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Lakhimpur Kheri News: हाईवे पर धुंध बढ़ने से पहले ही धुंधले सुरक्षा के इंतजाम
Mon, 26 Oct 2026 11:48 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Mon, 26 Oct 2026 11:48 PM IST
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बेलराया-तिकुनिया मार्ग पर नरहा पुल के पास अंधे मोड़ पर नहीं कोई संकेतक। संवाद
लखीमपुर खीरी। हाईवे पर धुंध बढ़ने से पहले ही सड़क सुरक्षा के इंतजाम धुंधले नजर आ रहे हैं। कहीं अंधे मोड़ों पर झाड़ियां वाहन चालकों की नजर रोक रही हैं तो कहीं संकेतक नदारद हैं।
कई जगह सड़क की सफेद पट्टियां मिट चुकी हैं और गड्ढे हादसों का खतरा बढ़ा रहे हैं। ऐसे में गन्ना सीजन में भारी वाहनों की आवाजाही और कोहरे के दौरान दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ सकती है।
सोमवार को जिले में कराई गई पड़ताल में कई स्थानों पर सुरक्षा इंतजामों की कमी सामने आई। लखीमपुर-पलिया हाईवे पर बिजुआ के पास अंधे मोड़ पर झाड़ियां उगी मिलीं। बेलरायां-तिकुनिया मार्ग पर नरहापुल के पास अंधे मोड़ पर झाड़ियों के बीच संकेतक नदारद हैं, जबकि यहां आए दिन हादसे होते हैं।
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मोहम्मदी-लखीमपुर मार्ग पर अमीरनगर के कुंभी चौराहे के पास सड़क टूटी है और सफेद पट्टियां मिट चुकी हैं। इसी सप्ताह कुंभी चीनी मिल शुरू होने वाली है। ऐसे में गन्ना ढुलाई के लिए वाहनों की आवाजाही बढ़ने पर यह स्थिति परेशानी बढ़ा सकती है। बरवर-मोहम्मदी मार्ग पर विराट ऑटो पार्ट्स के पास अंधे मोड़ के दोनों ओर झाड़ियां हैं और सड़क भी टूटी है। मोहम्मदी-पुवायां हाईवे पर बौआ से पुवायां जाने वाले मार्ग पर भी झाड़ियां हैं।
पीलीभीत-नेशनल हाईवे-730 पर एक साल में ही सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे हो गए हैं। इनकी वजह से आए दिन हादसे होते हैं। क्षेत्र के ग्रामीण गड्ढे भरवाने के लिए डीएम को प्रार्थना-पत्र दे चुके हैं। 20 दिन पहले एनएच के एई प्रशांत सिंह ने जल्द गड्ढे भरवाने का दावा किया था, लेकिन अब तक काम होता नजर नहीं आया।
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तीन लोगों की मौत के बाद भी नहीं जागे जिम्मेदार
भीरा। भीरा-पलिया मार्ग पर रपटा पुल और मरहिया पुल के बीच एक सप्ताह पहले दो मेडिकल छात्राओं समेत तीन लोगों की मौत हो चुकी है। हादसे की वजह अंधे मोड़ पर संकेतक न होना और बड़ी-बड़ी झाड़ियां उगी होना बताया गया था। इसके बावजूद यहां सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए गए हैं। गन्ना सीजन शुरू होने वाला है और कोहरे के दौरान दृश्यता कम होने से इस मार्ग पर जोखिम और बढ़ सकता है।
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दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र जलालपुर मोड़ का भी यही हाल
गोला गोकर्णनाथ। नेशनल हाईवे-730 पर गोला-लखीमपुर के बीच जलालपुर मोड़ पर आए दिन हादसे होते हैं। जनवरी, 2026 में यहां कार दुर्घटना में चार लोगों की जान जा चुकी है। इसे दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र भी माना जाता है। यहां सड़क पर सफेद पट्टियां तो हैं, लेकिन मोड़ पर संकेतक स्पष्ट नहीं है।
गोला थाना क्षेत्र के करनपुर में खजुहा मोड़ पर भी आए दिन हादसे होते हैं। पिछले माह इस तिराहे पर चार दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें करनपुर निवासी एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। प्रशासन ने इस स्थान को भी दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र मानते हुए बोर्ड लगाया है। संवाद
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गन्ना सीजन शुरू होने और कोहरा पड़ने से पहले हादसों की रोकथाम के लिए तैयारी शुरू कर दी गई है। सड़क निर्माण, संकेतक और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखेंगे, ताकि समय रहते काम हो सके। निगरानी के लिए संबंधित एसडीएम को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
-ब्रजेश कुमार त्रिपाठी, एडीएम प्रशासन
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कई जगह सड़क की सफेद पट्टियां मिट चुकी हैं और गड्ढे हादसों का खतरा बढ़ा रहे हैं। ऐसे में गन्ना सीजन में भारी वाहनों की आवाजाही और कोहरे के दौरान दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ सकती है।
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सोमवार को जिले में कराई गई पड़ताल में कई स्थानों पर सुरक्षा इंतजामों की कमी सामने आई। लखीमपुर-पलिया हाईवे पर बिजुआ के पास अंधे मोड़ पर झाड़ियां उगी मिलीं। बेलरायां-तिकुनिया मार्ग पर नरहापुल के पास अंधे मोड़ पर झाड़ियों के बीच संकेतक नदारद हैं, जबकि यहां आए दिन हादसे होते हैं।
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मोहम्मदी-लखीमपुर मार्ग पर अमीरनगर के कुंभी चौराहे के पास सड़क टूटी है और सफेद पट्टियां मिट चुकी हैं। इसी सप्ताह कुंभी चीनी मिल शुरू होने वाली है। ऐसे में गन्ना ढुलाई के लिए वाहनों की आवाजाही बढ़ने पर यह स्थिति परेशानी बढ़ा सकती है। बरवर-मोहम्मदी मार्ग पर विराट ऑटो पार्ट्स के पास अंधे मोड़ के दोनों ओर झाड़ियां हैं और सड़क भी टूटी है। मोहम्मदी-पुवायां हाईवे पर बौआ से पुवायां जाने वाले मार्ग पर भी झाड़ियां हैं।
पीलीभीत-नेशनल हाईवे-730 पर एक साल में ही सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे हो गए हैं। इनकी वजह से आए दिन हादसे होते हैं। क्षेत्र के ग्रामीण गड्ढे भरवाने के लिए डीएम को प्रार्थना-पत्र दे चुके हैं। 20 दिन पहले एनएच के एई प्रशांत सिंह ने जल्द गड्ढे भरवाने का दावा किया था, लेकिन अब तक काम होता नजर नहीं आया।
तीन लोगों की मौत के बाद भी नहीं जागे जिम्मेदार
भीरा। भीरा-पलिया मार्ग पर रपटा पुल और मरहिया पुल के बीच एक सप्ताह पहले दो मेडिकल छात्राओं समेत तीन लोगों की मौत हो चुकी है। हादसे की वजह अंधे मोड़ पर संकेतक न होना और बड़ी-बड़ी झाड़ियां उगी होना बताया गया था। इसके बावजूद यहां सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए गए हैं। गन्ना सीजन शुरू होने वाला है और कोहरे के दौरान दृश्यता कम होने से इस मार्ग पर जोखिम और बढ़ सकता है।
दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र जलालपुर मोड़ का भी यही हाल
गोला गोकर्णनाथ। नेशनल हाईवे-730 पर गोला-लखीमपुर के बीच जलालपुर मोड़ पर आए दिन हादसे होते हैं। जनवरी, 2026 में यहां कार दुर्घटना में चार लोगों की जान जा चुकी है। इसे दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र भी माना जाता है। यहां सड़क पर सफेद पट्टियां तो हैं, लेकिन मोड़ पर संकेतक स्पष्ट नहीं है।
गोला थाना क्षेत्र के करनपुर में खजुहा मोड़ पर भी आए दिन हादसे होते हैं। पिछले माह इस तिराहे पर चार दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें करनपुर निवासी एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। प्रशासन ने इस स्थान को भी दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र मानते हुए बोर्ड लगाया है। संवाद
गन्ना सीजन शुरू होने और कोहरा पड़ने से पहले हादसों की रोकथाम के लिए तैयारी शुरू कर दी गई है। सड़क निर्माण, संकेतक और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखेंगे, ताकि समय रहते काम हो सके। निगरानी के लिए संबंधित एसडीएम को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
-ब्रजेश कुमार त्रिपाठी, एडीएम प्रशासन

बेलराया-तिकुनिया मार्ग पर नरहा पुल के पास अंधे मोड़ पर नहीं कोई संकेतक। संवाद

बेलराया-तिकुनिया मार्ग पर नरहा पुल के पास अंधे मोड़ पर नहीं कोई संकेतक। संवाद

बेलराया-तिकुनिया मार्ग पर नरहा पुल के पास अंधे मोड़ पर नहीं कोई संकेतक। संवाद