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ग्राम पंचायतों में इजाफा पर सचिवों का टोटा
लखीमपुर खीरी।
Updated Sun, 08 Mar 2015 06:50 PM IST
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जनपद में आबादी के लिहाज से ग्राम पंचायतों की संख्या 995 से बढ़कर 1167 हो गई हैं, लेकिन योजनाओं के क्रियान्वयन में अहम भूमिका अदा करने वाले सचिवोें (ग्राम पंचायत अधिकारी) की नियुक्ति नहीं हो पा रहीं हैं। हर साल रिटायरमेंट के साथ ही इनकी संख्या में तेजी से कमी आ रही है, जिससे मौजूदा समय में संख्या घटकर आधे से भी कम रह गई है। इससे गांवों में विकास की रफ्तार तेज नहीं हो पा रही है, क्योंकि एक सचिव के जिम्मे करीब दर्जन भर ग्र्राम पंचायतें हैं।
बता दें कि ग्राम पंचायतों में विभिन्न योजनाओं को लागू कराने और उसके क्रियान्वयन में ग्राम पंचायत अधिकारियों (सचिवों) की अहम भूमिका रहती है। पंचायती राज व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिहाज से भी इनके कंधों पर अहम जिम्मेदारी है। जनपद में कुल 156 न्याय पंचायतें हैं, जिनके आधार पर इनकी नियुक्ति के पद स्वीकृत हैं। विभागीय जानकार बताते हैं कि 1971 में न्याय पंचायतवार 156 सचिवों की नियुक्ति की गई थी, जिसके बाद इनकी संख्या कम होती गई। मौजूदा समय में 156 पदों के सापेक्ष 68 सचिव ही कार्यरत हैं, जो आधे से भी कम हैं। इसी तरह ग्राम्य विकास की योजनाओं का क्रियान्वयन कराने के लिए ग्राम विकास अधिकारियों की तैनाती की गई थी। इनके भी 155 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनकी संख्या घटकर 86 रह गई है। हालांकि पिछले एक दशक में दो बार भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन किन्ही कारणों के चलते इसे अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है।
सचिवों की कमी से निपटने को बनाया फार्मूला
शासन ने ग्राम पंचायतों में सचिवों की कमी से निपटने के लिए फार्मूला बनाते हुए दोनों संवर्गों को समान जिम्मेदारी दे दी है। दोनों संवर्गों में अलग-अलग उत्तरदायित्व थे, लेेकिन एक शासनादेश के जरिए ग्राम विकास अधिकारियों को भी ग्राम पंचायत अधिकारियों की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। लिहाजा कुुछ हद तक स्टाफ की कमी से राहत मिली है, लेकिन फिर भी कई तरह की दिक्कतें अभी भी बनी हुई हैं।
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सचिवों की कमी से ग्राम पंचायतों में कामकाज प्रभावित हो रहे हैं। इसी के मद्देनजर शासन ने पंचायत सहायकों की नियुक्ति करने की निर्णय लिया है। इस संबंध में शासनादेश प्राप्त हो चुका है। जल्द ही आउटसोर्सिंग के माध्यम से पंचायत सहायकों की भर्ती की जाएगी, जिसके बाद विकास कार्यों में तेजी आएगी।
-योगेंद्र कटियार, जिला पंचायत राज अधिकारी
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बता दें कि ग्राम पंचायतों में विभिन्न योजनाओं को लागू कराने और उसके क्रियान्वयन में ग्राम पंचायत अधिकारियों (सचिवों) की अहम भूमिका रहती है। पंचायती राज व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिहाज से भी इनके कंधों पर अहम जिम्मेदारी है। जनपद में कुल 156 न्याय पंचायतें हैं, जिनके आधार पर इनकी नियुक्ति के पद स्वीकृत हैं। विभागीय जानकार बताते हैं कि 1971 में न्याय पंचायतवार 156 सचिवों की नियुक्ति की गई थी, जिसके बाद इनकी संख्या कम होती गई। मौजूदा समय में 156 पदों के सापेक्ष 68 सचिव ही कार्यरत हैं, जो आधे से भी कम हैं। इसी तरह ग्राम्य विकास की योजनाओं का क्रियान्वयन कराने के लिए ग्राम विकास अधिकारियों की तैनाती की गई थी। इनके भी 155 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनकी संख्या घटकर 86 रह गई है। हालांकि पिछले एक दशक में दो बार भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन किन्ही कारणों के चलते इसे अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है।
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सचिवों की कमी से निपटने को बनाया फार्मूला
शासन ने ग्राम पंचायतों में सचिवों की कमी से निपटने के लिए फार्मूला बनाते हुए दोनों संवर्गों को समान जिम्मेदारी दे दी है। दोनों संवर्गों में अलग-अलग उत्तरदायित्व थे, लेेकिन एक शासनादेश के जरिए ग्राम विकास अधिकारियों को भी ग्राम पंचायत अधिकारियों की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। लिहाजा कुुछ हद तक स्टाफ की कमी से राहत मिली है, लेकिन फिर भी कई तरह की दिक्कतें अभी भी बनी हुई हैं।
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सचिवों की कमी से ग्राम पंचायतों में कामकाज प्रभावित हो रहे हैं। इसी के मद्देनजर शासन ने पंचायत सहायकों की नियुक्ति करने की निर्णय लिया है। इस संबंध में शासनादेश प्राप्त हो चुका है। जल्द ही आउटसोर्सिंग के माध्यम से पंचायत सहायकों की भर्ती की जाएगी, जिसके बाद विकास कार्यों में तेजी आएगी।
-योगेंद्र कटियार, जिला पंचायत राज अधिकारी