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कूड़ा, मच्छर और गंदा पानी...बल्देवनगर की यही कहानी

Fri, 02 Sep 2016 11:46 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/लखीमपुर खीरी।
अमर उजाला ब्यूरो/लखीमपुर खीरी। Updated Fri, 02 Sep 2016 11:46 PM IST
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Garbage, mosquitoes and dirty water ... the story of Bldevnagr
kura - फोटो : amar ujala
वार्ड में न नाली हैं और न ही सड़कें, नरक सा जीवन जीने को मजबूर हैं लोग
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शहर के वार्ड बल्देवनगर के लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। वजह है कि यहां अब तक न तो नालियां बन सकी हैं और न ही सड़कें। नतीजतन मामूली वर्षा का पानी भी मोहल्ले में भर जाता है। वर्षा खत्म होने के कई महीने बाद तक इस मोहल्ले में पानी भरा रहता है। यह दीगर बात है कि नगर पालिका प्रशासन शहर में विकास के तमाम दावे कर रहा है।  
शहर के बेहजम रोड स्थित बल्देवनगर की आबादी करीब तीन हजार है, लेकिन इस मोहल्ले में जलभराव की स्थिति के कारण दस हजार से अधिक लोग प्रभावित हैं। मोहल्ले में रहने वाले दिनेश, राजेश, गुड्डू, रितेश, छैलबिहारी, यूनुस, शीला, सरिता, बृजकुमारी का कहना है कि तमाम बार उन लोगों ने नगर पालिका परिषद से लेकर तहसील दिवस तक में यहां के जलभराव की समस्या बताई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। जून से यह पानी भरा है, जो दिसंबर या जनवरी में खुद सूखता है। पानी में काई लग गई है। कूड़े के ढेर भी लगे हैं, जिनमें मच्छर पनप रहे हैं, जिससे बीमारियां फैल रही हैं। लोग बताते हैं कि इससे संक्रामक रोग फैल रहे हैं। हर घर में बुखार, खांसी आदि के मरीज हैं, लेकिन वे सब इसमें रहने और गंदे पानी से होकर गुजरने को मजबूर हैं।
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बोर्ड लगाने तक ही सीमित रही समिति
मोहल्ले के जागरूक लोगों ने एक सुधार समिति बनाई थी। इसका एक बोर्ड भी गली में लगाया गया। मोहल्ले के विकास को समिति ने प्रयास भी शुरू किया, लेकिन नगर पालिका प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया, जिससे कुछ दिनों बाद समिति के लोग थक हारकर बैठ गए। कुल मिलाकर अब यहां सिर्फ समिति का बोर्ड लगा है। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की उपेक्षा के कारण सुधार नहीं हो सका है।
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जगह-जगह कूड़े के ढेर भी बने मुसीबत
बल्देवनगर में खाली पड़े प्लाटों में लगे कूड़े के ढेर और उनमें लोटते सुअर भी लोगों के लिए मुसीबत बने हैं। फिलहाल कूड़ा और मच्छरों की भरमार से लोग परेशान हैं और नगर पालिका प्रशासन के प्रति लोगों में रोष है।

क्या कहते हैं परेशान लोग

रूबी पत्नी जमील ने बताया 20 साल पहले मकान बनवाया था। तब से आज तक नरक से छुटकारा नहीं मिला है। न नाली है और न ही पक्की गलियां। हर मौसम में यहां पानी भरता है।

जैबुनिशां पत्नी बरकती अली ने बताया कि पिछले दस साल से मकान बनवाकर रह रहे हैं लेकिन अभी वार्ड में अधिकतर गलियां कच्ची हैं और जलनिकासी का साधन न होने से गलियां तालाब बनी हुई हैं।

उस्मान ने बताया कि कई बार वार्ड मेेंबर और नगर पालिका में नाली और गली बनवाने के लिए प्रार्थना पत्र दिए, लेकिन वहां कोई सुनने वाला नही है। जलभराव के कारण लोग बीमार रहते हैं।

शहनाज बानो ने बताया कि नगर पालिका के लोग शहर में विकास कराने के तमाम दावे करते हैं कभी इस ओर भी आकर देखें कि क्या यही विकास है। इस बार वह किसी को वोट नहीं देंगी, क्यों मोहल्ले की सुधि लेने वाला कोई नहीं हैं।

सुमन मिश्रा ने बताया कि कहने को भले ही बल्देव नगर पालिका का वार्ड हो, लेकिन है यह गांव से भी बदतर। न पानी निकास के लिए नाली है और न ही पक्की गलियां। जलभराव के कारण क्या बच्चे और क्या बड़े सभी बीमार हो रहे हैं। कोई सुनने वाला नही है।

मोहल्ला निवासी शांति मिश्रा कहती हैं, स्वच्छ भारत की कल्पना की जा रही है, लेकिन हकीकत में सब कागजों तक ही सीमित है। हम लोगों को इस नरक से छुटकारा दिलाने के लिए न तो वार्ड मेेेंबर ही सक्रिय हैं और न ही पालिका के अधिकारी ही।


बल्देवनगर जैसे कई अन्य कॉलोनियों में भी यही हालात हैं। वजह है लोगों ने निचले इलाके में सस्ते प्लाट लेकर मकान बनवा लिए, जिनमें इतनी जल्दी विकास संभव नहीं है। फिलहाल प्रस्ताव में बल्देवनगर को लिया गया है। बजट आने पर यहां विकास कार्य कराए जाएंगे।
-अवनीन्द्र कुमार, ईओ-नगर पालिका परिषद, लखीमपुर
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