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हिंदी हैं हमः व्यापार से हिंदी को जोड़कर बनाया जा सकता वैश्विक भाषा

Thu, 12 Aug 2021 12:41 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 12 Aug 2021 12:41 AM IST
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Hindi Hai Hum: Hindi can be made a global language by connecting business
शिक्षक बोले- इसके लिए सरकार और हर भारतीय को रहना होगा जागरूक
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लखीमपुर खीरी। हिंदी को वैश्विक पहचाने दिलाने के लिए जरूरी है कि बोलचाल से लेकर लिखने, पढ़ने और व्यापार आदि में इसका ज्यादा से ज्यादा प्रयोग किया जाए। इसके लिए हर भारतीय और सरकार को आगे आना होगा। शिक्षकों का कहना है कि हिंदी भाषा को बढ़ावा देने के लिए तमाम प्रयास हो रहे हैं। मगर सब कागजों तक ही सीमित है।
हिंदी को उन्नत भाषा बनाने के लिए प्रयास तो निरंतर जारी हैं। मगर, न तो हिंदी भाषा को सम्मान मिलता है और न इसे बोलने वालों को। राष्ट्र भाषा होने के बावजूद आज भी कई जगहों पर अंग्रेजी में काम होता है। हिंदी में लिखा-पढ़ी करने वालों को हीन दृष्टि से देखा जाता है। हिंदी को बढ़ावा देने के लिए जरूरी है कि सरकारी से लेकर निजी कार्यालयों में हिंदी भाषा का ही प्रयोग अनिवार्य हो।
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- प्रशांत सिंह, हिंदी विभागाध्यक्ष केन ग्रोअर्स नेहरू डिग्री कॉलेज, गोला
हिंदी को बढ़ावा देेने के लिए इसके प्रयोजन मूलक स्वरूप का व्यापक प्रचार प्रसार किया जाए। ताकि हमारी युवा पीढ़ी यह जान सके कि हिंदी सिर्फ पढ़ने लिखने की नहीं बल्कि रोजगार परक भाषा भी है। इसके लिए सरकार को प्रयोजन मूलक हिंदी को एक विषय के रूप में स्कूल से लेकर महाविद्यालय स्तर तक अनिवार्य किया जाए। तभी जाकर हिंदी वैश्विक भाषा बन सकेगी।
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- राकेश अग्रहरि, प्रोफेसर हिंदी विभाग केन ग्रोअर्स नेहरू डिग्री कॉलेज, गोला
हिंदी हमारी मातृ भाषा और हमारा गौरव है। इसके बावजूद अंग्रेजी भाषा का वर्चस्व कायम है। मातृभाषा होने के बावजूद लोग बोलने और लिखने में झिझकते हैं। जबकि मातृृभाषा बोलने में किसी प्रकार का संकोच नहीं होना चाहिए। सरकार को भी चाहिए कि सरकारी से लेकर निजी कार्यालयों में हिंदी भाषा में ही कार्य को अनिवार्य किया जाए।
- डॉ. शशिप्रभा बाजपेई, प्रोफेसर हिंदी, आर्य कन्या डिग्री कॉलेज लखीमपुर
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