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अस्पताल में बाहरी भोजन के वितरण पर लगाई रोक
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लखीमपुर खीरी। गायत्री परिवार की ओर से जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए माता भगवती देवी भोजन प्रसाद सेवा शुरू की गई। मगर, सीएमएस ने अस्पताल परिसर में इसके वितरण करने पर रोक लगा दी है।
जिला अस्पताल में भर्ती मरीज अैर उनके तीमारदारों को शुद्ध भोजन मुहैया कराने के लिए गायत्री परिवार की ओर से माता भगवती देवी भोजन प्रसाद सेवा शुरू की गई। इसके तहत गायत्री परिवार युवा प्रकोष्ठ के अनुराग मौर्या अपने साथियों के साथ अस्पताल के रैन बसेरे में मरीजों को सुबह औषधीय चाय एवं बिस्कुट, करीब 11 बजे मूंग की दाल, रोटी और चावल और रात में मीठी दलिया, सब्जी रोटी आदि वितरित करते आ रहे थे। मगर, जिला अस्पताल के सीएमएस ने आपत्ति जताते हुए अस्पताल में चाय एवं भोजन वितरण पर रोक लगा दी है। इससे गायत्री परिवार के लोगों को मरीजों की खातिर अस्पताल के बाहर सड़क पर भोजन वितरण करना पड़ रहा है। ऐसे में मरीजों के तीमारदारों भोजन लेने के लिए सड़क पर आना पड़ता है। हालांकि गायत्री परिवार के लोगों का कहना है कि रैन बसेेरे में भोजन वितरण करने में सुविधा होती थी और तीमारदारों को भी आसान रहता था। मगर, अब रोड पर खड़े होकर बांटना पड़ता है।
मरीजों के खाने के लिए अस्पताल में रसोई हैं। डॉक्टर जिस मरीज को खाना देने के लिए कहते हैं उन्हें मूंग की दाल रोटी आदि उपलब्ध कराई जाती है। ऐसे में किसी बाहरी के भोजन वितरण की आवश्यकता नहीं है।
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-डॉ. आरके वर्मा, सीएमएस
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जिला अस्पताल में भर्ती मरीज अैर उनके तीमारदारों को शुद्ध भोजन मुहैया कराने के लिए गायत्री परिवार की ओर से माता भगवती देवी भोजन प्रसाद सेवा शुरू की गई। इसके तहत गायत्री परिवार युवा प्रकोष्ठ के अनुराग मौर्या अपने साथियों के साथ अस्पताल के रैन बसेरे में मरीजों को सुबह औषधीय चाय एवं बिस्कुट, करीब 11 बजे मूंग की दाल, रोटी और चावल और रात में मीठी दलिया, सब्जी रोटी आदि वितरित करते आ रहे थे। मगर, जिला अस्पताल के सीएमएस ने आपत्ति जताते हुए अस्पताल में चाय एवं भोजन वितरण पर रोक लगा दी है। इससे गायत्री परिवार के लोगों को मरीजों की खातिर अस्पताल के बाहर सड़क पर भोजन वितरण करना पड़ रहा है। ऐसे में मरीजों के तीमारदारों भोजन लेने के लिए सड़क पर आना पड़ता है। हालांकि गायत्री परिवार के लोगों का कहना है कि रैन बसेेरे में भोजन वितरण करने में सुविधा होती थी और तीमारदारों को भी आसान रहता था। मगर, अब रोड पर खड़े होकर बांटना पड़ता है।
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मरीजों के खाने के लिए अस्पताल में रसोई हैं। डॉक्टर जिस मरीज को खाना देने के लिए कहते हैं उन्हें मूंग की दाल रोटी आदि उपलब्ध कराई जाती है। ऐसे में किसी बाहरी के भोजन वितरण की आवश्यकता नहीं है।
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-डॉ. आरके वर्मा, सीएमएस