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Lakhimpur Kheri News: हंसी के फव्वारे भी छूटे, विदाई के दर्द ने भी छुआ

Mon, 26 Oct 2026 11:51 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Mon, 26 Oct 2026 11:51 PM IST
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Fountains of laughter were released, and the pain of farewell touched us too
पलिया रामलीला में काव्य पढ़ती कवयित्री शशि श्रेया। स्रोत: कमेटी
पलियाकलां। रामलीला मेला मैदान में रविवार रात आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में हास्य-व्यंग्य ने श्रोताओं को खूब गुदगुदाया तो विदाई की रचना ने भावुक कर दिया। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में रामलीला कमेटी की ओर से आयोजित सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों से आए कवियों ने देर रात तक समां बांधे रखा।
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मुख्य अतिथि गुरु गोविंद सिंह राजकीय महाविद्यालय, पलिया के प्राचार्य डॉ. सूर्यप्रकाश शुक्ल और सेवानिवृत्त पुलिस उपाधीक्षक बालकराम कनौजिया ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कमेटी के कार्यवाहक मंत्री राजेश भारतीय ‘राजा भैया’ और वरिष्ठ सदस्य मेहरचंद अरोड़ा ने कवियों का परिचय कराया।
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रायबरेली के हास्य कवि मधु श्रीवास्तव ‘नर कंकाल’ ने सुनाया, ‘कुछ लड़कियां तो मां से वर मांगने में सीमा लांघ रही हैं, दस रुपये की अगरबत्ती जलाकर दस लाख वाला पति मांग रही हैं।’ पंडाल ठहाकों और तालियों से गूंज उठा।
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नेपाल में जन्मे हास्य कवि लक्ष्मण नेपाली ने मां के सम्मान में पढ़ा, ‘जब-जब कागज पर मैंने लिखा मां का नाम, कलम अदब से कह उठी हो गए चारों धाम।’ उनकी रचनाओं ने श्रोताओं को खूब गुदगुदाया।
बिहार के चंपारण से आए अपूर्ण विक्रम शाह ने देशभक्ति की रचनाएं सुनाईं। लखनऊ की कवयित्री शशि श्रेया ने प्रेम और सामाजिक विडंबनाओं पर पढ़ा, ‘मैंने माधव से कहा सामने सब अपने हैं, जवाब था, अगर अपने हैं, सामने क्यों हैं।’
इटावा के डॉ. राजीव राज ने सामाजिक परिस्थितियों और बदलते परिवेश पर रचनाएं सुनाईं। सम्मेलन के संयोजक कवि लखीमपुरी ने अपने पिता और प्रसिद्ध कवि फारूक सरल की काव्य परंपरा का स्मरण कराते हुए बेटी की विदाई पर पढ़ा, ‘याद करता रहूंगा मैं बिटिया तुम्हें, तुम तो शादी करके चली जाओगी।’ उनकी रचना ने श्रोताओं को भावुक कर दिया।


रायबरेली के डॉ. नीरज पांडे ने संचालन करते हुए हास्य-व्यंग्य से समां बांधा। उनकी पंक्तियों, ‘तू जिसकी मुश्किलें आसान करने में लगा है, वही बंदा तेरा नुकसान करने में लगा है’, पर श्रोताओं ने खूब दाद दी। रात दो बजे तक श्रोता पंडाल में जमे रहे।
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