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चार मिलों पर पिछले साल का एक अरब से अधिक बकाया
लखीमपुर खीरी
Updated Tue, 22 Dec 2015 11:12 PM IST
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नए पेराई सत्र 2015-16 में एक माह बीत गया। किसी चीनी मिल ने भुगतान नहीं किया है। वहीं पिछले पेराई सत्र 2014-15 का चार मिलों पर एक अरब से अधिक बकाया है, जिसे चुकता करने में मिलें देरी कर रहीं हैं। बजाज ग्रुप की गोला, पलिया और खंभारखेड़ा के अलावा ऐरा मिल पर किसानों का काफी रुपया बकाया है। जबकि विलंब से भुगतान करने के चलते आठ मिलों पर गन्ना एक्ट के तहत किसानों को बतौर ब्याज 79 करोड़ 26 लाख 70 हजार रुपये की देनदारी बन गई है। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद चीनी मिलों ने किसानों का पूर्ण भुगतान नहीं किया, वहीं अफसर भी चुप्पी साधे हैं।
इसे गन्ना किसानों के प्रति सरकार की बेरुखी ही कहेंगे कि पिछले पेराई सत्र 2014-15 में किसानों को अपने गन्ना मूल्य का भुगतान प्राप्त करने के लिए हाईकोर्ट का सहारा लेना पड़ा। कोर्ट ने किसानों की समस्याओं को देखते हुए उनके हित में फैसला करते हुए आदेश जारी किए, जिसमें भुगतान न करने वाली चीनी मिलों के मालिकों और जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराते हुए कार्रवाई के आदेश दिए थे। इसके कई माह बीत जाने के बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं।
कोर्ट के आदेश को चीनी मिलों ने ठेंगा दिखाया ही, साथ ही अफसरों ने भी चुप्पी साध रखी है। लिहाजा अभी तक किसानों को पूर्ण भुगतान नहीं किया गया। जबकि नए पेराई सत्र में भी चीनी मिलें करोड़ों का गन्ना पेराई कर चुकी हैं, जिससे पिछला बकाया भुगतान करने में समस्या नहीं होनी चाहिए। गन्ना विभाग से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक बजाज ग्रुप की गोला मिल पर 20 करोड़ 49 लाख 86 हजार, पलिया पर 19 करोड़ 22 लाख 37 हजार, खंभारखेड़ा पर 17 करोड़ 35 लाख 27 हजार और ऐरा मिल पर सबसे अधिक 44 करोड़ 32 लाख 88 हजार रुपये गन्ना मूल्य बकाया है।
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जिला गन्ना अधिकारी जगदीश चंद्र यादव ने बताया कि बकाएदार चीनी मिलें प्रतिदिन कुछ न कुछ भुगतान कर रही है इसलिए ज्यादा दबाव नहीं बनाया जा रहा है। अभी तक 97 फीसदी भुगतान कराया जा चुका है। उम्मीद है कि इसी माह में पूरा भुगतान करा दिया जाएगा।
नई चीनी बेचकर कर रहे पुराना भुगतान
नए पेराई सत्र में चीनी उत्पादन करने के साथ ही मिलों ने बिक्री भी शुरू कर दी है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि नई चीनी बेचकर मिल मालिक पिछला भुगतान कर रहे हैं। फिर भी पूर्ण रूप से भुगतान करने में देरी की जा रही है।
सड़क निर्माण के बहाने बंद कर दिया गन्ना सेंटर
बांकेगंज। कस्बे से गोला जाने वाली मात्र दो किलोमीटर रोड का निर्माण होने के बहाने बजाज हिंदुस्तान चीनी मिल ने बांकेगंज गन्ना सेंटर बंद कर दिया है। गन्ना सेंटर पर पिछले चार दिनों से तौल बंद होने के कारण किसान परेशान हैं। चीनी मिल प्रबंधन का मानना है कि सड़क निर्माण के चलते बांकेगंज केंद्र से खरीदा गया गन्ना चीनी मिल पहुंच नहीं पा रहा है, इसके कारण यहां तौल बंद की गई है।
बता दें कि बांकेगंज गन्ना सेंटर पर क्षेत्र के 50 से ज्यादा गांवों के गन्ने की खरीद होती है। सेंटर से जुडे़ किसानों की पर्चियां तो आ रही हैं, लेकिन किसान जब वहां गन्ना लेकर पहुंचते हैं तो उनसे अपना गन्ना नौवाखेड़ा, जटपुरा और मिल गेट ले जाने को कहा जा रहा है। इससे किसानों को अपनी खून पसीने की कमाई की बिक्री को पंद्रह से बीस किलोमीटर लंबी दौड़ लगानी पड़ रही है। साथ ही अधिक भाड़ा भी खर्च करना पड़ रहा है। इसके अलावा समय के साथ पैसे की बर्बादी होने से किसानों को दोहरा नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों ने बांकेगंज में चार दिनों से बंद चल रही गन्ना तौल को शुरू करवाने की मांग की है। उधर इस संबंध में जिला गन्ना अधिकारी जगदीश चंद्र यादव का कहना है कि मामला संज्ञान में आया है, मामले की जांच के बाद कार्रवाई होगी।
क्या कहते है गन्ना उत्पादक किसान....
बांकेगंज गन्ना क्रय केंद्र से संबद्ध किसानों मुश्ताक अली, करामत, नियामत, हिमायत, अतहर अली, इसार खां, अतीउल्ला, अरूण् कुमार, संजय, अंजू, विपिन शर्मा, प्रेम सिंह आदि का कहना है बजाज चीनी मिल प्रंबधन ने रोड के बहाने गन्ना सेंटर बंद कर रखा है। उनका आरोप है कि निर्माणाधीन रोड पर किसानों के गन्ने और धान से भरी ट्रालिंया, ब्राडगेज आमन परिवर्तन के लिए इसी सड़क से होकर पत्थर, बजड़ी और मौंरग के भरे ट्रक इसके अलावा रोड निर्माण सामग्री आदि आसानी से निकल रहे है। आरोप है कि मिल प्रबंधन तौल बंद कर किसानों का उत्पीड़न कर रहा है।
ओवरलोड वाहनों पर रोक की मांग
जंगबहादुर गंज। परिवहन और पुलिस की मिलीभगत से ओवरलोड ट्रकों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के संचालन से आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। अधिक लोड के कारण वाहनों के इंजन अधिक कार्बन उत्सर्जन कर एवं ध्वनि करके वातावरण को प्रदूषित कर रहे हैं।
ज्ञातव्य है कि चीनी मिल को क्रय केंद्रों से गन्ना ढुलाई ट्रकों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से की जा रही है। इन वाहनों पर ओवरवेट का नियम लागू नहीं है। इस कारण धड़ल्ले से वाहनों से निर्धारित वजन से अधिक गन्ना लादा जा रहा है।
बताया जाता है कि तमाम ट्रॉलियों का व्यावसायिक रजिस्ट्रेशन नहीं है। एक ट्रक के कागजों से अधिक ट्रक भी चल रहे हैं। इसके लिए वाहन स्वामियों द्वारा प्रतिमाह निर्धारित तिथि पर सुविधा शुल्क परिवहन और पुलिस को दिया जाता है परिणाम स्वरूप शासन को लाखों रुपयों की राजस्व हानि झेलनी पड़ रही है साथ ही ध्वनि और वायु प्रदूषण बढ़ने से प्रदूषण नियंत्रण विभाग भी आंखे बंद किए हुए है। क्षेत्रवासियों ने ओवरलोड और ओवरहाईट वाहनों के संचालन पर रोक लगवाने की मांग शासन और जिलाधिकारी से की है।
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इसे गन्ना किसानों के प्रति सरकार की बेरुखी ही कहेंगे कि पिछले पेराई सत्र 2014-15 में किसानों को अपने गन्ना मूल्य का भुगतान प्राप्त करने के लिए हाईकोर्ट का सहारा लेना पड़ा। कोर्ट ने किसानों की समस्याओं को देखते हुए उनके हित में फैसला करते हुए आदेश जारी किए, जिसमें भुगतान न करने वाली चीनी मिलों के मालिकों और जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराते हुए कार्रवाई के आदेश दिए थे। इसके कई माह बीत जाने के बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं।
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कोर्ट के आदेश को चीनी मिलों ने ठेंगा दिखाया ही, साथ ही अफसरों ने भी चुप्पी साध रखी है। लिहाजा अभी तक किसानों को पूर्ण भुगतान नहीं किया गया। जबकि नए पेराई सत्र में भी चीनी मिलें करोड़ों का गन्ना पेराई कर चुकी हैं, जिससे पिछला बकाया भुगतान करने में समस्या नहीं होनी चाहिए। गन्ना विभाग से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक बजाज ग्रुप की गोला मिल पर 20 करोड़ 49 लाख 86 हजार, पलिया पर 19 करोड़ 22 लाख 37 हजार, खंभारखेड़ा पर 17 करोड़ 35 लाख 27 हजार और ऐरा मिल पर सबसे अधिक 44 करोड़ 32 लाख 88 हजार रुपये गन्ना मूल्य बकाया है।
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जिला गन्ना अधिकारी जगदीश चंद्र यादव ने बताया कि बकाएदार चीनी मिलें प्रतिदिन कुछ न कुछ भुगतान कर रही है इसलिए ज्यादा दबाव नहीं बनाया जा रहा है। अभी तक 97 फीसदी भुगतान कराया जा चुका है। उम्मीद है कि इसी माह में पूरा भुगतान करा दिया जाएगा।
नई चीनी बेचकर कर रहे पुराना भुगतान
नए पेराई सत्र में चीनी उत्पादन करने के साथ ही मिलों ने बिक्री भी शुरू कर दी है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि नई चीनी बेचकर मिल मालिक पिछला भुगतान कर रहे हैं। फिर भी पूर्ण रूप से भुगतान करने में देरी की जा रही है।
सड़क निर्माण के बहाने बंद कर दिया गन्ना सेंटर
बांकेगंज। कस्बे से गोला जाने वाली मात्र दो किलोमीटर रोड का निर्माण होने के बहाने बजाज हिंदुस्तान चीनी मिल ने बांकेगंज गन्ना सेंटर बंद कर दिया है। गन्ना सेंटर पर पिछले चार दिनों से तौल बंद होने के कारण किसान परेशान हैं। चीनी मिल प्रबंधन का मानना है कि सड़क निर्माण के चलते बांकेगंज केंद्र से खरीदा गया गन्ना चीनी मिल पहुंच नहीं पा रहा है, इसके कारण यहां तौल बंद की गई है।
बता दें कि बांकेगंज गन्ना सेंटर पर क्षेत्र के 50 से ज्यादा गांवों के गन्ने की खरीद होती है। सेंटर से जुडे़ किसानों की पर्चियां तो आ रही हैं, लेकिन किसान जब वहां गन्ना लेकर पहुंचते हैं तो उनसे अपना गन्ना नौवाखेड़ा, जटपुरा और मिल गेट ले जाने को कहा जा रहा है। इससे किसानों को अपनी खून पसीने की कमाई की बिक्री को पंद्रह से बीस किलोमीटर लंबी दौड़ लगानी पड़ रही है। साथ ही अधिक भाड़ा भी खर्च करना पड़ रहा है। इसके अलावा समय के साथ पैसे की बर्बादी होने से किसानों को दोहरा नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों ने बांकेगंज में चार दिनों से बंद चल रही गन्ना तौल को शुरू करवाने की मांग की है। उधर इस संबंध में जिला गन्ना अधिकारी जगदीश चंद्र यादव का कहना है कि मामला संज्ञान में आया है, मामले की जांच के बाद कार्रवाई होगी।
क्या कहते है गन्ना उत्पादक किसान....
बांकेगंज गन्ना क्रय केंद्र से संबद्ध किसानों मुश्ताक अली, करामत, नियामत, हिमायत, अतहर अली, इसार खां, अतीउल्ला, अरूण् कुमार, संजय, अंजू, विपिन शर्मा, प्रेम सिंह आदि का कहना है बजाज चीनी मिल प्रंबधन ने रोड के बहाने गन्ना सेंटर बंद कर रखा है। उनका आरोप है कि निर्माणाधीन रोड पर किसानों के गन्ने और धान से भरी ट्रालिंया, ब्राडगेज आमन परिवर्तन के लिए इसी सड़क से होकर पत्थर, बजड़ी और मौंरग के भरे ट्रक इसके अलावा रोड निर्माण सामग्री आदि आसानी से निकल रहे है। आरोप है कि मिल प्रबंधन तौल बंद कर किसानों का उत्पीड़न कर रहा है।
ओवरलोड वाहनों पर रोक की मांग
जंगबहादुर गंज। परिवहन और पुलिस की मिलीभगत से ओवरलोड ट्रकों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के संचालन से आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। अधिक लोड के कारण वाहनों के इंजन अधिक कार्बन उत्सर्जन कर एवं ध्वनि करके वातावरण को प्रदूषित कर रहे हैं।
ज्ञातव्य है कि चीनी मिल को क्रय केंद्रों से गन्ना ढुलाई ट्रकों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से की जा रही है। इन वाहनों पर ओवरवेट का नियम लागू नहीं है। इस कारण धड़ल्ले से वाहनों से निर्धारित वजन से अधिक गन्ना लादा जा रहा है।
बताया जाता है कि तमाम ट्रॉलियों का व्यावसायिक रजिस्ट्रेशन नहीं है। एक ट्रक के कागजों से अधिक ट्रक भी चल रहे हैं। इसके लिए वाहन स्वामियों द्वारा प्रतिमाह निर्धारित तिथि पर सुविधा शुल्क परिवहन और पुलिस को दिया जाता है परिणाम स्वरूप शासन को लाखों रुपयों की राजस्व हानि झेलनी पड़ रही है साथ ही ध्वनि और वायु प्रदूषण बढ़ने से प्रदूषण नियंत्रण विभाग भी आंखे बंद किए हुए है। क्षेत्रवासियों ने ओवरलोड और ओवरहाईट वाहनों के संचालन पर रोक लगवाने की मांग शासन और जिलाधिकारी से की है।