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जिला अस्पताल का जन औषधि केंद्र बंद, मरीजों की बढ़ी परेशानी
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जिला अस्पताल में बंद पड़ा प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। गरीब मरीजों को सस्ती दर पर दवाएं उपलब्ध कराने के लिए जिला अस्पताल में खोला गया जन औषधि केंद्र पिछले कई दिनों से बंद है। जिम्मेदार बंद होने का कारण लाइसेंस का नवीनीकरण न होना बता रहे हैं। इसके बंद होने से गरीब मरीजों की जेब पर बोझ बढ़ गया है। अस्पताल में न मिल पाने वाली दवाएं मरीज महंगी दर पर बाजार से खरीदने को मजबूर हैं। जबकि जन औषधि केंद्र पर बाजार से आधी कीमत पर दवाएं मिल जाती थी।
बाजार में विभिन्न बीमारियों की दवाएं अलग अलग कीमत पर बिक रही हैं। हर निर्माता कंपनी ने अपने ब्रांड अनुसार कीमतें निर्धारित कर रखी हैं। किसी कंपनी की एक टेबलेट का मूल्य दो रुपये तो किसी का दस रुपये तक है। गरीबों को महंगी दवाओं से राहत दिलाने के लिए प्रधानमंत्री की पहल पर जिला अस्पताल में 15 जुलाई 2018 को जन औषधि केंद्र खोला गया। जहां पर मरीजों को बाजार मूल्य से 50 से 70 प्रतिशत कम कीमत पर दवाएं मिलने लगीं, जिससे मरीजों को इलाज कराना आसान हो गया। मगर, पिछले करीब एक माह से अस्पताल का औषधि केंद्र बंद है। इससे बेचारे मरीज फिर से बाजार की महंगी दवाएं खरीदकर इलाज कराने के लिए मजबूर हैं। औषधि केंद्र के कर्मचारी ने बताया कि राजस्थान की एक फर्म का टेंडर था, लेकिन दवाएं आपूर्ति में लापरवाही के कारण नवीनीकरण न होने के कारण औषधि केंद्र बंद हो गया। कब तक खुलेगा इसके बारे में कहना मुश्किल है।
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20 से 25 हजार रोजाना की होती थी बिक्री
दवाओं का मूल्य कम होने के कारण जिला अस्पताल के जन औषधि केंद्र पर मरीजों की भीड़ रहती थी। दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता होने पर करीब 20 से 25 हजार रुपये तक की दवाएं रोज बिकती थी। भीड़ उमड़ने से स्टोर पर दवाओं की कमी ही बनी रहती थी।
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इसलिए सस्ती मिलती थी दवाएं
एक ही सॉल्ट की दवाइयों की कीमत कंपनी के आधार पर अलग- अलग होती हैं। जिस सॉल्ट की दवा जन औषधि केंद्र पर 25 से 30 रुपये होती है, उसी सॉल्ट की दवा विभिन्न कंपनियों की 70 से 100 रुपये तक होती है। दवा का जेनेरिक नाम एक ही होता है। डॉक्टर जिस बीमारी की दवा लिखते हैं जन औषधि केंद्र पर उसके सॉल्ट के नाम से दवा मिलती है। यह सीधे कंपनी से रिटेलर तक पहुंचती है। इसलिए सस्ती होती है। वहीं इसके मूल्य निर्धारण पर सरकार का अंकुश होता है। जबकि पेटेंट दवाओं की कीमत दवा निर्माता कंपनी अपने अनुसार निर्धारित करती है। इसलिए वह महंगी होती है।
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दवा मूल्य: बीमारी, जन औषधि केंद्र, मेडिकल स्टोर
दिल 23 300
एलर्जी 19 150
ब्लड शुगर 40 105
ब्लड प्रेशर 25 275
खांसी 23 120
खून की कमी 19 95
कोलेस्ट्राल छह 60
दर्द 10 90
दिमाग 25 170
( जन औषधि केंद्र एवं विभिन्न कंपनियों के 10 टेबलेट के एक पत्ते का अनुमानित मूल्य)
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पिछले करीब एक माह से जन औषधि केंद्र बंद है। इसका कारण टेंडर का नवीनीकरण न होना बताया जाता है। नवीनीकरण कब होगा इसके बारे में कहना मुश्किल है।
-डॉ. आरसी अग्रवाल सीएमएस, जिला अस्पताल
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बाजार में विभिन्न बीमारियों की दवाएं अलग अलग कीमत पर बिक रही हैं। हर निर्माता कंपनी ने अपने ब्रांड अनुसार कीमतें निर्धारित कर रखी हैं। किसी कंपनी की एक टेबलेट का मूल्य दो रुपये तो किसी का दस रुपये तक है। गरीबों को महंगी दवाओं से राहत दिलाने के लिए प्रधानमंत्री की पहल पर जिला अस्पताल में 15 जुलाई 2018 को जन औषधि केंद्र खोला गया। जहां पर मरीजों को बाजार मूल्य से 50 से 70 प्रतिशत कम कीमत पर दवाएं मिलने लगीं, जिससे मरीजों को इलाज कराना आसान हो गया। मगर, पिछले करीब एक माह से अस्पताल का औषधि केंद्र बंद है। इससे बेचारे मरीज फिर से बाजार की महंगी दवाएं खरीदकर इलाज कराने के लिए मजबूर हैं। औषधि केंद्र के कर्मचारी ने बताया कि राजस्थान की एक फर्म का टेंडर था, लेकिन दवाएं आपूर्ति में लापरवाही के कारण नवीनीकरण न होने के कारण औषधि केंद्र बंद हो गया। कब तक खुलेगा इसके बारे में कहना मुश्किल है।
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20 से 25 हजार रोजाना की होती थी बिक्री
दवाओं का मूल्य कम होने के कारण जिला अस्पताल के जन औषधि केंद्र पर मरीजों की भीड़ रहती थी। दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता होने पर करीब 20 से 25 हजार रुपये तक की दवाएं रोज बिकती थी। भीड़ उमड़ने से स्टोर पर दवाओं की कमी ही बनी रहती थी।
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इसलिए सस्ती मिलती थी दवाएं
एक ही सॉल्ट की दवाइयों की कीमत कंपनी के आधार पर अलग- अलग होती हैं। जिस सॉल्ट की दवा जन औषधि केंद्र पर 25 से 30 रुपये होती है, उसी सॉल्ट की दवा विभिन्न कंपनियों की 70 से 100 रुपये तक होती है। दवा का जेनेरिक नाम एक ही होता है। डॉक्टर जिस बीमारी की दवा लिखते हैं जन औषधि केंद्र पर उसके सॉल्ट के नाम से दवा मिलती है। यह सीधे कंपनी से रिटेलर तक पहुंचती है। इसलिए सस्ती होती है। वहीं इसके मूल्य निर्धारण पर सरकार का अंकुश होता है। जबकि पेटेंट दवाओं की कीमत दवा निर्माता कंपनी अपने अनुसार निर्धारित करती है। इसलिए वह महंगी होती है।
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दवा मूल्य: बीमारी, जन औषधि केंद्र, मेडिकल स्टोर
दिल 23 300
एलर्जी 19 150
ब्लड शुगर 40 105
ब्लड प्रेशर 25 275
खांसी 23 120
खून की कमी 19 95
कोलेस्ट्राल छह 60
दर्द 10 90
दिमाग 25 170
( जन औषधि केंद्र एवं विभिन्न कंपनियों के 10 टेबलेट के एक पत्ते का अनुमानित मूल्य)
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पिछले करीब एक माह से जन औषधि केंद्र बंद है। इसका कारण टेंडर का नवीनीकरण न होना बताया जाता है। नवीनीकरण कब होगा इसके बारे में कहना मुश्किल है।
-डॉ. आरसी अग्रवाल सीएमएस, जिला अस्पताल