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पारिवारिक लाभ के लिए भटक रहे लाभार्थी
अमर उजाला ब्यूरो/लखीमपुर खीरी।
Updated Mon, 22 Aug 2016 12:08 AM IST
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45 दिन के अंदर नहीं मिल रही आर्थिक मदद
जांच के नाम पर तहसीलों में अटके 2774 आवेदन
इस वर्ष 1372 को मिली पारिवारिक लाभ की मदद
पारिवारिक लाभ योजना के तहत आवेदन करने वाले लाभार्थी को दफ्तर के चक्कर काटने को मजबूर हैं। ऑनलाइन प्रक्रिया होने के बावजूद गाइड लाइन के मुताबिक 45 दिन के अंदर आर्थिक मदद के दावे बेमानी साबित हो रहे हैं। सत्यापन कार्य में तेजी नहीं है, जिससे कई महीनों से 2774 लाभार्थियों के आवेदन लंबित चल रहे हैं।
बताते चलें कि पारिवारिक लाभ योजना के तहत परिवार के कमाऊ सदस्य की आकस्मिक मृत्यु होने पर आश्रित को 30 हजार रुपये की एकमुश्त आर्थिक सहायता दी जाती है। ऑनलाइन प्रक्रिया होने से आवेदन करने पर फार्म पहले संबंधित तहसील के एसडीएम कोड पर फीड होता है, जिसके बाद से 45 दिन के अंदर जांच प्रक्रिया पूरी कर पात्रों को आर्थिक मदद दी जाती है। शासनादेश के मुताबिक समय सीमा का पालन नहीं किया जा रहा है, बल्कि नियम कायदे की धज्जियां उड़ाई जा रहीं हैं। समाज कल्याण विभाग के मुताबिक एसडीएम स्तर पर जांच के बाद स्वीकृत लाभार्थियों को एक महीने के अंदर धनराशि ट्रांसफर कर दी जाती है, लेकिन तमाम आवेदनों की तहसील स्तर पर ही समय से जांच नहीं हो पा रही है। इससे लाभार्थियों को 45 दिन के अंदर लाभ देना संभव नहीं हो पा रहा है। जनवरी 2016 से अब तक 4146 लोग आवेदन कर चुके हैं, जिसमें 1372 लोग ही आर्थिक मदद पा सके हैं। जबकि 2774 आवेदन पत्र अभी पेंडिंग हैं।
आठ महीने बाद भी नहीं आया नंबर
बांकेगंज ब्लाक क्षेत्र के गांव थरवनपुर निवासी सुंदरा देवी और रामकन्या ने पति की मौत के बाद नवंबर-दिसंबर 2015 में आवेदन किया था। इसके बाद महीने बीतते गए, लेकिन उन्हें आर्थिक मदद नहीं मिल सकी। काफी दौड़भाग करने के बाद रामकन्या को पता चला कि लेखपाल ने अधिक आय की रिपोर्ट लगा दी, जिससे उन्हें अपात्र मान लिया गया। वहीं सुंदरा को अभी मदद का इंतजार है।
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आवेदन की पहले तहसील स्तर पर एसडीएम द्वारा जांच की जाती है। पात्र लाभार्थियों की सूची प्राप्त होने पर एक माह के भीतर लाभार्थी के बैंक खाते में पैसा भेज दिया जाता है। विभागीय स्तर पर देरी नहीं हो रही है, बल्कि तहसील से ही लाभार्थियों की सूची मिलने में देरी हो रही है।
-ओपी सिंह, जिला समाज कल्याण अधिकारी
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जांच के नाम पर तहसीलों में अटके 2774 आवेदन
इस वर्ष 1372 को मिली पारिवारिक लाभ की मदद
पारिवारिक लाभ योजना के तहत आवेदन करने वाले लाभार्थी को दफ्तर के चक्कर काटने को मजबूर हैं। ऑनलाइन प्रक्रिया होने के बावजूद गाइड लाइन के मुताबिक 45 दिन के अंदर आर्थिक मदद के दावे बेमानी साबित हो रहे हैं। सत्यापन कार्य में तेजी नहीं है, जिससे कई महीनों से 2774 लाभार्थियों के आवेदन लंबित चल रहे हैं।
बताते चलें कि पारिवारिक लाभ योजना के तहत परिवार के कमाऊ सदस्य की आकस्मिक मृत्यु होने पर आश्रित को 30 हजार रुपये की एकमुश्त आर्थिक सहायता दी जाती है। ऑनलाइन प्रक्रिया होने से आवेदन करने पर फार्म पहले संबंधित तहसील के एसडीएम कोड पर फीड होता है, जिसके बाद से 45 दिन के अंदर जांच प्रक्रिया पूरी कर पात्रों को आर्थिक मदद दी जाती है। शासनादेश के मुताबिक समय सीमा का पालन नहीं किया जा रहा है, बल्कि नियम कायदे की धज्जियां उड़ाई जा रहीं हैं। समाज कल्याण विभाग के मुताबिक एसडीएम स्तर पर जांच के बाद स्वीकृत लाभार्थियों को एक महीने के अंदर धनराशि ट्रांसफर कर दी जाती है, लेकिन तमाम आवेदनों की तहसील स्तर पर ही समय से जांच नहीं हो पा रही है। इससे लाभार्थियों को 45 दिन के अंदर लाभ देना संभव नहीं हो पा रहा है। जनवरी 2016 से अब तक 4146 लोग आवेदन कर चुके हैं, जिसमें 1372 लोग ही आर्थिक मदद पा सके हैं। जबकि 2774 आवेदन पत्र अभी पेंडिंग हैं।
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आठ महीने बाद भी नहीं आया नंबर
बांकेगंज ब्लाक क्षेत्र के गांव थरवनपुर निवासी सुंदरा देवी और रामकन्या ने पति की मौत के बाद नवंबर-दिसंबर 2015 में आवेदन किया था। इसके बाद महीने बीतते गए, लेकिन उन्हें आर्थिक मदद नहीं मिल सकी। काफी दौड़भाग करने के बाद रामकन्या को पता चला कि लेखपाल ने अधिक आय की रिपोर्ट लगा दी, जिससे उन्हें अपात्र मान लिया गया। वहीं सुंदरा को अभी मदद का इंतजार है।
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आवेदन की पहले तहसील स्तर पर एसडीएम द्वारा जांच की जाती है। पात्र लाभार्थियों की सूची प्राप्त होने पर एक माह के भीतर लाभार्थी के बैंक खाते में पैसा भेज दिया जाता है। विभागीय स्तर पर देरी नहीं हो रही है, बल्कि तहसील से ही लाभार्थियों की सूची मिलने में देरी हो रही है।
-ओपी सिंह, जिला समाज कल्याण अधिकारी