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‘हिंदी हमारी सांस्कृतिक धरोहर, आओ करें इसका सम्मान’

Mon, 14 Sep 2020 11:31 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 14 Sep 2020 11:31 PM IST
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hindi divas special
धौरहरा/ ईसानगर। हिंदी हमारी राष्ट्र भाषा ही नहीं, बल्कि राष्ट्र का गौरव भी है। देश के विभिन्न राज्यों में हिंदी भाषा का प्रयोग होता है। मगर, उसके बाद भी हिंदी भाषा को जो गौरव मिलना चाहिए था वह अब तक नहीं मिला। ऐसे मेें बोलचाल के अलावा कामकाज में अधिक प्रयोग किए जाने से हिंदी का सम्मान बचा सकते हैं।
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वर्तमान में अंग्रेजी चलन बढ़ा है, लेकिन यह हमें मानसिक रूप से कमजोर कर रहा है। इसका दुष्परिणाम भी देखने को मिल रहा है। अंग्रेजी की ही देन है कि लोग पढ़-लिखकर एकल परिवार पसंद करते हैं। जबकि हमारी मातृभाषा हिंदी हमें स्नेह, ममता, प्रेम, करुणा और अपनेपन की भावना सिखाती है। परिवार और समाज को एक कड़ी में बांधकर रखना सिखाती है।
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-बाबू राम सागर, प्रधानाचार्य पब्लिक इंटर कॉलेज ईसानगर
युवा पीढ़ी को हमें सीखाना होगा कि हिंदी भाषा हमारी संस्कृति की पहचान है। अंग्रेजी बोलने वाले को अच्छी नजर से देखा जाता है। जबकि कार्यालयों में लोग हिंदी भाषा का प्रयोग करते हैं तो हेय दृष्टि से देखा जाता है या फिर कमजोर समझा जाता है। हमे यह संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने जीवन में हिंदी को महत्वपूर्ण स्थान देंगे।
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-प्रमोद यादव, हिंदी शिक्षक, पब्लिक इंटर कॉलेज ईसानगर
संविधान सभा में लंबी चर्चा के बाद 14 सितंबर 1949 को हिंदी को भारत की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया गया। संविधान में अनुच्छेद 343 से 351 तक राजभाषा की व्यवस्था की गयी। इसकी स्मृतियों को ताजा रखने के लिये हर वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। हम कह सकते हैं कि हर भारतीय की शक्ति हैं हिंदी, एक सहज अभिव्यक्ति है हिंदी।

-लालता प्रसाद बाजपेई, अध्यक्ष प्राथमिक शिक्षक संघ ईसानगर
हिंदी सिर्फ एक भाषा ही नहीं, बल्कि हमारी पहचान और भावना है। यह स्तुति के साथ आराधना है। अपनापन का अहसास कराने वाली यदि कोई भाषा है तो वह सिर्फ हिंदी है। आज का युवा हिंदी से दूर होता जा रहा है। इसके लिए सरकार के साथ आमलोगों को एक साथ मिलकर प्रयास करना होगा।
-गिरजाशंकर शुक्ला, प्रधानाचार्य सरस्वती शिशु मंदिर, रायपुर
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