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एईएस पीड़ित बच्ची की मौत, तीन बच्चे और भर्ती
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आईसीयू वार्ड में भर्ती बच्चे। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। जिले में एईएस (एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम) ने पांव पसारने शुरू कर दिए हैं। निरंतर इससे पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ रही है, अब तक 11 बच्चे संक्रमित मिल चुके हैं। सोमवार को भी एईएस की आशंका के चलते बुखार पीड़ित तीन बच्चों को आईसीयू वार्ड में भर्ती किया गया। जिससे यहां पर पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़कर चार हो गई। इधर, एक बच्ची की भी मौत हो गई।
बुखार आने पर हैदराबाद निवासी धीरज मिश्रा पांच वर्षीय पुत्री यशी, धौरहरा निवासी रमेश दस वर्षीय पुत्र छोटू, निघासन निवासी रत्नेश कुमार चार वर्षीय पुत्री शगुन, निघासन के डंडूरी निवासी हरिराम नौ वर्षीय पुत्री चांदनी, भूलनपुरवा निवासी अवधराम छह वर्षीय पुत्री काजल, बेलरायां निवासी ठग्गू 12 वर्षीय पुत्र संजय एवं लहरपुर के गोडसरिया निवासी सुनील पंाच वर्षीय पुत्र प्रांशू एवं निशादनगर निवासी खूबलाल छह वर्षीय पुत्री सुमनी को लेकर जिला अस्पताल आए। हालत गंभीर होने पर बच्चों को चिल्ड्रन वार्ड में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। काजल, संजय, प्रांशू की हालत में सुधार न होने पर आईसीयू वार्ड और यशी को मेडिकल कॉलेज लखनऊ रेफर कर दिया गया। आईसीयू वार्ड में एक बच्ची पहले से भर्ती थी, इस तरह यहां पीड़ित बच्चों की संख्या चार हो गई।
इधर इलाज के दौरान निघासन निवासी हरीराम की नौ वर्षीय पुत्री चांदनी की सोमवार की शाम को मौत हो गई। जबकि अन्य बच्चों का इलाज चल रहा है।
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इस तरह काम करता है एईएस का वायरस
इंसेफ्लाइटिस वास्तव में मानव मस्तिष्क से जुड़ी बीमारी है। मस्तिष्क में लाखों कोशिकाएं और तंत्रिकाएं होती हैं। इनके सहारे शरीर के अंग काम करते हैं। जब इन कोशिकाओं में सूजन या कोई अन्य दिक्कत आ जाती है तो इसे ही एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम कहते हैं। इसके वायरस शरीर में पहुंचकर खून में शामिल हो जाते हैं। जहां पर इनकी संख्या तेजी से बढ़ने लगती है। खून के साथ वायरस मस्तिष्क में पहुंचकर कोशिकाओं में सूजन का कारण बन शरीर के सेंट्रल नर्वस सिस्टम को खराब कर देते हैं।
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लक्षण
एईएस होने पर तेज बुखार आता है। इससे बच्चों के शरीर में ऐंठन शुरू हो जाती है। इसके बाद तंत्रिका तंत्र काम करना बंद कर देता है। तेज बुखार की वजह से बच्चे बेहोश तक हो जाते हैं। साथ ही झटके तक आने लगते हैं। समय पर इलाज न मिलने पर मौत तक हो जाती है।
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बचाव
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरपी वर्मा का कहना है कि तेज बुखार होने पर शरीर को ताजे पानी से पोंछते रहें। माथे पर गीले कपड़े की पट्टी रखें, जिससे बुखार कम हो सके। बच्चे की गर्दन सीधी रखें। बिना डॉक्टर को दिखाए बुखार की दवा व सीरप न दें। बेहोशी एवं दौरा आने पर बच्चे को सरकारी अस्पताल लेकर जाएं।
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गतवर्षों में मिले एईएस पीड़ित बच्चे
2018-87
2019-84
2020-21
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आईसीयू वार्ड में अब तक कुल भर्ती हुए बच्चे- 16
एईएस पीड़ित मिले बच्चे- 11
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चिल्ड्रन वार्ड में भर्ती एक बच्ची की सोमवार को मौत हो गई। एईएस की आशंका के चलते तीन बच्चों को आईसीयू वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया, जबकि एक बच्चा पहले से वहां पर भर्ती था। इससे वहां पर भर्ती बच्चों की संख्या अब चार हो गई है। सभी का इलाज चल रहा है और हालत में सुधार बताया जा रहा है।
-डॉ. सीएस सिंह, प्रभारी सीएमएस जिला अस्पताल
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बुखार आने पर हैदराबाद निवासी धीरज मिश्रा पांच वर्षीय पुत्री यशी, धौरहरा निवासी रमेश दस वर्षीय पुत्र छोटू, निघासन निवासी रत्नेश कुमार चार वर्षीय पुत्री शगुन, निघासन के डंडूरी निवासी हरिराम नौ वर्षीय पुत्री चांदनी, भूलनपुरवा निवासी अवधराम छह वर्षीय पुत्री काजल, बेलरायां निवासी ठग्गू 12 वर्षीय पुत्र संजय एवं लहरपुर के गोडसरिया निवासी सुनील पंाच वर्षीय पुत्र प्रांशू एवं निशादनगर निवासी खूबलाल छह वर्षीय पुत्री सुमनी को लेकर जिला अस्पताल आए। हालत गंभीर होने पर बच्चों को चिल्ड्रन वार्ड में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। काजल, संजय, प्रांशू की हालत में सुधार न होने पर आईसीयू वार्ड और यशी को मेडिकल कॉलेज लखनऊ रेफर कर दिया गया। आईसीयू वार्ड में एक बच्ची पहले से भर्ती थी, इस तरह यहां पीड़ित बच्चों की संख्या चार हो गई।
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इधर इलाज के दौरान निघासन निवासी हरीराम की नौ वर्षीय पुत्री चांदनी की सोमवार की शाम को मौत हो गई। जबकि अन्य बच्चों का इलाज चल रहा है।
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इस तरह काम करता है एईएस का वायरस
इंसेफ्लाइटिस वास्तव में मानव मस्तिष्क से जुड़ी बीमारी है। मस्तिष्क में लाखों कोशिकाएं और तंत्रिकाएं होती हैं। इनके सहारे शरीर के अंग काम करते हैं। जब इन कोशिकाओं में सूजन या कोई अन्य दिक्कत आ जाती है तो इसे ही एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम कहते हैं। इसके वायरस शरीर में पहुंचकर खून में शामिल हो जाते हैं। जहां पर इनकी संख्या तेजी से बढ़ने लगती है। खून के साथ वायरस मस्तिष्क में पहुंचकर कोशिकाओं में सूजन का कारण बन शरीर के सेंट्रल नर्वस सिस्टम को खराब कर देते हैं।
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लक्षण
एईएस होने पर तेज बुखार आता है। इससे बच्चों के शरीर में ऐंठन शुरू हो जाती है। इसके बाद तंत्रिका तंत्र काम करना बंद कर देता है। तेज बुखार की वजह से बच्चे बेहोश तक हो जाते हैं। साथ ही झटके तक आने लगते हैं। समय पर इलाज न मिलने पर मौत तक हो जाती है।
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बचाव
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरपी वर्मा का कहना है कि तेज बुखार होने पर शरीर को ताजे पानी से पोंछते रहें। माथे पर गीले कपड़े की पट्टी रखें, जिससे बुखार कम हो सके। बच्चे की गर्दन सीधी रखें। बिना डॉक्टर को दिखाए बुखार की दवा व सीरप न दें। बेहोशी एवं दौरा आने पर बच्चे को सरकारी अस्पताल लेकर जाएं।
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गतवर्षों में मिले एईएस पीड़ित बच्चे
2018-87
2019-84
2020-21
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आईसीयू वार्ड में अब तक कुल भर्ती हुए बच्चे- 16
एईएस पीड़ित मिले बच्चे- 11
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चिल्ड्रन वार्ड में भर्ती एक बच्ची की सोमवार को मौत हो गई। एईएस की आशंका के चलते तीन बच्चों को आईसीयू वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया, जबकि एक बच्चा पहले से वहां पर भर्ती था। इससे वहां पर भर्ती बच्चों की संख्या अब चार हो गई है। सभी का इलाज चल रहा है और हालत में सुधार बताया जा रहा है।
-डॉ. सीएस सिंह, प्रभारी सीएमएस जिला अस्पताल