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Lakhimpur Kheri News: आबादी बढ़ती गई, पर राशन कार्ड का लक्ष्य पुराना...लाखों लोग योजना से वंचित
Sun, 16 Nov 2025 11:17 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sun, 16 Nov 2025 11:17 PM IST
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हंसराम
लखीमपुर खीरी। जनपद की आबादी के साथ राशन कार्ड का लक्ष्य वर्षों बाद भी नहीं बढ़ा। इस विसंगति के कारण नए परिवारों को सस्ता राशन नसीब नहीं हो पा रहा। इससे लाखों लोग सरकारी योजना से वंचित हैं।
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, जिले की आबादी 40,21,243 थी। इसके अनुसार, शहरी क्षेत्र में 64.43 व ग्रामीण क्षेत्र में 79.56 प्रतिशत लोगों के 8,40,836 राशन कार्ड बनाए गए, जिसमें 30,80,134 यूनिटें जुड़ी हैं। पिछले 14 सालों में जिले की अनुमानित आबादी 8.28 प्रतिशत बढ़कर 48,43,253 लाख तक पहुंच गई। यानी साढ़े आठ लाख जनसंख्या बढ़ी है, लेकिन लक्ष्य एक प्रतिशत भी नहीं बढ़ा। ऐसे में लाखों लोग योजना से वंचित हैं।
कई लोग तो दो साल से राशन कार्ड बनवाने का प्रयास कर रहे हैं। सैकड़ों ऐसे भी परिवार हैं, जो दौड़ लगाते-लगाते इतना परेशान हो गए कि अब उन्होंने प्रयास करना तक बंद कर दिया। उन्हें मुफ्त या सब्सिडी वाले राशन से वंचित रहकर महंगे दामों पर अनाज खरीदना पड़ रहा है।
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हर माह इतना मिलता है राशन
-अन्त्योदय कार्डधारक को प्रति कार्ड 35 किलो राशन में 20 किलो चावल व 15 किलो गेहूं निशुल्क मिलता है। कभी-कभी सस्ते दामों पर 18 रुपये प्रति किलो चीनी दी जाती है। पात्र गृहस्थी उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट पांच किलो राशन दिया जाता है, जिसमें तीन किलो चावल व दो किलो गेहूं है।
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मजदूरी से परिवार का पालन-पोषण करते हैं। राशन कार्ड के लिए दो साल से मितौली तहसील के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन राशन कार्ड बनने का रास्ता साफ नहीं हो पा रहा है।
-हंसराम, मैगलगंज
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दोनों पैरों से दिव्यांग हूं। पांच बार ऑनलाइन आवेदन करवा चुका हूं, लेकिन अब तक राशन कार्ड नहीं बन पाया। अधिकारी बोलते हैं कि ऑनलाइन वाले कागज अभी उनके पास नहीं पहुंचे।
-रामशंकर, इटारा, मैगलगंज
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फैक्ट फाइल
-वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार आबादी- 40.21 लाख
-वर्ष 2025 तक जिले की अनुमानित आबादी- 48.53 लाख
-जनपद में राशन कार्ड की संख्या- 8,40,836
-अन्त्योदय राशनकार्ड की संख्या- 1,09,618
-पात्र गृहस्थी राशन कार्ड की संख्या- 7,31,218
-जनपद में सरकारी राशन की दुकानें- 1,479
-जनपद में राशन पाने वाले यूनिट- 30,80,134
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शासन से अभी लक्ष्य नहीं बढ़ा है। अगर लक्ष्य बढ़ता है तो हर जरूरतमंद के कार्ड बना दिए जाएंगे। दो माह में 4663 अपात्रों का हटाकर पात्रों के कार्ड बनाए गए हैं।
-अंजनी कुमार, जिला पूर्ति अधिकारी
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वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, जिले की आबादी 40,21,243 थी। इसके अनुसार, शहरी क्षेत्र में 64.43 व ग्रामीण क्षेत्र में 79.56 प्रतिशत लोगों के 8,40,836 राशन कार्ड बनाए गए, जिसमें 30,80,134 यूनिटें जुड़ी हैं। पिछले 14 सालों में जिले की अनुमानित आबादी 8.28 प्रतिशत बढ़कर 48,43,253 लाख तक पहुंच गई। यानी साढ़े आठ लाख जनसंख्या बढ़ी है, लेकिन लक्ष्य एक प्रतिशत भी नहीं बढ़ा। ऐसे में लाखों लोग योजना से वंचित हैं।
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कई लोग तो दो साल से राशन कार्ड बनवाने का प्रयास कर रहे हैं। सैकड़ों ऐसे भी परिवार हैं, जो दौड़ लगाते-लगाते इतना परेशान हो गए कि अब उन्होंने प्रयास करना तक बंद कर दिया। उन्हें मुफ्त या सब्सिडी वाले राशन से वंचित रहकर महंगे दामों पर अनाज खरीदना पड़ रहा है।
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हर माह इतना मिलता है राशन
-अन्त्योदय कार्डधारक को प्रति कार्ड 35 किलो राशन में 20 किलो चावल व 15 किलो गेहूं निशुल्क मिलता है। कभी-कभी सस्ते दामों पर 18 रुपये प्रति किलो चीनी दी जाती है। पात्र गृहस्थी उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट पांच किलो राशन दिया जाता है, जिसमें तीन किलो चावल व दो किलो गेहूं है।
मजदूरी से परिवार का पालन-पोषण करते हैं। राशन कार्ड के लिए दो साल से मितौली तहसील के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन राशन कार्ड बनने का रास्ता साफ नहीं हो पा रहा है।
-हंसराम, मैगलगंज
दोनों पैरों से दिव्यांग हूं। पांच बार ऑनलाइन आवेदन करवा चुका हूं, लेकिन अब तक राशन कार्ड नहीं बन पाया। अधिकारी बोलते हैं कि ऑनलाइन वाले कागज अभी उनके पास नहीं पहुंचे।
-रामशंकर, इटारा, मैगलगंज
फैक्ट फाइल
-वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार आबादी- 40.21 लाख
-वर्ष 2025 तक जिले की अनुमानित आबादी- 48.53 लाख
-जनपद में राशन कार्ड की संख्या- 8,40,836
-अन्त्योदय राशनकार्ड की संख्या- 1,09,618
-पात्र गृहस्थी राशन कार्ड की संख्या- 7,31,218
-जनपद में सरकारी राशन की दुकानें- 1,479
-जनपद में राशन पाने वाले यूनिट- 30,80,134
शासन से अभी लक्ष्य नहीं बढ़ा है। अगर लक्ष्य बढ़ता है तो हर जरूरतमंद के कार्ड बना दिए जाएंगे। दो माह में 4663 अपात्रों का हटाकर पात्रों के कार्ड बनाए गए हैं।
-अंजनी कुमार, जिला पूर्ति अधिकारी

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