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जंगल से बिजुआ तक मिले पगमार्क
बिजुआ
Updated Sat, 09 Jan 2016 10:12 PM IST
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वनराज की घर वापसी की खुशी वन विभाग 24 घंटे भी नहीं मना सका। शुक्रवार की शाम को जंगल तक वापसी के पगमार्क मिलने के दावे के बाद अगले दिन ही बाघ के फिर से जंगल से निकलने के निशान मिल रहे हैं। शनिवार की सुबह वन विभाग की टीम को बहादुरनगर गन्ना सेंटर के पास अंबारा जंगल से बाघ के आबादी की ओर रुख करने के पगमार्क मिले हैं।
‘अमर उजाला’ ने बीते दिवस ही वन विभाग के बाघ के जंगल वापसी के दावे पर सवाल उठाते हुए इस बात की आशंका जताई थी कि कहीं बाघ के पगमार्क फिर से न मिल जाएं। वही हुआ भी, अब टीम को अंबारा जंगल से करीब 10 किमी दूर बिजुआ-बस्तौला साइफन तक पगमार्क मिले हैं।
जिस रास्ते गया उसी से लौटा
टीम को शुक्रवार को बाघ के पगमार्क जिन खेतों से होकर जंगल तक जाने के मिले थे, विभाग की मानें तो शनिवार को उन्हीं खेतों से वापस आने के भी पगमार्क मिल रहे हैं। टीम उन्हीं पगमार्कों के सहारे यहां तक पहुंची है।
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उठने लगे सवाल
बाघ के जंगल तक वापस चले जाने के बाद फिर से आबादी की ओर रुख करने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। वन विभाग ने भी अभी तक महज पगमार्कों का पीछा करने के अलावा कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। बाघ की मौजूदगी जिसे इलाके में मिल रही है वह पूरी तरह से मानव बस्ती से नजदीक और गन्ने के खेत हैं। वहीं बाघ के एक दिन में करीब 10 से 15 किमी दूरी तक सफर करने के बाद यह भी तय करना मुश्किल है कि बाघ रात के अंधेरे में किस ओर मुड़ गया है।
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‘अमर उजाला’ ने बीते दिवस ही वन विभाग के बाघ के जंगल वापसी के दावे पर सवाल उठाते हुए इस बात की आशंका जताई थी कि कहीं बाघ के पगमार्क फिर से न मिल जाएं। वही हुआ भी, अब टीम को अंबारा जंगल से करीब 10 किमी दूर बिजुआ-बस्तौला साइफन तक पगमार्क मिले हैं।
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जिस रास्ते गया उसी से लौटा
टीम को शुक्रवार को बाघ के पगमार्क जिन खेतों से होकर जंगल तक जाने के मिले थे, विभाग की मानें तो शनिवार को उन्हीं खेतों से वापस आने के भी पगमार्क मिल रहे हैं। टीम उन्हीं पगमार्कों के सहारे यहां तक पहुंची है।
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उठने लगे सवाल
बाघ के जंगल तक वापस चले जाने के बाद फिर से आबादी की ओर रुख करने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। वन विभाग ने भी अभी तक महज पगमार्कों का पीछा करने के अलावा कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। बाघ की मौजूदगी जिसे इलाके में मिल रही है वह पूरी तरह से मानव बस्ती से नजदीक और गन्ने के खेत हैं। वहीं बाघ के एक दिन में करीब 10 से 15 किमी दूरी तक सफर करने के बाद यह भी तय करना मुश्किल है कि बाघ रात के अंधेरे में किस ओर मुड़ गया है।