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किसानों के समूह अपनी कंपनी बनाकर करेंगे व्यावसायिक खेती
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विकास भवन में एफपीओ के गठन की जानकारी देते समन्यवक पीएस ओझा। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
लखीमपुर खीरी। उत्पादक किसानों को उद्यमी बनाने के लिए जनपद में एफपीओ (फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन) का गठन किया जाएगा। एक एफपीओ में कम से कम 10 से 12 किसान शामिल हो सकतेे हैं। इन्हें औषधीय पौधों की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिनकी बाजार में अच्छी मांग है। लेमन ग्रास, पामारोजा, खस और बांस की खेती के लिए एफपीओ को सरकार द्वारा 20 हजार रुपये प्रति एकड़ अनुदान भी दिया जाएगा। एफपीओ को ऑनलाइन ट्रेडिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। अभी योजना के प्रारंभ में प्रत्येक ब्लॉक में एक-एक एफपीओ का गठन किया जाएगा।
विकास भवन के सभागार में उत्तर प्रदेश जैव ऊर्जा विकास बोर्ड के समन्वयक पीएस ओझा ने कहा कि अब किसान भी अपनी कंपनी बनाकर अपने उत्पादों को सीधे ट्रेडर के पास बेच सकेंगे। बिचौलियों का दखल खत्म हो जाएगा। इससे उनकी आमदनी बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि मनरेगा कार्डधारक परिवारों को उनकी अधिकतम एक एकड़ व्यक्तिगत जमीन पर परियोजना के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक इनपुट और श्रम लागत का भुगतान सरकार द्वारा किया जाएगा। एफपीओ को इकाई की स्थापना के लिए प्रधानमंत्री स्वरोजगार योजना/मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत क्रेडिट लिंक बैंक एडेड सब्सिडी की सुविधा मिलेगी। बायोगैस वेस्ट पॉवर जनरेशन (ऑफग्रिड) थर्मल एनर्जी एप्लीकेशन प्रोग्राम और गोवर्धन योजना के तहत इकाइयों की स्थापना के लिए कंवर्जेंस सुविधा दी जाएगी। किसानों को उद्यमिता का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि एफपीओ के संचालन के लिए कुल लागत की 10 प्रतिशत रकम स्वयं किसानों को लगानी होगी, जबकि 10 प्रतिशत धनराशि प्रदेश सरकार और 80 प्रतिशत धनराशि केंद्र सरकार मुहैया कराएगी।
बैठक में किसानों को लेमन ग्रास, पामाजोरा, खस और बांस की खेती के लिए प्रोत्साहित किया गया, इसके अलावा गन्ना से गुड़ और राब बनाने वाले कोल्हुओं को मॉडिफाई करके अन्य उत्पादों को तैयार करने की तकनीक को अमल में लाए जाने पर चर्चा की गई। जिला प्रशिक्षण अधिकारी डॉ राजकिशोर ने भी विचार रखे। बैठक में सीडीओ अरविंद सिंह, सीएमओ डॉ मनोज अग्रवाल समेत कई ब्लॉकों के बीडीओ समेत किसान मौजूद रहे।
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विकास भवन के सभागार में उत्तर प्रदेश जैव ऊर्जा विकास बोर्ड के समन्वयक पीएस ओझा ने कहा कि अब किसान भी अपनी कंपनी बनाकर अपने उत्पादों को सीधे ट्रेडर के पास बेच सकेंगे। बिचौलियों का दखल खत्म हो जाएगा। इससे उनकी आमदनी बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि मनरेगा कार्डधारक परिवारों को उनकी अधिकतम एक एकड़ व्यक्तिगत जमीन पर परियोजना के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक इनपुट और श्रम लागत का भुगतान सरकार द्वारा किया जाएगा। एफपीओ को इकाई की स्थापना के लिए प्रधानमंत्री स्वरोजगार योजना/मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत क्रेडिट लिंक बैंक एडेड सब्सिडी की सुविधा मिलेगी। बायोगैस वेस्ट पॉवर जनरेशन (ऑफग्रिड) थर्मल एनर्जी एप्लीकेशन प्रोग्राम और गोवर्धन योजना के तहत इकाइयों की स्थापना के लिए कंवर्जेंस सुविधा दी जाएगी। किसानों को उद्यमिता का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि एफपीओ के संचालन के लिए कुल लागत की 10 प्रतिशत रकम स्वयं किसानों को लगानी होगी, जबकि 10 प्रतिशत धनराशि प्रदेश सरकार और 80 प्रतिशत धनराशि केंद्र सरकार मुहैया कराएगी।
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बैठक में किसानों को लेमन ग्रास, पामाजोरा, खस और बांस की खेती के लिए प्रोत्साहित किया गया, इसके अलावा गन्ना से गुड़ और राब बनाने वाले कोल्हुओं को मॉडिफाई करके अन्य उत्पादों को तैयार करने की तकनीक को अमल में लाए जाने पर चर्चा की गई। जिला प्रशिक्षण अधिकारी डॉ राजकिशोर ने भी विचार रखे। बैठक में सीडीओ अरविंद सिंह, सीएमओ डॉ मनोज अग्रवाल समेत कई ब्लॉकों के बीडीओ समेत किसान मौजूद रहे।
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