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किसान नेता बोले, जीत अभी आधी, एमएसपी पर बने गारंटीड कानून

Sat, 20 Nov 2021 12:56 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 20 Nov 2021 12:56 AM IST
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Farmer leaders said, victory is half now, guaranteed law made on MSP
निघासन में किसान नेताओं से बात करते पुलिस और प्रशासन के अधिकारी।
22 नवंबर को लखनऊ और 26 को दिल्ली बॉर्डर पहुंचने की अपील
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लखीमपुर खीरी। करीब साल भर से तीनों कृषि कानूनों को लेकर विरोध झेल रही भाजपा सरकार की कानून वापसी की घोषणा को किसानों ने अभी अपनी आधी जीत बताया है। किसान नेताओं का कहना है आंदोलन की वजह से ही पीएम मोदी को झुकना पड़ा। आंदोलन के एक साल पूरा होने के महज कुछ दिन पहले ही तीनों काले कृषि कानूनों को सरकार ने वापस लिया है, लेकिन अभी सिर्फ आधी लड़ाई में ही सफलता मिली है। जब तक एमएसपी पर गारंटीड कानून नहीं बन जाता तब तक किसानों की लड़ाई जारी रहेगी। किसान नेताओं ने सरकार से स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश और किसानों की आय दोगुनी करने के वादे पर भी खरा उतरने और अमल में लाने की मांग की।
आधी लड़ाई जीती, आंदोलन की धार अब और तेज करेंगे
भारतीय किसान यूनियन टिकैत गुट के उत्तराखंड और यूपी प्रभारी बलजिंदर सिंह मान ने बताया कि किसानों ने अभी तो सिर्फ आधी लड़ाई ही जीती है। तीनों कृषि कानून चोर दरवाजे से बनाए गए थे। जब तक लोकसभा में कानून नहीं बन जाता इसे भरोसेमंद नहीं माना जा सकता, जबकि संसद में सरकार एमएसपी पर भी गारंटीड कानून बनाए और एमएसपी से कम पर खरीद करने वालों को जेल भेजा जाए। उन्होंने मांग की कि जब तक मांग नहीं पूरी होगी, आंदोलन चलता रहेगा।
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बलजिंदर सिंह मान ने बताया कि अभी स्वामीनाथन आयोग और किसानों की आय दोगुनी करने का वादा भी सरकार को पूरा करना होगा। इस सबके लिए 22 नवंबर को लखनऊ और 26 नवंबर को किसान आंदोलन के एक साल पूरे होने पर दिल्ली बॉर्डर पर फिर से किसान जुटेंगे और आंदोलन को और धार देंगे।
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किसानों को अपनी उपज मूल्य तय करने का मिले अधिकार
कृषि कानून वापस लिया जाना किसानों की बड़ी जीत है, लेकिन जब तक एमएसपी की वैधानिक गारंटी नहीं मिलती और किसानों को पूरा गन्ना मूल्य भुगतान नहीं मिलता तब तक किसान खुशहाल नहीं हो सकता। स्वामीनाथन रिपोर्ट को तत्काल लागू किया जाए और भारतीय किसान आयोग का गठन किया जाए। किसानों को खुद अपनी उपज का मूल्य निर्धारित करने का अधिकार मिलना चाहिए। - पटेल श्रीकृष्ण वर्मा, जिलाध्यक्ष, राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन
सरकार के कदम से संतुष्ट नहीं
किसान आंदोलन के आगे सरकार को घुटने टेकने पड़े और कृषि कानून वापस लेना पड़ा यह किसानों की जीत अवश्य है, लेकिन यह जीत तब तक अधूरी है जब तक एमएसपी गारंटी नहीं मिलती। हम इससे पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। किसान आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक केंद्रीय गृह राज्यमंत्री बर्खास्त नहीं होते और एमएसपी की गारंटी नहीं मिलती और सदन में बिल वापस नहीं लिया जाता तब तक आंदोलन वापसी का कोई मतलब नहीं। - दिलबाग सिंह, जिलाध्यक्ष भाकियू, टिकैत गुट
कृषि कानून की वापसी पर बांटी मिठाई
लखीमपुर खीरी। दिल्ली में पीएम मोदी की तरफ से तीनों कृषि कानून वापस लेने के एलान के बाद किसान नेताओं में खुशी की लहर है। शुक्रवार को भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड (तराई क्षेत्र) अमनदीप सिंह संधू ने किसानों में मिठाई बांटकर खुशी का इजहार किया। उन्होंने दावा किया कि किसान अपनी लड़ाई आगे भी जारी रखेगा। संवाद
असंतुष्ट किसानों के लिए सरकार ने लिया फैसला
भारतीय किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष अंकित अवस्थी ने बताया कि पीएम मोदी ने असंतुष्ट किसानों को समझाने के लिए यह फैसला लिया है, जो कि किसानों और देश के हित में है। उम्मीद है कि किसान अब समझ जाएंगे। किसानों के हित के लिए ही सरकार झुकी है।

नेताओं ने कहा, विधानसभा चुनाव में भाजपा को नहीं मिलेगा इसका फायदा
लखीमपुर खीरी। तीनों कृषि कानूनों को वापस लिए जाने को विपक्ष इसे भाजपा की राजनीतिक हार और चुनावी चाल मान रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि केंद्र सरकार ने किसानों के हित में नहीं अपने चुनावी हितों को ध्यान में रखकर कृषि कानूनों को वापस लिया है। हालांकि यह बहुत पहले ही हो जाना चाहिए था। विरोध शुरू होते ही सरकार कृषि कानून वापस ले लेती तो सैकड़ों किसानों की जान बच जाती।
भाजपा इस बात से इनकार कर रही है कि विधानसभा चुनावों के मद्देनजर नहीं बल्कि किसानों के हितों और उनकी भावनाओं को ध्यान में रखकर कृषि कानून वापस लिए गए हैं, जबकि विपक्ष का कहना है कि अब तक भाजपा आंदोलन करने वाले किसानों को किसान तक मानने को तैयार नहीं थी, अब जब चुनाव नजदीक आ गए हैं तो अचानक सरकार का किसान प्रेम जाग उठा है। सरकार ने अपनी इस गलती को सुधारने में बहुत ज्यादा समय लगा दिया, इससे यह भी साबित होता है सरकार में निर्णय लेने की क्षमता का अभाव है। उधर, सभी राजनीतिक दल अपने को सबसे बड़ा किसान हितैषी साबित करने में जुटे हुए हैं।
किसान हित में नहीं चुनावी फायदे  के लिए वापस लिए हैं काले कानून  
किसान जब संगठित होता है तो बड़ी से बड़ी ताकत को झुकना पड़ता है। कांग्रेस किसानों के आंदोलन में शुरुआत से साथ थी। कांग्रेस की नेता प्रियंका गांधी ने शुरुआत से ही काले कृषि कानूनों का विरोध किया और किसानों के लिए संघर्ष किया। अंतत: सरकार को झुकना पड़ा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह निर्णय किसान हित में नहीं अपने चुनावी हित में लिया है, लेकिन भाजपा को इसका फायदा मिलने वाला नहीं। किसान आंदोलन के दौरान सैकड़ों किसानों की मौत की जिम्मेदार भी भाजपा सरकार है। क्या सरकार उन्हें वापस ला पाएगी। - जफर अली नकवी, पूर्व सांसद
किसान समझ रहा है भाजपा की चालाकी
कांग्रेस पार्टी किसानों के हित में काम करने वाली है। किसान आंदोलन के दौरान कांग्रेस ने हर कदम पर किसानों का साथ दिया है। आने वाले दिनों में देश के पांच राज्यों में होने वाले चुनाव को देखते हुए सरकार ने कृषि कानूनों को वापस लिया है। किसान भाजपा की नीति और चालाकी को अच्छी तरह समझते हैं। किसान आंदोलन के दौरान जिन सैकड़ों किसान शहीद हुए हैं, सरकार उन्हें मुआवजा दे और प्रत्येक के परिवार से कम से कम एक सदस्य को नौकरी दें। साथ ही गलत नीतियों के कारण जो नुकसान हुआ, उसके लिए माफी मांगे। - प्रह्लाद पटेल, जिलाध्यक्ष कांग्रेस 
आय दोगुनी करने का राग अलाप  कर किसानों को किया कंगाल  
सरकार को कृषि कानून बहुत पहले वापस ले लेना चाहिए था। आठ सौ से अधिक किसानों की मौत के बाद सरकार ने अपनी गलती मानी। जब तक सरकार कृषि उपज के न्यूनतम समर्थन मूल्य की वैधानिक गारंटी नहीं देती तब तक किसानों का कल्याण नहीं हो सकता। भाजपा ने तो किसानों की आय दोगुनी करने का राग अलापते हुए उन्हें कंगाली के कगार पर पहुंचा दिया। भाजपा ने चुनावी फायदे के लिए यह फैसला लिया है, लेकिन इससे उसे कोई फायदा होने वाला नहीं है। किसान न भाजपा के साथ था, न रहेगा। - रामपाल सिंह यादव, जिलाध्यक्ष समाजवादी पार्टी
भाजपा कभी किसानों का  भला नहीं कर सकती 
विरोध शुरू होते ही सरकार कृषि कानून वापस ले लेती तो सैकड़ों आंदोलनकारी किसानों की जान नहीं जाती। देर आयद दुरुस्त आयद, लेकिन जिस मकसद से सरकार ने काले कृषि कानूनों को वापस लिया है वह मकसद पूरा नहीं होने वाला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी फायदे के लिए यह फैसला लिया है, लेकिन किसान जानते हैं कि भाजपा पूंजीपतियों की हिमायत करने वाली पार्टी है। भाजपा कभी किसानों का भला नहीं कर सकती। किसान आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए। - उमा शंकर गौतम, जिलाध्यक्ष बसपा

किसान भाजपा के साथ था और आगे भी रहेगा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों के हित के लिए कृषि कानून वापस लेकर सराहनीय कार्य किया है। विपक्षी दलों का यह कहना पूरी तरह गलत है कि चुनावी हित के लिए ऐसा किया गया है। भाजपा किसान समेत किसी भी वर्ग को वोटर के नजरिए से नहीं देखती, बल्कि सम्मानित नागरिक की हैसियत से देखती है। भाजपा ने किसानों के हित में बड़े काम किए हैं, भविष्य में भी करेगी। किसान विपक्ष के बहकावे में आने वाला नहीं है। किसान भाजपा के साथ था, है और आगे भी रहेगा। किसानों का हित भाजपा के साथ है। - सुनील सिंह, अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी
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