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आर्य कन्या डिग्री कॉलेज: गुटबाजी में तीन दैनिक वेतन कर्मी शहीद
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आर्य कन्या डिग्री कालेज
- फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। आर्यकन्या महाविद्यालय में शुरू हुई गुटबाजी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। शुक्रवार को प्राचार्य और प्रबंधक के बीच तू-तू मैं-मैं के बाद शनिवार को चतुर्थ श्रेणी के तीन दैनिक कर्मियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इनकी तैनाती पूर्व प्राचार्य ने की थी। हालांकि मौजूदा प्राचार्य बताती हैं कि किसी कर्मचारी को हटाया नहीं है, बल्कि एक तृतीय श्रेणी कर्मचारी के कोरोना पॉजिटिव होने के कारण तीन दिन के लिए कॉलेज बंद कर दिया है, इसलिए कर्मचारियों को आने से मना किया है।
प्राचार्य ने प्रबंध समिति भंग होने और मामला कोर्ट में होना बताकर शुक्रवार को कॉलेज पहुंचे स्वयं को प्रबंधक बताने वाले मुकुल दीक्षित को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया। इसके बाद रोज की तरह शनिवार को कॉलेज पहुंचे दैनिक वेतन भोगी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी लाल्ता, सुशीला वर्मा और संजू वर्मा को भी कॉलेज आने से मना करते हुए 15 दिन बाद वेतन ले जाने के लिए कह दिया। रोजी-रोटी छिनने से दो महिला सहित तीनों कर्मचारी बेहद आहत हैं। इन तीनों में युवक को करीब डेढ़ साल और दोनों महिलाओं को करीब चार पांच माह पहले ही रखा था और कुछ माह बाद ही वेतन वृद्धि भी कर दी गई।
नियमों की अनदेखी कर रखे कर्मचारी
प्राचार्य भले ही किसी को न हटाने की बात कह रही हों, लेकिन हकीकत में कर्मियों को कॉलेज आने से मना कर दिया है। कॉलेज सूत्रों की मानें तो तीनों कर्मचारियों को नियम विरुद्ध तरीके से रखा था। पूर्व प्राचार्य से इनको रखने का आधार मांगा जा चुका है, लेकिन जब नहीं मिला तभी तीनों कर्मचारियों को कॉलेज आने से मना किया है। सूत्रों के मुताबिक दैनिक वेतन पर कर्मियों को रखने के लिए प्रबंध समिति से अनुमोदन होना चाहिए। हालांकि प्रबंध समिति भंग है। ऐसे में क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी से अनुमति लेकर रखा जाना चाहिए था। जबकि ऐसा नहीं किया है। इसी कारण कर्मचारियों को हटाया गया है।
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करीब डेढ साल पहले पूर्व प्राचार्य ने प्रार्थना पत्र लेकर चार हजार रुपये पर रखा था। कुछ माह बाद बढ़ाकर पांच हजार रुपये कर दिए। नई प्राचार्य ने भी नियुक्ति संबंधी प्रार्थना पत्र लिखवाया था, लेकिन शनिवार को कॉलेज पहुंचने पर बाबू जी ने नौकरी से हटाने की जानकारी दी। महंगाई और कोरोना काल में हम लोग कहां जाएं। - लाल्ता, गुलरीपुरवा
करीब चार माह पहले पूर्व प्राचार्य ने तीन हजार रुपये में नौकरी दी थी। कुछ दिन बाद बढ़ाकर साढे़ तीन हजार रुपये कर दिए। अब कॉलेज के बाबूजी कल से आने को मना कर रहे हैं। कहते हैं कि 15 दिन बाद आकर वेतन ले जाना। घर में कोई कमाने वाला नहीं है। अब खर्च कैसे चलेगा। - सुशीला वर्मा, सेहरूआ
अगस्त में चतुर्थ श्रेणी के पद पर चार हजार पर रखा गया था। नई प्राचार्य ने 3500 रुपये वेतन कर दिया और अब नौकरी से भी निकाल दिया। पति भी कुछ नहीं करते हैं। बच्चों की पढ़ाई से लेकर घर का खर्चा इसी से चलता था। अब कैसे घर चलेगा और बच्चों को कहां से पढ़ाएंगे। -संजू वर्मा, मानपुर
किसी कर्मचारी को नौकरी से नहीं निकाला है। एक तृतीय श्रेणी कर्मचारी की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आने के कारण सोमवार से तीन दिन के लिए कॉलेज पूरी तरह से बंद कर दिया है। इसलिए सभी को आने से मना किया है।
- डॉ. वीणा गोपाल मिश्रा, प्राचार्य, भगवानदीन आर्य कन्या इंटर कॉलेज
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प्राचार्य ने प्रबंध समिति भंग होने और मामला कोर्ट में होना बताकर शुक्रवार को कॉलेज पहुंचे स्वयं को प्रबंधक बताने वाले मुकुल दीक्षित को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया। इसके बाद रोज की तरह शनिवार को कॉलेज पहुंचे दैनिक वेतन भोगी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी लाल्ता, सुशीला वर्मा और संजू वर्मा को भी कॉलेज आने से मना करते हुए 15 दिन बाद वेतन ले जाने के लिए कह दिया। रोजी-रोटी छिनने से दो महिला सहित तीनों कर्मचारी बेहद आहत हैं। इन तीनों में युवक को करीब डेढ़ साल और दोनों महिलाओं को करीब चार पांच माह पहले ही रखा था और कुछ माह बाद ही वेतन वृद्धि भी कर दी गई।
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नियमों की अनदेखी कर रखे कर्मचारी
प्राचार्य भले ही किसी को न हटाने की बात कह रही हों, लेकिन हकीकत में कर्मियों को कॉलेज आने से मना कर दिया है। कॉलेज सूत्रों की मानें तो तीनों कर्मचारियों को नियम विरुद्ध तरीके से रखा था। पूर्व प्राचार्य से इनको रखने का आधार मांगा जा चुका है, लेकिन जब नहीं मिला तभी तीनों कर्मचारियों को कॉलेज आने से मना किया है। सूत्रों के मुताबिक दैनिक वेतन पर कर्मियों को रखने के लिए प्रबंध समिति से अनुमोदन होना चाहिए। हालांकि प्रबंध समिति भंग है। ऐसे में क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी से अनुमति लेकर रखा जाना चाहिए था। जबकि ऐसा नहीं किया है। इसी कारण कर्मचारियों को हटाया गया है।
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करीब डेढ साल पहले पूर्व प्राचार्य ने प्रार्थना पत्र लेकर चार हजार रुपये पर रखा था। कुछ माह बाद बढ़ाकर पांच हजार रुपये कर दिए। नई प्राचार्य ने भी नियुक्ति संबंधी प्रार्थना पत्र लिखवाया था, लेकिन शनिवार को कॉलेज पहुंचने पर बाबू जी ने नौकरी से हटाने की जानकारी दी। महंगाई और कोरोना काल में हम लोग कहां जाएं। - लाल्ता, गुलरीपुरवा
करीब चार माह पहले पूर्व प्राचार्य ने तीन हजार रुपये में नौकरी दी थी। कुछ दिन बाद बढ़ाकर साढे़ तीन हजार रुपये कर दिए। अब कॉलेज के बाबूजी कल से आने को मना कर रहे हैं। कहते हैं कि 15 दिन बाद आकर वेतन ले जाना। घर में कोई कमाने वाला नहीं है। अब खर्च कैसे चलेगा। - सुशीला वर्मा, सेहरूआ
अगस्त में चतुर्थ श्रेणी के पद पर चार हजार पर रखा गया था। नई प्राचार्य ने 3500 रुपये वेतन कर दिया और अब नौकरी से भी निकाल दिया। पति भी कुछ नहीं करते हैं। बच्चों की पढ़ाई से लेकर घर का खर्चा इसी से चलता था। अब कैसे घर चलेगा और बच्चों को कहां से पढ़ाएंगे। -संजू वर्मा, मानपुर
किसी कर्मचारी को नौकरी से नहीं निकाला है। एक तृतीय श्रेणी कर्मचारी की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आने के कारण सोमवार से तीन दिन के लिए कॉलेज पूरी तरह से बंद कर दिया है। इसलिए सभी को आने से मना किया है।
- डॉ. वीणा गोपाल मिश्रा, प्राचार्य, भगवानदीन आर्य कन्या इंटर कॉलेज