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हाईटेक पुलिसिंग पर सत्ता की हनक भारी, नहीं हुई गिरफ्तारी

Sun, 14 Mar 2021 11:34 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 14 Mar 2021 11:34 PM IST
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High tech policing is a matter of power, but no arrest
लखीमपुर खीरी। जिले की हाईटेक पुलिसिंग पर सत्ता की हनक भारी पड़ती दिख रही है। खीरी-पीलीभीत उपनिवेशन संघ चुनाव में भाजपा के दो गुटों के बीच हुए भारी बवाल और फायरिंग मामले में पुलिस की जांच एक कदम आगे नहीं बढ़ सकी है।
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थाना सपूर्णानगर क्षेत्र में खीरी-पीलीभीत उपनिवेशन संघ अध्यक्ष चुनाव को लेकर भाजपा दो गुटों में बंट गई थी। नौ मार्च को अध्यक्ष पद की दावेदारी के दौरान दोनों गुट आमने-सामने आकर सारी हदें पार कर दी थीं और जमकर बवाल काटा था। कई राउंड फायरिंग भी की थी, जिसमें दो लोग घायल भी हुए थे। बवाल के बाद दोनों गुट एक दूसरे पर बवाल का ठीकरा फोड़ने लगे, जिस वक्त बवाल हुआ। उस समय भाजपा जिलाध्यक्ष सुनील कुमार सिंह, मोहम्मदी विधायक लोकेंद्र प्रताप सिंह, श्रीनगर विधायक मंजू त्यागी सहित कई पुलिस और राजस्व के अधिकारी मौजूद थे। पुलिस ने एक गुट के धीरेंद्र कुमार की तहरीर पर उमाशंकर मिश्रा, उनके पुत्र राहुल मिश्रा निवासी गोटैय्याबाग कोतवाली सदर व 40-45 अज्ञात, जबकि दूसरे पक्ष के राहुल मिश्रा की ओर से वीरेंद्र शुक्ला समेत 21 लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज की थी, लेकिन इनमें अभी किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
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खास बात यह है कि अखबारों में बवाल के दौरान फायरिंग करने वालों की तमंचों के साथ फोटो भी छपी, लेकिन घटना को हुए छह दिन बीच चुके हैं, लेकिन पुलिस की जांच अभी तक एक कदम आगे नहीं बढ़ी है। खासबात यह है कि पुलिस अखबारों में छपी फोटो और सोशल मीडिया पर तमंचा लहराने वालों की वायरल हुई वीडियो के बाद भी उनकी अभी तक पहचान नहीं कर सकी है। दोनों गुट भाजपा के हैं। इसलिए माना जा रहा है कि मामला सत्ता पक्ष का होने के कारण पुलिस भी हाथ नहीं डालना चाहती है।
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प्रकरण की जांच जारी है। कुछ लोगों की पहचान हुई है। उनकी गिरफ्तारी के दबिशें दी जा रही हैं।
- सुनील कुमार सिंह, कार्यवाहक एसओ संपूर्णानगर
दोनों तरफ से रिपोर्ट दर्ज है। विवेचनात्मक कार्रवाई चल रही है। जो दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। फायरिंग करने वालों की पुलिस पहचान कराने का प्रयास कर रही है।
- अरुण कुमार सिंह, एएसपी
फायरिंग वालों को आखिर क्यों पहचान नहीं पा रही पुलिस
संपूर्णानगर। व्यापारी व आम आदमी इस गोलीकांड की बात करते हुए सिहर जाता है, लेकिन पुलिस पर इसका कोई भी फर्क नहीं पड़ रहा है। घटना बीती नौ मार्च की है। तब से करीब 132 घंटे बीत चुके है लेकिन पुलिस अभी बस जांच जारी है का ही रोना रो रही है।

लोगों में चर्चा आम है कि पुलिस आरोपियों को पहचानना ही नहीं चाहती। क्योंकि फायरिंग करने वाले सत्तापक्ष के करीबी लोग हैं जिन्हें कई नेताओं के साथ अक्सर देखा जाता है। लोगों के मुताबिक फायरिंग करने वालों की पहचान इतनी मुश्किल नहीं रह गई थी क्यों कि उनके फायर करते वीडियो और फोटो वायरल हो चुके है और कई समाचार पत्रों में भी प्रकाशित हो चुके हैं। इतने घंटे बीत जाने के बाद भी फायरिंग करने वालों के पकड से दूर होने से पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है और लोगों का कहना है कि इससे अपराधियों में पुलिस का खौफ नहीं रह जाएगा।
मामले में फायरिंग करने वाले को साक्ष्यों के आधार पर चिह्नित किया जा रहा है उनकी अभी पहचान नहीं हुई है। मामले में जांच की जा रही है।
- संजय नाथ तिवारी, सीओ पलिया
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