{"_id":"642e9edd1f9fd7108f053d17","slug":"forest-department-team-captured-tigress-in-cage-in-lakhimpur-kheri-2023-04-06","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"दहशत खत्म: वन विभाग की टीम ने पिंजड़े में कैद की बाघिन, 12 साल के बालक को बनाया था शिकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दहशत खत्म: वन विभाग की टीम ने पिंजड़े में कैद की बाघिन, 12 साल के बालक को बनाया था शिकार
Thu, 06 Apr 2023 03:59 PM IST
मुकेश कुमार
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Published by: मुकेश कुमार
Updated Thu, 06 Apr 2023 03:59 PM IST
सार
पलियाकांल क्षेत्र के निबुआबोझ गांव में बाघिन ने नवंबर 2022 में एक बालक को मार डाला था। इसके बाद वन विभाग की टीम ने उसे रेडियो कॉलर आईडी लगाकर सोनारीपुर रेंज में छोड़ा था। बाद में बाघिन फिर इसी इलाके में लौट आई थी।
विज्ञापन
पिंजड़े में बेहोश पड़ी बाघिन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
लखीमपुर खीरी के पलियाकांल क्षेत्र के निबुआबोझ गांव में एक बालक का शिकार करने वाली बाघिन को वन विभाग की टीम ने ट्रेंकुलाइज कर पकड़ लिया। उसका अब नया आशियाना कतर्निया घाट होगा। बाघिन के पकड़े जाने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।
विज्ञापन
गांव निबुआबोझ में एक बालक को मौत के घाट उतारने वाली बाघिन को दुधवा पार्क प्रशासन ने 29 नवंबर 2022 को रेडियो कॉलर आईडी लगाकर सोनारीपुर रेंज में छोड़ा था। इसके बाद करीब दो माह से बाघिन फिर से लालपुर ढाका, ऐंठपुर, पटिहन, अंधरा फार्म, गदनियां, फरसहिया समेत कई गांवों के आसपास दिखी थी।
विज्ञापन
उसने अपना ठिकाना लालपुर ढाका व ऐंठपुर के बीच स्थित सत्संग आश्रम के पास बना लिया था। इस बाघिन को ट्रेंकुलाइज करने के निर्देश भी मिले थे, जिसके बाद चिकित्सक डॉ. दयाशंकर व डॉ. दीपक लगातार बाघिन की लोकेशन ट्रेस कर रहे थे। बुधवार को बाघिन की लोकेशन बसंतापुर कलां गांव की तरफ मिली।
विज्ञापन
Trending Videos
कतर्निया घाट जंगल में छोड़ा गया
वन विभाग की टीम चिकित्सकों के साथ वहां पहुंची। बाघिन को घेरने के बाद डॉ. दयाशंकर ने उसे ट्रेंकुइलाज किया। इसके बाद उसे पिंजड़े में कैद किया गया। पलिया के प्रभारी रेंजर विमलेश कुमार ने बताया कि बाघिन को ट्रेंकुइलाज कर लिया गया है। अब उसे कतर्निया घाट छोड़ा गया है।इसलिए बदली जा रही बाघिन की जगह
दुधवा में इससे पहले बाघिन को सोनारीपुर रेंज में छोड़ा गया था, लेकिन वह इलाके से परिचित हो गई थी और जंगल में छोड़े जाने के बावजूद वह फिर वहीं आ गई थी, जहां उसने बालक पर हमला किया था। आसपास के खेतों में कई बार वह देखी गई और पूरे इलाके के गांवों के आसपास वह घूमती रही।दहशत में थे ग्रामीण
बाघिन ने निबुआबोझ में बालक पर हमला किया था। उसके बाद उसने किसी मानव पर हमला नहीं किया था। हालांकि तीन-चार दिन पहले उसने अंधरा फार्म में मवेशियों का शिकार किया था। इसससे आसपास के ग्रामीणों में दहशत फैली हुई थी। करीब छह गांवों के ग्रामीण रात के अंधेरे में निकलने से कतराते थे।