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यहां तो सीएचसी पर भी एआरवी का टोटा
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लखीमपुर खीरी। जिला अस्पताल ही नहीं बल्कि सीएचसी पर भी एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) का अकाल है। एआरवी न होने के कारण पीड़ित महंगे दामों पर बाजार से वैक्सीन खरीदकर लगवाने को मजबूर हैं।
15 फरवरी से जिला अस्पताल में और 20 फरवरी से सीएचसी पर एआरवी समाप्त हो चुकी हैं। मगर, कुत्ता, बंदर आदि के काटने से पीड़ित लोगों की संख्या दिन पर दिन जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी तक उमड़ रही है। पीड़ितों को हर जगह से एआरवी खत्म होने का जवाब मिलता है। ऐसे में रेबीज के डर से पीड़ित बाजार से वैक्सीन खरीदकर लगवाने को मजबूर हैं। वहीं जो लोग इसे खरीदने में सक्षम नहीं है वह आने की प्रतीक्षा में जान जोखिम में डाल रहे हैं। अकेले जिला अस्पताल में ही रोजाना सौ से अधिक लोग आते हैं। इससे कई लोग बाजार से लाकर वैक्सीन लगवा लेते हैं। मगर, बेहद गरीब लोग घर लौट जाते हैं। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि डिमांड भेजी गई है। आने पर ही लगाए जा सकेंगे।
बिजुआ सीएचसी पर एंटी रेबीज वैक्सीन खत्म हो चुकी है। पीड़ित मजबूरन बाजार से 370 रुपये की वैक्सीन खरीदने को मजबूर हैं। निशुल्क एआरवी लगवाने के लिए रोजाना 40 से 50 पीड़ित बिजुआ सीएचसी पहुंच रहे हैं। मगर, वैक्सीन न होने पर लौट जाते हैं। फार्मासिस्ट डॉ. संकटा प्रसाद का कहना है कि एंटी रेबीज वैक्सीन खत्म हो चुकी है। इसकी डिमांड भी जिला मुख्यालय पर भेजी जा चुकी है।
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बांकेगंज सीएचसी पर पिछले 15 दिनों से (एआरवी) एंटी रेबीज वैक्सीन का टोटा है। जबकि कस्बा सहित आसपास क्षेत्र से करीब 50 लोग रोजाना कुत्ता, बंदर आदि के काटने पर वैक्सीन लगवाने के लिए आते हैं। मगर, एआरवी न होने की जानकारी मिलने पर लौट जाते हैं। एआरवी लगवाने के लिए सीएचसी आने वालों का कहना है कि वैक्सीन न होने के कारण बाजार से खरीदना पड़ता है। अधीक्षक डॉ. केके रंजन का कहना है कि एआरवी की डिमांड जिले पर भेजी गई है। एक दो दिन में मिलने की संभावना है। शासन की नीति गरीबों के लिए बनी परेशानी
अस्पताल के लोगों का कहना है कि पहले लोकल पर्चेज के लिए बजट मिलता था। एआरवी की सप्लाई न मिलने पर इसी बजट से वैक्सीन बाजार से खरीदकर लगा दी जाती थी लेकिन सरकार ने कॉरपोरेशन व्यवस्था करके बजट देना बंद करने के साथ लोकल पर्चेज पर भी बैन लगा दिया।
एआरवी के लिए कॉरपोरेशन को डिमांड भेजे हुए करीब एक महीना हो चुका है। मगर, अब तक वैक्सीन नहीं मिली। कॉरपोरेशन से इसी सप्ताह वैक्सीन का मिलना बताया गया है।
-विनय कुमार, प्रभारी फार्मासिस्ट जनपदीय वेयर हाउस
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15 फरवरी से जिला अस्पताल में और 20 फरवरी से सीएचसी पर एआरवी समाप्त हो चुकी हैं। मगर, कुत्ता, बंदर आदि के काटने से पीड़ित लोगों की संख्या दिन पर दिन जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी तक उमड़ रही है। पीड़ितों को हर जगह से एआरवी खत्म होने का जवाब मिलता है। ऐसे में रेबीज के डर से पीड़ित बाजार से वैक्सीन खरीदकर लगवाने को मजबूर हैं। वहीं जो लोग इसे खरीदने में सक्षम नहीं है वह आने की प्रतीक्षा में जान जोखिम में डाल रहे हैं। अकेले जिला अस्पताल में ही रोजाना सौ से अधिक लोग आते हैं। इससे कई लोग बाजार से लाकर वैक्सीन लगवा लेते हैं। मगर, बेहद गरीब लोग घर लौट जाते हैं। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि डिमांड भेजी गई है। आने पर ही लगाए जा सकेंगे।
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बिजुआ सीएचसी पर एंटी रेबीज वैक्सीन खत्म हो चुकी है। पीड़ित मजबूरन बाजार से 370 रुपये की वैक्सीन खरीदने को मजबूर हैं। निशुल्क एआरवी लगवाने के लिए रोजाना 40 से 50 पीड़ित बिजुआ सीएचसी पहुंच रहे हैं। मगर, वैक्सीन न होने पर लौट जाते हैं। फार्मासिस्ट डॉ. संकटा प्रसाद का कहना है कि एंटी रेबीज वैक्सीन खत्म हो चुकी है। इसकी डिमांड भी जिला मुख्यालय पर भेजी जा चुकी है।
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बांकेगंज सीएचसी पर पिछले 15 दिनों से (एआरवी) एंटी रेबीज वैक्सीन का टोटा है। जबकि कस्बा सहित आसपास क्षेत्र से करीब 50 लोग रोजाना कुत्ता, बंदर आदि के काटने पर वैक्सीन लगवाने के लिए आते हैं। मगर, एआरवी न होने की जानकारी मिलने पर लौट जाते हैं। एआरवी लगवाने के लिए सीएचसी आने वालों का कहना है कि वैक्सीन न होने के कारण बाजार से खरीदना पड़ता है। अधीक्षक डॉ. केके रंजन का कहना है कि एआरवी की डिमांड जिले पर भेजी गई है। एक दो दिन में मिलने की संभावना है। शासन की नीति गरीबों के लिए बनी परेशानी
अस्पताल के लोगों का कहना है कि पहले लोकल पर्चेज के लिए बजट मिलता था। एआरवी की सप्लाई न मिलने पर इसी बजट से वैक्सीन बाजार से खरीदकर लगा दी जाती थी लेकिन सरकार ने कॉरपोरेशन व्यवस्था करके बजट देना बंद करने के साथ लोकल पर्चेज पर भी बैन लगा दिया।
एआरवी के लिए कॉरपोरेशन को डिमांड भेजे हुए करीब एक महीना हो चुका है। मगर, अब तक वैक्सीन नहीं मिली। कॉरपोरेशन से इसी सप्ताह वैक्सीन का मिलना बताया गया है।
-विनय कुमार, प्रभारी फार्मासिस्ट जनपदीय वेयर हाउस