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कोरोनाकाल में गांधी आश्रमों की बिक्री भी गिरी

Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 02 Oct 2020 01:22 AM IST
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दुकान में रखे खादी वस्त्र
दुकान में रखे खादी वस्त्र - फोटो : LAKHIMPUR

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लखीमपुर खीरी। कोरोनाकाल में मंदी क ी मार से खादी का व्यवसाय कर रहे गांधी आश्रम भी अछूते नहीं हैं। तीन महीने के लॉकडाउन के बाद अनलॉक की प्रक्रिया में बाजार पहले की तरह खुलने लगे हैं, लेकिन पिछले सालों के मुकाबले खादी की बिक्री भी बहुत गिर रही है। वैसे तो सहालग में खादी के कपड़ों की अच्छी डिमांड रहती थी, लेकिन छह माह से शादी-विवाह आदि कार्यक्रम बंद रहने से बिक्री आधी रह गई है।
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कोविड-19 के चलते नेताओं के बड़े कार्यक्रमों पर रोक रहने से भी खादी उत्पादों की मांग कम हुई है। हालांकि सर्दियों में गांधी आश्रम की बिक्री बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि रजाई-गद्दा, कंबल, सदरी आदि उत्पादों की मांग बढ़ेगी। शहर की मेन मार्केट में 1950 से संचालित गांधी आश्रम खादी भंडार के इंचार्ज सी आर वर्मा ने बताया कि पिछले कुछ सालों में खादी में भी नई तकनीक के इस्तेमाल से बदलाव आए हैं। खादी जींस भी इसी बदलाव के दौर का उत्पाद है। रेडीमेड खादी में कुर्ता-पायजामा, शर्ट, सदरी, जैकेट, गाउन आदि उत्पाद हैैं, तो रेशम खादी, रेशम साड़ी, खेस चादर, मसलिन खादी उत्पाद हैं। खादी से बने गमछा, तौलिया, लुंगी जैसे अन्य वस्त्रों की अच्छी डिमांड रहती है। इसके अलावा आयुर्वेदिक उत्पाद भी हैं, जैसे च्यवनप्राश, शैंपू, सैनिटाइजर, अचार-मुरब्बा आदि। इंचार्ज सीआर वर्मा बताते हैं कि गांधी जयंती पर सरकार की ओर से छूट घोषित होने के बाद खादी उत्पादों की बिक्री बढ़ेगी, जिससे कोरोना संकट से आई मंदी में कुछ सुधार जरूर होगा। पिछले वर्ष 2019-20 में गांधी आश्रम ने 32 लाख रुपये की बिक्री की थी, जबकि वर्ष 2018-19 में 36 लाख कीमत के खादी उत्पाद बिके थे। इसी तरह गांधी आश्रम के मोहम्मदी, गोला, पलिया और निघासन में भी खादी भंडार संचालित किए जा रहे हैं। कुल छह गांधी आश्रम खादी भंडारों पर औसतन सालाना करीब एक करोड़ का टर्नओवर होता है, जो इस बार कोरोना संकट से डाउन हुआ हैै।

खादी ने देखे कई उतार-चढ़ाव
लंबे अरसे से गांधी आश्रम खादी भंडार से जुड़कर काम कर रहे सीआर वर्मा ने बताया कि खादी की पहचान को सिर्फ नेताओं के साथ जोड़कर देखना ठीक नहीं होगा। खादी का चलन बीच के कुछ दशकों में कम हुआ था, लेकिन पिछले कुछ सालों में जनता खादी को लेकर जागरूक हुई है। इससे खादी में भी नए प्रयोग किए जा रहे हैं। उपभोक्ताओं की मांग के आधार पर उत्पादों को विकसित किया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में युवा भी खादी की ओर आकर्षित होंगे।
800 रुपये प्रति मीटर है खादी की जींस
खादी भंडार के उत्पादों के रेट की बात करें तो यहां भी सस्ते रेट की उम्मीद बिल्कुल न करें, बल्कि सरकार द्वारा मिलने वाली छूट के दौरान ही उत्पादों के दाम कम होते हैं। बाजार में बिकने वाले अन्य ब्रांडेड कपड़ों से खादी के दाम भी कम नहीं हैं। खादी की जींस का मूल्य ही 800 रुपये प्रति मीटर है। ऐसे ही रेशम खादी, रेशम साड़ी आदि महंगे उत्पाद हैं।
पिछले चार-पांच सालों में खादी के उत्पादों की मांग बढ़ी है, जिससे प्रोत्साहित होकर अन्य जगहों पर केंद्र संचालित हो रहे हैं। अभी दो तहसील मुख्यालयों पर खादी भंडार संचालित किए जाने हैं। खादी को बढ़ावा देने के लिए खादी ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा बैंकों के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराया जाता है।
- आलोक कुमार श्रीवास्तव, जिला खादी ग्रामोद्योग अधिकारी

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