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सीएचसी रमियाबेहड़ ही नहीं हर जगह भी चल रहा है अवैध वसूली का खेल

Tue, 28 Sep 2021 11:24 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 28 Sep 2021 11:24 PM IST
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Health
लखीमपुर खीरी। सीएचसी रमियाबेहड़ में आशाओं से अवैध वसूली की पोल खुलने के बाद हरकत में आए स्वास्थ्य विभाग ने मामले में जांच तेज कर दी है, वहीं पूरी जिले में आशाओं के शोषण और उनका भुगतान न करने के हालात सभी जगह कमोवेश एक से मिले हैं। हकीकत यह है कि सीएचसी से लेकर डीपीएमयू यूनिट में अवैध वसूली इस कदर व्याप्त है कि उसे खत्म करना स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती है। आलम यह है कि बिना कमीशन के किसी का भुगतान तक नहीं होता है। इसका प्रमाण जिले की करीब 3600 आशाओं की पिछले कई सालों बकाया प्रोत्साहन राशि है।
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योगी सरकार भले ही भ्रष्टाचार को खत्म करने की बात कर रही है, लेकिन जिले के स्वास्थ्य महकमे में यह दिन दूने रात चौगुने की तरह फल फूल रहा है। खुलासा उस वक्त हुआ जब रमियाबेहड़ सीएचसी का निरीक्षण करने पहुंचे डीएम आशा वर्करों ने भुगतान के बदले कमीशन मांगे जाने की शिकायत की। इस पर डीएम के जांच कराने पर मामला सही निकला, जिस पर डीएम ने पूर्व सीएचसी अधीक्षक सुभाष वर्मा समेत दो अन्य लोगों पर मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए, जिसके बाद मामले को शुरू में नकार रहे सीएमओ डॉ. शैलेंद्र भटनागर ने मंगलवार को एसीएमओ डॉ. अश्वनी कुमार के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम को सीएचसी भेजकर मामले की जांच कराई है। इस संबंध में सीएमओ डॉ. शैलेंद्र भटनागर का कहना है कि रमियाबेहड़ सीएचसी पर टीम भेजी थी, जिसकी जांच रिपोर्ट आने का इंतजार है। साथ ही कहा कि हर सीएचसी पर एसीएमओ को भेजकर बकाया भुगतान की स्थिति पता कराई जाएगी। भुगतान में देरी मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई होगी।
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मितौली सीएचसी पर ही 40 लाख से अधिक का बकाया
मितौली। आशाओं के पारिश्रमिक का ये हाल है कि अकेले मितौली में ही आशाओं का मानदेय और प्रोत्साहन राशि करीब 40 लाख रुपया बकाया है, जिसका भुगतान पिछले तीन साल से नहीं हुआ है। यहां 247 आशा वर्कर तैनात हैं। हैरानी वाली बात यह है कि राज्य सरकार जो 750 रुपये मानदेय देती है वह भी 2019- 2020 का अभी तक बकाया है, जबकि 2020- 2021 का भुगतान किया गया है। नाम न छापने की शर्त पर एक आशा वर्कर ने बातया कि बकाया भुगतान न मिलने की वजह कमीशन है। आशा वर्करों ने बताया कि 16 माह का भत्ता नहीं मिला। वहीं न तो फलेरिया का भुगतान मिला और न ही कोविड सर्वे का। विभागीय सूत्रों की माने तो करीब आशा वर्करों का 40 लाख से अधिक का भुगतान बकाया है।
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कमीशन के कारण नहीं हो रहा भुगतान
धौरहरा सीएचसी में भी आशा वर्करों से लेकर संगिनी का लाखों का भुगतान बकाया है। पैसा खातों में भेजने के लिए कमीशन की मांग की जा रही है। सीएचसी सूत्रों की माने तो को मई से अगस्त तक का मानदेय तक नहीं मिला है। कोविड और फालेरिया कार्यक्रम का भी पैसा नहीं मिला। राज्य सरकार की ओर से मिलने वाला 750 रुपये का मानदेय भी दो साल से नहीं मिला है। भुगतान न मिलने की वजह कमीशन बताया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि 750 रुपये प्रतिमाह की दर से दो साल का पेमेंट करने के बदले दो से तीन हजार मांगे जा रहे हैं। न तो सीएचसी पर कोई सुनने वाला है और न ही डीपीएमयू यूनिट में, क्योंकि सभी की ऊपर से नीचे तक सांठ गांठ है।

इस तरह बनता है आशा वर्करों का मानदेय
हर प्रसव पर-600 रुपये, रोजाना टीकाकरण -150, डायरी भरना- 2000, पुरुष नसबंदी-400, महिला नसबंदी-300, मदर मीटिंग प्रति तिमाही-100, प्रधानमंत्री मातृत्व योजना लाभार्थी पंजीकरण-50, जन्म के बाद-50, एचबीएनसी के तहत 42 दिन तक देखरेख पर - 200, अंतरा टीकाकरण-100, पीपीआईयूसीडी के लिए-150, एचआरपी प्रति केस-300 रुपए मिलता है।
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