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क्रशर और कोल्हुओं पर गन्ना बेच रहे किसान

Fri, 19 Mar 2021 12:53 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 19 Mar 2021 12:53 AM IST
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Farmers selling sugarcane on crushers and crushers
गोला गोकर्णनाथ। बजाज हिंदुस्थान शुगर मिल क्षेत्र के किसानों का गन्ने से मोह भंग होने लगा है। वजह यह है कि शुरुआत में पर्चियां नहीं मिलतीं और भुगतान भी समय पर नहीं मिलता है। इससे किसान कम दामों पर ही नगद मूल्य पाकर कोल्हू और क्रशर पर गन्ना बेच रहे हैं।
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चीनी मिल से जुड़े गन्ना किसान बताते हैं कि क्षेत्र में गन्ना प्रमुख फसल है। गन्ने पर ही किसानों की उन्नति निर्भर होती है। पिछले कुछ वर्षों से बजाज हिंदुस्थान शुगर लि. की समय से भुगतान न करने की नीति ने किसानों की आर्थिक कमर तोड़ दी है। पिछले सीजन का भुगतान ही बमुश्किल इस वर्ष नए सत्र में हो पाया है। वर्तमान सीजन का अभी भुगतान शुरू ही नहीं हुआ है। होली, बच्चों की फीस, इलाज, बैंकों का कर्ज और घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए किसानों ने मजबूरन अपना गन्ना कम दाम पर क्रशर और कोल्हू पर नगद मूल्य लेकर बेचना शुरू कर दिया है।
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मजबूरी में बेचा है अपना गन्ना
ममरी। बगचन के किसान रामसिंह भार्गव का कहना है कि गेहूं बुवाई के वक्त पर पर्चियां नहीं मिलीं। तब उन्हें मजबूरन अपना गन्ना कोल्हू पर बेचना पड़ा, जहां नगद भुगतान पाकर उन्हें जरूरतें पूरी करनी पड़ीं, जबकि चीनी मिल एक साल बाद भी भुगतान नहीं दे पा रहा है।
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नहीं मिल पाईं पर्चियां
ममरी। परेली के किसान अश्वनी कुमार वर्मा बताते हैं कि खेत में लाही की बुवाई करनी थी, लेकिन सट्टा ठप होने से पर्चियां नहीं मिल पाईं। मजबूरन उन्हें अपना गन्ना कोल्हू पर बेच देना पड़ा। उस वक्त गन्ना 200 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिका था।
अबकी कम बोया है गन्ना
संसारपुर। भीखमपुर निवासी रामसिंह राठौर ने बताया कि चीनी मिल द्वारा गन्ना भुगतान में देरी के कारण घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए क्रशर पर ही अपना गन्ना बेच दिया। अगले वर्ष के लिए कम गन्ना बोया है। खेतों में धान, गेहूं या अन्य फसलें उगा लेंगे।
घान और गेहूं की फसल उगाएंगे
संसारपुर। ग्राम मौठीखेड़ा निवासी जयसिंह यादव ने बताया के पूर्व के वर्षों में वह अपनी पूरी फसल गन्ने की ही बुवाई करते थे। गन्ना भुगतान में देरी के कारण अब उन्होंने गन्ने का रकबा बहुत कम कर धान और गेहूं की फसल लेनी शुरू कर दी है। आगे अन्य फसलों को भी वे उगाएंगे, लेकिन जब तक भुगतान की स्थिति सही नहीं हो जाती तब तक कम गन्ना बोएंगे।
खंभारखेड़ा चीनी मिल का चक्का
बंद, किसानों को लगा झटका
महेवागंज। बजाज ग्रुप की खंभारखेड़ा चीनी मिल ने बुधवार को अपना पेराई सत्र समाप्त कर दिया। मिल बंद होने से उन गन्ना किसानों को झटका लगा जिनकी गन्ने की फसल अभी खेतों में खड़ी है। मजदूर न मिलने तो कहीं बीमारी की वजह से किसान अपने खेतों से पूरा गन्ना मिल को सप्लाई नहीं कर सके हैं। मजबूरी में अब किसानों को अपना गन्ना बेहद कम दामों पर क्रशर और कोल्हुओं पर बेचना पड़ेगा।
पिछले सीजन की अपेक्षा इस बार गन्ने की पैदावार कम रही। किसानों के मुताबिक, फसल में इस बार लाल सड़न रोग लगने से पैदावार पर असर पड़ा था। तेतारपुर निवासी किसान सिमरन जीत सिंह ने बताया कि लेबर की कमी से उनका करीब दो बीघा गन्ना छिल नहीं पाया। मिल बंद होने की खबर मिली है। मजबूरन गन्ना क्रशर या कोल्हू पर बेचना पड़ेगा।

पिपरा मरोड़ा गांव निवासी प्रवेश सिंह ने बताया कि उन्हें आज पता चला कि मिल बंद हो गई। लाही की फसल के चक्कर में गन्ना खेत में ही रह गया। सुंदरवल निवासी जमाल अहमद ने बताया कि उनकी पर्ची लेट आई थी, जिससे गन्ने की आपूर्ति समय पर नहीं हो सकी। मजबूरन गन्ना कहीं और बेचना पड़ेगा।
खेतों में जो गन्ना खड़ा है वो किसानों ने बीज के लिए रोका है। मिल में सप्लाई योग्य गन्ना क्षेत्र में नहीं बचा है।
- राजेंद्र सिंह, प्रबंधक, खंभारखेड़ा चीनी मिल
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