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धान बेचने के लिए भटक रहे किसान
लखीमपुर खीरी।
Updated Mon, 26 Oct 2015 06:38 PM IST
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सरकारी धान खरीद एक अक्तूबर से शुरू हो गई हैै, जिसके लिए जिले भर में 105 क्रय केंद्र खोलने का दावा अधिकारी कर रहे हैं। तस्वीर इसके उलट कुछ और ही है। राजापुर मंडी स्थित क्रय केंद्रों पर बैनर-कांटे लगे हैं, लेकिन सन्नाटा पसरा हुआ हैै। केंद्र पर न किसान हैं और न ही धान।
जबकि मंडी में ही आढ़तियों के फड़ पर धान के ढेर लगे हुए हैं। सुदूर गांवों से आने वाले किसान अपनी उपज को आढ़तियों के हाथों औने-पौने दामों पर बेचने को विवश हैं, क्योंकि दिवाली के मद्देनजर किसानों को पैसों की जरूरत है।
राजापुर मंडी में विभिन्न एजेंसियों के तीन क्रय केंद्र खोले गए हैं, जहां सोमवार को सन्नाटा पसरा मिला। एफसीआई और कर्मचारी कल्याण निगम का क्रय केंद्र बंद मिला। जबकि विपणन शाखा के केंद्र पर कर्मचारी मिले। तीनों केंद्रों पर धान का एक दाना नहीं मिला। वहीं आढ़तियों के फड़ पर धान के ढेर लगे नजर आए।
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क्रय केंद्रों के माध्यम से अब तक लक्ष्य 129640 मीट्रिक टन के विपरीत सिर्फ 1043 मीट्रिक टन धान खरीद की गई है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक यह खरीद 85 किसानों से हुई है। लक्ष्य केे सापेक्ष यह धान खरीद एक फीसदी से भी कम है। इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि एजेंसियां किसानों से धान खरीदने में रुचि नहीं ले रहीं हैं। जो खरीद हुई है, ज्यादातर बड़े किसानों से की गई हैै। छोटे और लघु किसानों को क्रय केंद्र पर धान बेचना परेशानी का सबब बना हुआ है।
सरकारी क्रय केंद्र पर धान का समर्थन मूल्य 1450 रुपये है। जबकि मंडी में आढ़ती एक हजार से 1200 रुपये प्रति क्विंटल में धान खरीद कर रहे हैं। इससे किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
मैगलगंज क्षेत्र के गांव अमृतपुर निवासी किसान रिषपाल सिंह राजापुुर मंडी में सोमवार को अपना धान बेचने पहुंचे। उन्होंने बताया कि उनके इलाके में सरकारी क्रय केंद्र ही नहीं खुला है, जिससे उन्हें लखीमपुर मंडी में धान बेचने के लिए आना पड़ा। यहां भी क्रय केंद्र पर धान नहीं बिका, बल्कि आढ़ती के पास बेचा।
नकहा क्षेत्र के गांव चाउपुर निवासी किसान अमर सिंह ने बताया कि हमारे इलाके में क्रय केंद्र अभी शुरू नहीं हुए हैं। दिवाली नजदीक है, इसलिए पैसे की जरूरत को देखते हुए मंडी में धान बेचना मजबूरी हैै। सरकारी रेट से काफी कम दाम पर धान बेचना पड़ रहा है।
जिला खाद्य विपणन अधिकारी सीवी उत्तम के अनुसार अब धान खरीद में तेजी आएगी। शुरुआत में धान नमी ज्यादा थी, जो मानक के अनुरूप नहीं था। अधिकांश क्रय केंद्र खोले जा चुके हैैं। जहां शिकायत मिलेगी, उस क्रय केंद्र प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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जबकि मंडी में ही आढ़तियों के फड़ पर धान के ढेर लगे हुए हैं। सुदूर गांवों से आने वाले किसान अपनी उपज को आढ़तियों के हाथों औने-पौने दामों पर बेचने को विवश हैं, क्योंकि दिवाली के मद्देनजर किसानों को पैसों की जरूरत है।
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राजापुर मंडी में विभिन्न एजेंसियों के तीन क्रय केंद्र खोले गए हैं, जहां सोमवार को सन्नाटा पसरा मिला। एफसीआई और कर्मचारी कल्याण निगम का क्रय केंद्र बंद मिला। जबकि विपणन शाखा के केंद्र पर कर्मचारी मिले। तीनों केंद्रों पर धान का एक दाना नहीं मिला। वहीं आढ़तियों के फड़ पर धान के ढेर लगे नजर आए।
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क्रय केंद्रों के माध्यम से अब तक लक्ष्य 129640 मीट्रिक टन के विपरीत सिर्फ 1043 मीट्रिक टन धान खरीद की गई है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक यह खरीद 85 किसानों से हुई है। लक्ष्य केे सापेक्ष यह धान खरीद एक फीसदी से भी कम है। इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि एजेंसियां किसानों से धान खरीदने में रुचि नहीं ले रहीं हैं। जो खरीद हुई है, ज्यादातर बड़े किसानों से की गई हैै। छोटे और लघु किसानों को क्रय केंद्र पर धान बेचना परेशानी का सबब बना हुआ है।
सरकारी क्रय केंद्र पर धान का समर्थन मूल्य 1450 रुपये है। जबकि मंडी में आढ़ती एक हजार से 1200 रुपये प्रति क्विंटल में धान खरीद कर रहे हैं। इससे किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
मैगलगंज क्षेत्र के गांव अमृतपुर निवासी किसान रिषपाल सिंह राजापुुर मंडी में सोमवार को अपना धान बेचने पहुंचे। उन्होंने बताया कि उनके इलाके में सरकारी क्रय केंद्र ही नहीं खुला है, जिससे उन्हें लखीमपुर मंडी में धान बेचने के लिए आना पड़ा। यहां भी क्रय केंद्र पर धान नहीं बिका, बल्कि आढ़ती के पास बेचा।
नकहा क्षेत्र के गांव चाउपुर निवासी किसान अमर सिंह ने बताया कि हमारे इलाके में क्रय केंद्र अभी शुरू नहीं हुए हैं। दिवाली नजदीक है, इसलिए पैसे की जरूरत को देखते हुए मंडी में धान बेचना मजबूरी हैै। सरकारी रेट से काफी कम दाम पर धान बेचना पड़ रहा है।
जिला खाद्य विपणन अधिकारी सीवी उत्तम के अनुसार अब धान खरीद में तेजी आएगी। शुरुआत में धान नमी ज्यादा थी, जो मानक के अनुरूप नहीं था। अधिकांश क्रय केंद्र खोले जा चुके हैैं। जहां शिकायत मिलेगी, उस क्रय केंद्र प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।