फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   Even after 25 years, the Government College did not get PG recognitio

Lakhimpur Kheri News: राजकीय महाविद्यालय को 25 साल बाद भी नहीं मिली पीजी की मान्यता

Mon, 19 Jan 2026 11:06 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Mon, 19 Jan 2026 11:06 PM IST
विज्ञापन
Even after 25 years, the Government College did not get PG recognitio
दीपाली
पलियाकलां। क्षेत्र के युवाओं को उच्च शिक्षा का सपना दिखाने वाला श्री गुरुगोविंद सिंह जी महाराज राजकीय महाविद्यालय खुद ही अंधेरे में है। वर्ष 1999 में स्थापित हुए इस महाविद्यालय को ढाई दशक बीत जाने के बाद भी आज तक स्नातकोत्तर की मान्यता नहीं मिल सकी है।
विज्ञापन

आलम यह है कि जो छात्र-छात्राएं किसी तरह स्नातक की पढ़ाई पूरी कर लेते हैं। उन्हें आगे की शिक्षा के लिए या तो घर बैठना पड़ रहा है या फिर निजी महाविद्यालयों में शिक्षा के लिए भारी-भरकम शुल्क देना पड़ रहा है।
विज्ञापन

नेपाल सीमा से सटे आदिवासी थारू जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों सहित बसही, खजुरिया और संपूर्णानगर जैसे इलाकों से आने वाले गरीब छात्रों के लिए यह महाविद्यालय ही एकमात्र उम्मीद था। 50-60 किलोमीटर दूर से आने वाले इन छात्र-छात्राओं के लिए पहले से ही शिक्षकों की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई थीं। अब पीजी की मान्यता न होना उनके भविष्य पर दोहरी मार साबित हो रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


स्नातक के बाद उच्च शिक्षा के लिए इन छात्रों के पास शहर से बाहर जाने या महंगे निजी संस्थानों में दाखिला लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। आर्थिक तंगी के चलते इनमें से अधिकतर छात्र बीच में ही पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हैं। महाविद्यालय में अरसे से परास्नातक स्तर की कक्षाएं शुरू करने और इसकी मान्यता देने की मांग की जा रही है लेकिन शासन और प्रशासन के स्तर पर आज तक इस ओर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।


अभिभावकों का कहना है कि यदि महाविद्यालय में पीजी की सुविधा होती, तो गरीब और मेधावी छात्रों को भटकना नहीं पड़ता। यदि जल्द ही इस दिशा में कार्रवाई नहीं हुई, तो क्षेत्र के सैकड़ों युवाओं का उच्च शिक्षा प्राप्त करने का सपना हमेशा के लिए अधूरा रह जाएगा।
----------------

शिक्षकों की कमी के चलते कोर्स में कई तरह की दिक्कतें आती हैं। शिक्षक होते तो उनका समाधान आसानी से होता।
- दीपाली, बीए प्रथम वर्ष


शिक्षकों की कमी के कारण कक्षा में पढ़ाई कम ही हो पा रही जिससे हमको घर पर पढ़ाई में कड़ी मेहनत करनी पड़ती है।
- अंशिका सिंह, बीए प्रथम वर्ष


विश्वविद्यालय को शिक्षकों की कमी को पूरा करना चाहिए, ताकि छात्र छात्राओं को होने वाली दिक्कतें दूर हों।
- सुनीना रघुवंशी, बीए
---
भवन पर्याप्त हैं। मान्यता के लिए निदेशालय से कई बार पत्राचार किया जा चुका है। जल्द ही सुविधा मिलेगी।
- डॉ. सूर्यप्रकाश शुक्ला, प्राचार्य

दीपाली

दीपाली

दीपाली

दीपाली

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed