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Lakhimpur Kheri News: पहले दिन सरकारी केंद्र रहे सन्नाटे में, आढ़तियों के फड़ रहे गुलजार
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राजापुर मंंडी में लगे सरकारी धान खरीद केद्रों पर पसरा सन्नाटा
लखीमपुर खीरी। एक अक्तूबर से तय धान खरीद मंगलवार को शुरू तो हुई, लेकिन पहले दिन सभी सरकारी केंद्रों पर सन्नाटा पसरा रहा, जबकि आढ़तों पर किसानों की भीड़ लगी रही। यहां बता दें कि इस बार पांच एजेंसियों- पीसीयू, पीसीएफ, यूपीएसएस, एफसीआई और आरएफसी के कुल 169 केंद्रों पर धान खरीद होनी है।
दो दिन की देरी से खरीद शुरू होने के बावजूद पहले दिन सरकारी केंद्रों पर सन्नाटा पसरा दिखाई दिया। दूरदराज गांव व पड़ोसी जिले बहराइच से किसान नवीन गल्ला मंडी तो पहुंचे लेकिन, सरकारी केंद्रों की जगह आढ़तों पर धान बेचते नजर आए। किसानों का कहना है कि सरकारी मशीनरी में फसल बेचना काफी टेढ़ी खीर है। ऐसे में प्राइवेट आढ़त पर तुुरंत नकद रुपयों के साथ किसी तरह का कोई इंतजार नहीं करना पड़ता है।
22 से 23 प्रतिशत नमी, आढ़तियों के यहां 1900 की अधिकतम बोली लगी
मंगलवार को नवीन गल्ला मंडी लखीमपुर में आढ़तियों के यहां अधिकतम 1900 रुपये की बोली लगी। नमी 22 से 23 प्रतिशत तक निकली, जबकि सरकारी केंद्र पर ए ग्रेड का समर्थन मूल्य 2203 रुपये है। 17 प्रतिशत तक यहां नमी काटी जाती है। मंडी सचिव सुधांशु कुमार ने बताया कि मंगलवार को आढ़तियों के यहां करीब 2000 क्विंटल धान खरीद हुई है।
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रकेहटी के किसान अर्जुन अपनी फसल लेकर आढ़तिए के पास पहुंचे जहां पर धान तुलवाने के बाद नगद पैसे भी प्राप्त किए। अर्जुन ने बताया कि अगली फसल बोनी है, इसके लिए पैसों की जरूरत होगी। आढ़त पर फसल बेचने के पीछे अर्जुन ने बताया कि सरकारी केंद्रों पर काफी तामझाम करना पड़ता है इसलिए यहां धान बेच दिया है। - अर्जुन, रकेहटी
केंद्रों पर फसल बेचने के लिए काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। धान बेचने के लिए किसान को पहले रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ता है, वहीं धान की कई जगह पर जांच पड़ताल की जाती है। ऐसे में कभी-कभी धान में कोई कमी होने के चलते सरकारी केंद्रों पर खरीदा भी नहीं जाता है, जिससे किसान को काफी दिक्कत होती है। - रामजीवन वर्मा, सरखनपुर
शासन ने धान खरीद में पारदर्शिता तो बरती, लेकिन तमाम नियम भी बना दिए, जिससे किसानों को परेशानी होती है। हम भी अपनी फसल लेकर आए थे, लेकिन आढ़त पर बेचना ही सही समझा। यहां पर बिना किसी जांच के फसल खरीद ली गई। इतना ही नहीं भुगतान भी तुरंत ही मिल गया। - पप्पू, किसान
रजिस्ट्रेशन करवाने के बाद किसान की फसल जांची जाती है। जरा सी नमी या कोई और दिक्कत होने पर फसल को लौटा दिया जाता है। ऐसे में किसान मजबूरी में अपनी फसल को औने पौने दामाें में बेचने को मजबूर हो जाता है। सरकारी केंद्र पर खरीद हो जाने के बाद भुगतान के लिए काफी इंतजाम करना पड़ता है। - शेषनाग, मिहीपुरवा (बहराइच)
मोहम्मदी में 23 केंद्र खुलने थे, अब तक नहीं लगे पोस्टर तक
मोहम्मदी। धान खरीद को लेकर भले ही जिला प्रशासन सख्त दिखाई दे रहा हो, लेकिन मोहम्मदी के अधिकारी इस कार्य में दिलचस्पी लेते हुए नहीं दिखाई दे रहे हैं। हाल यह है कि धान खरीद शुरू हुए तीन दिन हो गए हैं, लेकिन मंडी समिति में एक भी क्रय केेंद्र नहीं बनाया जा सका है।
क्रय केंद्र न होने की वजह से किसान अपनी फसल को औने-पौने दामाें में बेचने को विवश हैं। बता दें कि इस बार मोहम्मदी में 23 केंद्र बनाए जाने थे, लेकिन अब तक एक भी क्रय केंद्र पर बैनर पोस्टर तक नहीं लगा है। मौजूदा समय में धान की कटाई जोर-शोर से की जा रही है। मोहम्मदी का किसान शाहजहांपुर और पुवायां मंडी में अपनी फसल बेच रहा है। विपणन अधिकारी भूपेंद्र सिंह ने बताया कि तहसील क्षेत्र में 23 सेंटर लगे हैं। कई जगहों पर बारिश होने पर धान कटाई प्रभावित हुई है। मशीनों में कुछ दिक्कत थी। सेंटर प्रभारी उनको सही करा रहे थे। संवाद
पलिया क्षेत्र में भी नहीं खुल सका खाता
पलियाकलां। पलिया मंडी समिति व क्षेत्र में कुल 12 धान खरीद केंद्र व एक मक्का खरीद केंद्र बनाया गया है। खाद्य विभाग का ही मक्का क्रय केंद्र भी है। पहले दिन खरीद शून्य रही। आढ़तियों के यहां पांच क्विंटल खरीद हुई। मार्केटिंग इंस्पेक्टर आदित्य सिंह ने बताया कि सरकारी क्रय केंद्रों पर 17 प्रतिशत से कम नमी वाला धान लेने का ही मानक है। संवाद
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दो दिन की देरी से खरीद शुरू होने के बावजूद पहले दिन सरकारी केंद्रों पर सन्नाटा पसरा दिखाई दिया। दूरदराज गांव व पड़ोसी जिले बहराइच से किसान नवीन गल्ला मंडी तो पहुंचे लेकिन, सरकारी केंद्रों की जगह आढ़तों पर धान बेचते नजर आए। किसानों का कहना है कि सरकारी मशीनरी में फसल बेचना काफी टेढ़ी खीर है। ऐसे में प्राइवेट आढ़त पर तुुरंत नकद रुपयों के साथ किसी तरह का कोई इंतजार नहीं करना पड़ता है।
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22 से 23 प्रतिशत नमी, आढ़तियों के यहां 1900 की अधिकतम बोली लगी
मंगलवार को नवीन गल्ला मंडी लखीमपुर में आढ़तियों के यहां अधिकतम 1900 रुपये की बोली लगी। नमी 22 से 23 प्रतिशत तक निकली, जबकि सरकारी केंद्र पर ए ग्रेड का समर्थन मूल्य 2203 रुपये है। 17 प्रतिशत तक यहां नमी काटी जाती है। मंडी सचिव सुधांशु कुमार ने बताया कि मंगलवार को आढ़तियों के यहां करीब 2000 क्विंटल धान खरीद हुई है।
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रकेहटी के किसान अर्जुन अपनी फसल लेकर आढ़तिए के पास पहुंचे जहां पर धान तुलवाने के बाद नगद पैसे भी प्राप्त किए। अर्जुन ने बताया कि अगली फसल बोनी है, इसके लिए पैसों की जरूरत होगी। आढ़त पर फसल बेचने के पीछे अर्जुन ने बताया कि सरकारी केंद्रों पर काफी तामझाम करना पड़ता है इसलिए यहां धान बेच दिया है। - अर्जुन, रकेहटी
केंद्रों पर फसल बेचने के लिए काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। धान बेचने के लिए किसान को पहले रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ता है, वहीं धान की कई जगह पर जांच पड़ताल की जाती है। ऐसे में कभी-कभी धान में कोई कमी होने के चलते सरकारी केंद्रों पर खरीदा भी नहीं जाता है, जिससे किसान को काफी दिक्कत होती है। - रामजीवन वर्मा, सरखनपुर
शासन ने धान खरीद में पारदर्शिता तो बरती, लेकिन तमाम नियम भी बना दिए, जिससे किसानों को परेशानी होती है। हम भी अपनी फसल लेकर आए थे, लेकिन आढ़त पर बेचना ही सही समझा। यहां पर बिना किसी जांच के फसल खरीद ली गई। इतना ही नहीं भुगतान भी तुरंत ही मिल गया। - पप्पू, किसान
रजिस्ट्रेशन करवाने के बाद किसान की फसल जांची जाती है। जरा सी नमी या कोई और दिक्कत होने पर फसल को लौटा दिया जाता है। ऐसे में किसान मजबूरी में अपनी फसल को औने पौने दामाें में बेचने को मजबूर हो जाता है। सरकारी केंद्र पर खरीद हो जाने के बाद भुगतान के लिए काफी इंतजाम करना पड़ता है। - शेषनाग, मिहीपुरवा (बहराइच)
मोहम्मदी में 23 केंद्र खुलने थे, अब तक नहीं लगे पोस्टर तक
मोहम्मदी। धान खरीद को लेकर भले ही जिला प्रशासन सख्त दिखाई दे रहा हो, लेकिन मोहम्मदी के अधिकारी इस कार्य में दिलचस्पी लेते हुए नहीं दिखाई दे रहे हैं। हाल यह है कि धान खरीद शुरू हुए तीन दिन हो गए हैं, लेकिन मंडी समिति में एक भी क्रय केेंद्र नहीं बनाया जा सका है।
क्रय केंद्र न होने की वजह से किसान अपनी फसल को औने-पौने दामाें में बेचने को विवश हैं। बता दें कि इस बार मोहम्मदी में 23 केंद्र बनाए जाने थे, लेकिन अब तक एक भी क्रय केंद्र पर बैनर पोस्टर तक नहीं लगा है। मौजूदा समय में धान की कटाई जोर-शोर से की जा रही है। मोहम्मदी का किसान शाहजहांपुर और पुवायां मंडी में अपनी फसल बेच रहा है। विपणन अधिकारी भूपेंद्र सिंह ने बताया कि तहसील क्षेत्र में 23 सेंटर लगे हैं। कई जगहों पर बारिश होने पर धान कटाई प्रभावित हुई है। मशीनों में कुछ दिक्कत थी। सेंटर प्रभारी उनको सही करा रहे थे। संवाद
पलिया क्षेत्र में भी नहीं खुल सका खाता
पलियाकलां। पलिया मंडी समिति व क्षेत्र में कुल 12 धान खरीद केंद्र व एक मक्का खरीद केंद्र बनाया गया है। खाद्य विभाग का ही मक्का क्रय केंद्र भी है। पहले दिन खरीद शून्य रही। आढ़तियों के यहां पांच क्विंटल खरीद हुई। मार्केटिंग इंस्पेक्टर आदित्य सिंह ने बताया कि सरकारी क्रय केंद्रों पर 17 प्रतिशत से कम नमी वाला धान लेने का ही मानक है। संवाद

राजापुर मंंडी में लगे सरकारी धान खरीद केद्रों पर पसरा सन्नाटा

राजापुर मंंडी में लगे सरकारी धान खरीद केद्रों पर पसरा सन्नाटा