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ठंड बढ़ी तो निमोनिया और डायरिया ने कसा शिकंजा
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Sun, 29 Jan 2017 10:41 PM IST
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ठंड
- फोटो : अमर उजाला
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जिला अस्पताल के सभी वार्डों में मरीजों की संख्या बढ़ी, अव्यवस्थाएं हावी
चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती हुए छह बच्चे
दो दिन धूप, फिर ठंड के कहर से जिले में निमोनिया और डायरिया के मरीज बढ़ गए हैं। जिला अस्पताल में ही निमोनिया एवं कोल्ड डायरिया से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती बच्चों की संख्या जहां छह हो गई है, वहीं मेडिकल महिला और पुरुष वार्ड में भर्ती मरीजों की संख्या बढ़कर 36 हो गई है। जिला अस्पताल में अलाव का भी इंतजाम नहीं है, जिससे तीमारदार गलन भरी सर्दी में अस्पताल में रहने को मजबूर हैं।
सर्दी का प्रकोप बढ़ गया है, चल रहीं सर्द हवाओं ने लोगों का जीना दुश्वार कर दिया है। इस गलन भरी सर्दी से सबसे ज्यादा बच्चे और बुजुर्ग प्रभावित हो रहे हैं। जरा सी लापरवाही बच्चों और बुजुर्गों पर भारी पड़ रही है, जिससे बच्चे और बुजुर्ग निमोनिया और कोल्ड डायरिया की चपेट में आने लगे हैं, जिसके चलते रविवार को चिल्ड्रेन वार्ड में पांच वर्षीय नीरज, तीन वर्षीय सुमित, दो वर्षीय अंकित, पांच वर्षीय शमा बानो को भर्ती किया गया है। वहीं मेडिकल पुरुष वार्ड में भी मौसम की चपेट में आने से भर्ती लोगों की संख्या 19 और महिला वार्ड में भर्ती लोगों की संख्या 17 पहुंच गई है।
बुजुर्गों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, इसलिए यह सभी सर्दी की चपेट में जल्दी आते हैं। बुजुर्गों को सर्दी से बचाना चाहिए और बाहर निकलते वक्त सर और कानों को ढककर निकलना चाहिए।
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- डॉ. राजकुमार फिजीशियन, जिला अस्पताल
जिला अस्पताल में निमोनिया-डायरिया के मरीज आ रहे हैं, जिन्हें समुचित इलाज मिल रहा है। कुछ अव्यवस्थाएं हो सकती हैं। शिकायत मिलने पर अव्यवस्था को दूर किया जाता है।
- डॉ जावेद अहमद, सीएमओ।
निमोनिया होने पर रखे सावधानी
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.आर के वर्मा का कहना है कि निमोनिया वायरस, बैक्टीरिया और एलर्जी से भी होता है। निमोनिया होने पर खांसी बुखार पसलियों का तेज चलने के लक्षण दिखाई देते हैं। इसके अलावा कुछ बच्चों को नाक बहना और सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। उन्होंने बताया कि ऐसे में छोटे बच्चों का खास ख्याल रखना चाहिए। सांस फूलने की वजह से बच्चों को दूध पिलाते वक्त सावधानी रखें और दूध पिलाने के बाद कंधे से लगाकर पीठ पर थपकी देनी चाहिए। बुखार आने, पसलियों के चलने की दशा में फौरन डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
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चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती हुए छह बच्चे
दो दिन धूप, फिर ठंड के कहर से जिले में निमोनिया और डायरिया के मरीज बढ़ गए हैं। जिला अस्पताल में ही निमोनिया एवं कोल्ड डायरिया से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती बच्चों की संख्या जहां छह हो गई है, वहीं मेडिकल महिला और पुरुष वार्ड में भर्ती मरीजों की संख्या बढ़कर 36 हो गई है। जिला अस्पताल में अलाव का भी इंतजाम नहीं है, जिससे तीमारदार गलन भरी सर्दी में अस्पताल में रहने को मजबूर हैं।
सर्दी का प्रकोप बढ़ गया है, चल रहीं सर्द हवाओं ने लोगों का जीना दुश्वार कर दिया है। इस गलन भरी सर्दी से सबसे ज्यादा बच्चे और बुजुर्ग प्रभावित हो रहे हैं। जरा सी लापरवाही बच्चों और बुजुर्गों पर भारी पड़ रही है, जिससे बच्चे और बुजुर्ग निमोनिया और कोल्ड डायरिया की चपेट में आने लगे हैं, जिसके चलते रविवार को चिल्ड्रेन वार्ड में पांच वर्षीय नीरज, तीन वर्षीय सुमित, दो वर्षीय अंकित, पांच वर्षीय शमा बानो को भर्ती किया गया है। वहीं मेडिकल पुरुष वार्ड में भी मौसम की चपेट में आने से भर्ती लोगों की संख्या 19 और महिला वार्ड में भर्ती लोगों की संख्या 17 पहुंच गई है।
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बुजुर्गों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, इसलिए यह सभी सर्दी की चपेट में जल्दी आते हैं। बुजुर्गों को सर्दी से बचाना चाहिए और बाहर निकलते वक्त सर और कानों को ढककर निकलना चाहिए।
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- डॉ. राजकुमार फिजीशियन, जिला अस्पताल
जिला अस्पताल में निमोनिया-डायरिया के मरीज आ रहे हैं, जिन्हें समुचित इलाज मिल रहा है। कुछ अव्यवस्थाएं हो सकती हैं। शिकायत मिलने पर अव्यवस्था को दूर किया जाता है।
- डॉ जावेद अहमद, सीएमओ।
निमोनिया होने पर रखे सावधानी
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.आर के वर्मा का कहना है कि निमोनिया वायरस, बैक्टीरिया और एलर्जी से भी होता है। निमोनिया होने पर खांसी बुखार पसलियों का तेज चलने के लक्षण दिखाई देते हैं। इसके अलावा कुछ बच्चों को नाक बहना और सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। उन्होंने बताया कि ऐसे में छोटे बच्चों का खास ख्याल रखना चाहिए। सांस फूलने की वजह से बच्चों को दूध पिलाते वक्त सावधानी रखें और दूध पिलाने के बाद कंधे से लगाकर पीठ पर थपकी देनी चाहिए। बुखार आने, पसलियों के चलने की दशा में फौरन डॉक्टर को दिखाना चाहिए।