जाती है, जिससे हम लोगों का काफी नुकसान हो जाता है।
नगर में छोटे बड़े करीब 66 नाले हैं। इसमें से करीब 52 नालों की सफाई हो चुकी है। महीने के अंत तक सभी नालों की तली झाड़ सफाई हो जाएगी। अतिक्रमण की समस्या है, जिस पर विचार विमर्श चल रहा है।
-अवनींद्र कुमार, ईओ-नगर पालिका लखीमपुर
नालों पर अतिक्रमण है, लेकिन इसके बावजूद सफाई कर्मचारी इनकी सफाई कर रहे हैं। नगर में जलभराव न हो इसके लिए पालिका प्रयासरत है।
-डॉ. इरा श्रीवास्तव, अध्यक्ष-नगर पालिका परिषद, लखीमपुर
अतिक्रमण के कारण नहीं हो पाती तलीझाड़ सफाई
हर साल होता है काफी खर्च, नतीजा शून्य
बरसात से पहले हर साल नालों की तलीझाड़ सफाई कर शहर को जलभराव की समस्या से बचाने की कवायद की जाती है, लेकिन इसमें नालों पर हो चुके स्थाई निर्माण मसलन चबूतरे, दुकानें और इमारतें अड़ंगा बन जाती हैं। सफाई कर्मी से लेकर अधिकारी और पालिकाध्यक्ष के सामने भी कोई विकल्प नहीं बचता। कुल मिलाकर पानी निकास के लिए काफी हद तक शहरवासी ही जिम्मेदार नजर आ रहे हैं। वैसे तो शहर में शायद ही कोई नाला बचा हो, जो अतिक्रमण का शिकार न हो। सभी नालों पर अतिक्रमण हैं, जिससे कहीं उनका औचित्य ही खत्म हो चुका है तो कहीं वे नाली का रूप ले चुके हैं। बानगी के तौर पर यहां दो नालों की तस्वीर दी जा रही है।
सीन-1
फल मंडी का नाला: इस नाले से मेन रोड, खपरैला बाजार, मिश्राना, संकट देवी सहित कई मोहल्ले प्रभावित होते हैं। वजह है इस पर जगह-जगह अतिक्रमण हो चुका है। कहीं पर घुमावदार होकर नाली जैसा नजर आता है तो कहीं चौड़ा है। इससे इसकी सफाई भी पूरी तरह नहीं हो पाती और तेज वर्षा के समय समस्या उत्पन्न हो जाती है।
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सीन-2
नई बस्ती का नाला: शहर की घनी आबादी वाले इस मोहल्ले में इस नाले की काफी उपयोगिता थी। कई वार्ड इससे जुड़े हैं, लेकिन लोगों ने मकान बनाकर इसका औचित्य ही खत्म कर दिया। यह नाला कहीं पर नजर आता है तो कहीं गायब हो चुका है। लोगों ने मकान और दुकान बनाकर इसको खत्म कर दिया। नतीजतन मामूली वर्षा में ही गलियां में जलभराव हो जाता है।
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कुछ लोगों के कारण समस्या झेलता है पूरा शहर
फल व्यापारी शब्बीर अहमद, अनवार, भल्लू और साजिद का कहना है कि नालों पर अतिक्रमण तो कुछ लोगों ने किया, लेकिन जलभराव की समस्या पूरा शहर झेलता है। वह कहते हैं कि शहर की मंडी के बीच से नाला निकाला है। बरसात के दौरान यही एक जल निकासी का साधन है, लेकिन अब तक इसकी सफाई नहीं हुई है। बारिश के दौरान फल मंडी तालाब बन जाती है, जिससे हम लोगों का काफी नुकसान हो जाता है।
नगर में छोटे बड़े करीब 66 नाले हैं। इसमें से करीब 52 नालों की सफाई हो चुकी है। महीने के अंत तक सभी नालों की तली झाड़ सफाई हो जाएगी। अतिक्रमण की समस्या है, जिस पर विचार विमर्श चल रहा है।
-अवनींद्र कुमार, ईओ-नगर पालिका लखीमपुर
नालों पर अतिक्रमण है, लेकिन इसके बावजूद सफाई कर्मचारी इनकी सफाई कर रहे हैं। नगर में जलभराव न हो इसके लिए पालिका प्रयासरत है।
-डॉ. इरा श्रीवास्तव, अध्यक्ष-नगर पालिका परिषद, लखीमपुर