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Lakhimpur Kheri News: गोला के शिक्षक के सीवेज ट्रीटमेंट डिवाइस को ब्रिटेन में मिला पेटेंट
Sat, 09 May 2026 12:28 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 09 May 2026 12:28 AM IST
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डॉ. अनिल कुमार।
गोला गोकर्णनाथ। कृषक समाज इंटर कॉलेज के जीव विज्ञान प्रवक्ता और सह नोडल इंस्पायर अवार्ड मानक डॉ. अनिल कुमार की ओर से विकसित पोर्टेबल हाइड्रो बायोलॉजिकल डोमेस्टिक सीवेज ट्रीटमेंट डिवाइस को यूके (ब्रिटेन) सरकार ने पेटेंट प्रदान किया है। इसे कॉलेज और क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि उनके द्वारा विकसित यह डिवाइस सीवेज वॉटर को उपचारित करने में सक्षम है। इसमें एक्वाटिक ऑर्गनिज्म की मदद से हाइड्रो बायोलॉजिकल प्रक्रिया द्वारा पानी से कार्बनिक कचरे को अलग किया जाता है।
उन्होंने बताया कि घरों से निकलने वाला साबुन, तेल, गंदगी और बैक्टीरिया युक्त पानी सीधे बाहर जाने से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता है। इसका असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है।
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डिवाइस में पौधों और सूक्ष्म जीवों को प्राकृतिक फिल्टर के रूप में उपयोग किया गया है। इसमें फिल्ट्रेशन चैंबर, सेडिमेंटेशन चैंबर, हाइड्रो बायोलॉजिकल और बायोलॉजिकल फिल्टर चैंबर लगाए गए हैं।
डॉ. अनिल के अनुसार, गंदा पानी डिवाइस में जाने के बाद कचरे को अलग करता है। भारी तत्व नीचे बैठ जाते हैं। पौधे न्यूट्रिशन अवशोषित करते हैं और माइक्रो ऑर्गेनिज्म गंदगी को खत्म कर देते हैं। इससे पानी काफी हद तक साफ हो जाता है।
उन्होंने बताया कि उपचारित पानी पीने योग्य नहीं होगा, लेकिन इसका उपयोग खेती, बागवानी और घर के अन्य कार्यों में किया जा सकता है। यह डिवाइस पोर्टेबल है और इसे आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है। साथ ही इसमें बिजली की खपत भी कम होगी और यह पर्यावरण के अनुकूल है।
कॉलेज के प्रबंधक रवि प्रकाश वर्मा, जिला विद्यालय निरीक्षक विनोद कुमार मिश्र, प्रधानाचार्य अनंत प्रकाश सरोज, जिला समन्वयक विजय कुमार और अभय अग्निहोत्री ने डॉ. अनिल कुमार को बधाई दी है।
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डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि उनके द्वारा विकसित यह डिवाइस सीवेज वॉटर को उपचारित करने में सक्षम है। इसमें एक्वाटिक ऑर्गनिज्म की मदद से हाइड्रो बायोलॉजिकल प्रक्रिया द्वारा पानी से कार्बनिक कचरे को अलग किया जाता है।
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उन्होंने बताया कि घरों से निकलने वाला साबुन, तेल, गंदगी और बैक्टीरिया युक्त पानी सीधे बाहर जाने से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता है। इसका असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है।
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डिवाइस में पौधों और सूक्ष्म जीवों को प्राकृतिक फिल्टर के रूप में उपयोग किया गया है। इसमें फिल्ट्रेशन चैंबर, सेडिमेंटेशन चैंबर, हाइड्रो बायोलॉजिकल और बायोलॉजिकल फिल्टर चैंबर लगाए गए हैं।
डॉ. अनिल के अनुसार, गंदा पानी डिवाइस में जाने के बाद कचरे को अलग करता है। भारी तत्व नीचे बैठ जाते हैं। पौधे न्यूट्रिशन अवशोषित करते हैं और माइक्रो ऑर्गेनिज्म गंदगी को खत्म कर देते हैं। इससे पानी काफी हद तक साफ हो जाता है।
उन्होंने बताया कि उपचारित पानी पीने योग्य नहीं होगा, लेकिन इसका उपयोग खेती, बागवानी और घर के अन्य कार्यों में किया जा सकता है। यह डिवाइस पोर्टेबल है और इसे आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है। साथ ही इसमें बिजली की खपत भी कम होगी और यह पर्यावरण के अनुकूल है।
कॉलेज के प्रबंधक रवि प्रकाश वर्मा, जिला विद्यालय निरीक्षक विनोद कुमार मिश्र, प्रधानाचार्य अनंत प्रकाश सरोज, जिला समन्वयक विजय कुमार और अभय अग्निहोत्री ने डॉ. अनिल कुमार को बधाई दी है।