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फर्जी बिलिंग से बढ़ा बिजली का बकाया
लखीमपुर खीरी
Updated Sun, 17 May 2015 07:19 PM IST
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प्राइवेट कंपनी की फर्जी बिलिंग का मामला उजागर होने के बाद शहर का बकाया राजस्व भी बढ़ रहा है। एक अधिकारी के मुताबिक ऑनलाइन 40 हजार बिजली बिलों में सिर्फ 20 से 22 हजार बिजली बिल ही जमा हो पा रहे हैं। इससे हर महीने करीब एक करोड़ रुपये बढ़ता जा रहा है। खास बात है कि इस ओर बिजली अधिकारियों का ध्यान ही नहीं है और संबंधित कंपनी को लगातार भुगतान भी किया जा रहा है।
आंकड़ों पर गौर करें तो मौजूदा समय में लखीमपुर टाउन में बिजली उपभोक्ताओं पर 30 से 35 करोड़ रुपये बकाया है। बता दें कि हाल ही में प्राइवेट कंपनी द्वारा सैकड़ों लोगों को बिना रीडिंग के बिल भेजने का मामला उजागर हुआ था। सूत्रों के मुताबिक घरेलू और कामर्शियल कनेक्शन की बिलिंग का जिम्मा प्राइवेट कंपनी के पास है, जिसमें कुल 17 मीटर रीडर काम करते हैं। हर महीने 25 तारीख तक एक रीडर को दो हजार उपभोक्ताओं को बिलिंग करनी होती है, लेकिन लक्ष्य पूरा करने की जल्दी में सही खपत का आंकलन किए बिना ही एक जगह ही बैठकर लोगों को बिल जारी कर दिए जाते हैं। इससे आईडीएफ बिल भी लगातार बढ़ रहे और सही मीटरों को खराब दिखाने पर राजस्व का भी नुकसान हो रहा है। वहीं आंकड़ों पर नजर डाले तो शहर में हैंडबिलिंग होने केे बावजूद इनमें से आधे बिजली बिल ही जमा हो पाते हैं। विभाग पर शेष उपभोक्ताओं के बिजली खर्च का बकाया लगातार बढ़ रहा है। बावजूद इसके प्राइवेट कंपनी को उसके द्वारा फर्जी बिलिंग का भी भुगतान किया जा रहा है।
एसडीओ टाउन धर्मेंद्र आनंद ने बताया कि बिजली उपभोक्ताओं को प्राइवेट कंपनी द्वारा की जा रही बिलिंग पर पूरी नजर रखी जा रही है। इस मामले में पहले ही जांच की बात कही गई है। प्रयास किया जा रहा है शहर के सभी उपभोक्ताओं को उनके घर पर सही रीडिंग वाला बिजली बिल उपलब्ध कराया जा सके।
न मानीटरिंग और न बन रही रिपोर्ट
विभाग में राजस्व लक्ष्य की प्राप्ति ही अधिकारियों की प्राथमिकता होती है। शहर में मीटर रीडिंग या बिलिंग की मानीटरिंग नहीं की जाती है। खुद अधिकारियों की छानबीन में ही फर्जी बिलिंग का मामला उजागर हुआ है लेकिन अभी तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
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आंकड़ों पर गौर करें तो मौजूदा समय में लखीमपुर टाउन में बिजली उपभोक्ताओं पर 30 से 35 करोड़ रुपये बकाया है। बता दें कि हाल ही में प्राइवेट कंपनी द्वारा सैकड़ों लोगों को बिना रीडिंग के बिल भेजने का मामला उजागर हुआ था। सूत्रों के मुताबिक घरेलू और कामर्शियल कनेक्शन की बिलिंग का जिम्मा प्राइवेट कंपनी के पास है, जिसमें कुल 17 मीटर रीडर काम करते हैं। हर महीने 25 तारीख तक एक रीडर को दो हजार उपभोक्ताओं को बिलिंग करनी होती है, लेकिन लक्ष्य पूरा करने की जल्दी में सही खपत का आंकलन किए बिना ही एक जगह ही बैठकर लोगों को बिल जारी कर दिए जाते हैं। इससे आईडीएफ बिल भी लगातार बढ़ रहे और सही मीटरों को खराब दिखाने पर राजस्व का भी नुकसान हो रहा है। वहीं आंकड़ों पर नजर डाले तो शहर में हैंडबिलिंग होने केे बावजूद इनमें से आधे बिजली बिल ही जमा हो पाते हैं। विभाग पर शेष उपभोक्ताओं के बिजली खर्च का बकाया लगातार बढ़ रहा है। बावजूद इसके प्राइवेट कंपनी को उसके द्वारा फर्जी बिलिंग का भी भुगतान किया जा रहा है।
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एसडीओ टाउन धर्मेंद्र आनंद ने बताया कि बिजली उपभोक्ताओं को प्राइवेट कंपनी द्वारा की जा रही बिलिंग पर पूरी नजर रखी जा रही है। इस मामले में पहले ही जांच की बात कही गई है। प्रयास किया जा रहा है शहर के सभी उपभोक्ताओं को उनके घर पर सही रीडिंग वाला बिजली बिल उपलब्ध कराया जा सके।
न मानीटरिंग और न बन रही रिपोर्ट
विभाग में राजस्व लक्ष्य की प्राप्ति ही अधिकारियों की प्राथमिकता होती है। शहर में मीटर रीडिंग या बिलिंग की मानीटरिंग नहीं की जाती है। खुद अधिकारियों की छानबीन में ही फर्जी बिलिंग का मामला उजागर हुआ है लेकिन अभी तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
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