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जंगलों को आग से बचाने को बनेगा फारेस्ट फायर स्टेशन
बांकेगंज
Updated Thu, 22 Oct 2015 06:59 PM IST
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जंगलों को आग से बचाने को वन विभाग अपने फारेस्ट फायर स्टेशन स्थापित करेगा। इसका मुख्यालय जिला स्तर पर होगा लेकिन जंगलों की निगरानी के लिए जंगल के आसपास लगे मोबाइल टॉवर्स पर उच्च क्षमता के कैमरे लगाए जाएंगे ताकि जंगलों में कहीं भी आग लगने पर वन विभाग को तत्काल पता चले। डीएफओ साउथ नीरज कुमार ने इस आशय का प्रस्ताव बनाकर विभाग के उच्चाधिकारियों को भेज दिया है।
देश भर के 30 आईएफएस अधिकारियों का दल मिड कॅरियर ट्रेनिंग पर फिनलैंड, स्टोनिया और रूस का भ्रमण करने गया था। वहां उन्होंने देखा कि जंगलों को आग से बचाने के कुछ ऐसे ही इंतजाम किए गए हैं। उन देशों की व्यवस्था से सबक लेते हुए यहां भी जंगलों में लगने वाली आग से सुरक्षा के लिए इस योजना को क्रियान्वित करने का निर्णय किया गया है। मालूम हो कि तराई के जंगलों में आग लगने से हर साल करोड़ों की वन संपदा और दुर्लभ वन्यजीवों का नुकसान होता है। आग से जंगलों को बचाने के लिए वन विभाग अब तक फायर लाइन बनाने जैसे परंपरागत तरीकों का इस्तेमाल होता रहा है। अब कैमरे लगने से इसकी सूचना तत्काल मुख्यालय स्थित फारेस्ट फायर कंट्रोल रूम को मिलेगी और वहां से तत्काल संबधित रेंज अधिकारियों को अलर्ट कर दिया जाएगा ताकि तत्काल आग बुझाने के उपाय शुरू हो सकें। इसके साथ ही जिला मुख्यालय से आग बुझाने के यंत्र रवाना कर दिए जाएंगे। ताकि समय से आग पर काबू पाया जा सके।
डीएफओ साउथ नीरज कुमार ने बताया कि 46 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले दक्षिण खीरी वन प्रभाग की सीमा के चारों ओर 15 कैमरे लगाने और मुख्यालय पर फारेस्ट फायर स्टेशन स्थापित करने की कार्ययोजना बनाकर वन मुख्यालय को भेजी गई है। प्रथम चरण में इसके लिए 10 लाख रुपये कर मांग की गई है। उन्होंने बताया कि यदि इस कार्ययोजना की मंजूरी मिली तो अगले फायर सीजन से पहले ही कैमरे लगाने और फायर स्टेशन स्थापित करने का काम पूरा हो जाएगा।
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देश भर के 30 आईएफएस अधिकारियों का दल मिड कॅरियर ट्रेनिंग पर फिनलैंड, स्टोनिया और रूस का भ्रमण करने गया था। वहां उन्होंने देखा कि जंगलों को आग से बचाने के कुछ ऐसे ही इंतजाम किए गए हैं। उन देशों की व्यवस्था से सबक लेते हुए यहां भी जंगलों में लगने वाली आग से सुरक्षा के लिए इस योजना को क्रियान्वित करने का निर्णय किया गया है। मालूम हो कि तराई के जंगलों में आग लगने से हर साल करोड़ों की वन संपदा और दुर्लभ वन्यजीवों का नुकसान होता है। आग से जंगलों को बचाने के लिए वन विभाग अब तक फायर लाइन बनाने जैसे परंपरागत तरीकों का इस्तेमाल होता रहा है। अब कैमरे लगने से इसकी सूचना तत्काल मुख्यालय स्थित फारेस्ट फायर कंट्रोल रूम को मिलेगी और वहां से तत्काल संबधित रेंज अधिकारियों को अलर्ट कर दिया जाएगा ताकि तत्काल आग बुझाने के उपाय शुरू हो सकें। इसके साथ ही जिला मुख्यालय से आग बुझाने के यंत्र रवाना कर दिए जाएंगे। ताकि समय से आग पर काबू पाया जा सके।
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डीएफओ साउथ नीरज कुमार ने बताया कि 46 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले दक्षिण खीरी वन प्रभाग की सीमा के चारों ओर 15 कैमरे लगाने और मुख्यालय पर फारेस्ट फायर स्टेशन स्थापित करने की कार्ययोजना बनाकर वन मुख्यालय को भेजी गई है। प्रथम चरण में इसके लिए 10 लाख रुपये कर मांग की गई है। उन्होंने बताया कि यदि इस कार्ययोजना की मंजूरी मिली तो अगले फायर सीजन से पहले ही कैमरे लगाने और फायर स्टेशन स्थापित करने का काम पूरा हो जाएगा।
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