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Lakhimpur Kheri News: प्रसव कक्ष तक पहुंचने से पहले ‘दलालों’ से सामना
Sat, 02 May 2026 11:20 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 02 May 2026 11:20 PM IST
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मेडिकल कॉलेज अधीन जिला महिला अस्पताल। संवाद
लखीमपुर खीरी। जिला महिला अस्पताल में प्रसव सेवाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि प्रसूताओं के तीमारदारों को लेबर रूम तक पहुंचने से पहले कथित दलालों और कुछ आशाओं के दबाव का सामना करना पड़ता है।
परिजनों का कहना है कि मरीज की हालत गंभीर बताकर रेफर करने का डर दिखाया जाता है, जबकि सुविधा शुल्क मिलने के बाद अस्पताल में ही ऑपरेशन और प्रसव करा दिए जाते हैं।
जिला महिला अस्पताल में हर माह करीब 700 से 800 सामान्य प्रसव और 80 से 100 ऑपरेशन किए जाते हैं। आरोप है कि ऑपरेशन के नाम पर प्रति केस चार से पांच हजार रुपये तक लिए जाते हैं। इस हिसाब से हर महीने लाखों रुपये की अवैध वसूली होने की बात कही जा रही है।
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परिजनों का आरोप है कि कुछ आशा कार्यकर्ता और कथित दलाल लेबर रूम के बाहर सक्रिय रहते हैं। वे तीमारदारों को प्रसूता की जान का खतरा बताकर डराते हैं और फिर चार से पांच हजार रुपये की मांग करते हैं।
आरोप है कि किसी चिकित्सक का नाम सीधे सामने न आए, इसलिए वसूली कथित तौर पर बिचौलियों के माध्यम से कराई जाती है। मामले की शिकायतें पहले भी हो चुकी हैं, लेकिन आरोपों के मुताबिक यह सिलसिला जारी है।
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केस : 1
पांच हजार रुपये मिलने के बाद हुआ ऑपरेशन
शहर के गौटेय्याबाग निवासी अफजल ने बताया कि वह 12 दिसंबर को पत्नी आफरीन के प्रसव के लिए जिला महिला अस्पताल पहुंचे थे। आरोप है कि वहां मौजूद स्टाफ ने ब्लड प्रेशर कम होने सहित अन्य समस्याएं बताकर उन्हें रेफर कर दिया। अफजल का कहना है कि 15 दिसंबर को एक कथित दलाल को पांच हजार रुपये देने के बाद उनकी पत्नी का ऑपरेशन अस्पताल में ही कर दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बाद में उनसे एक कागज पर पैसा न देने की बात लिखवाई गई।
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केस-2
नहीं दिए रुपये तो बता दी खून की कमी
शहर के रामापुर निवासी शिवम वर्मा ने बताया कि 18 अप्रैल को वह गर्भवती पत्नी सीमा को लेकर जिला महिला अस्पताल गए थे। वहां ऑपरेशन के नाम पर पांच हजार रुपये की मांग की गई। रुपये देने से मना करने पर अस्पताल में बताया गया कि मरीज के शरीर में खून की कमी है और बाद में लेकर आने के लिए कहा गया। इसके बाद वह सीमा को लेकर घर आ गए। कुछ देर बाद सीमा को तेज दर्द होने लगा तो परिजन उन्हें एक निजी अस्पताल ले गए, जहां उसका प्रसव कराया।
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अस्पताल में किसी मरीज को कोई रुपये नहीं देने होते हैं। ऐसा कोई मामला संज्ञान में नहीं है। यदि किसी ने मरीज से रुपये लिए हैं तो मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. अमित कुमार गुप्ता, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल
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परिजनों का कहना है कि मरीज की हालत गंभीर बताकर रेफर करने का डर दिखाया जाता है, जबकि सुविधा शुल्क मिलने के बाद अस्पताल में ही ऑपरेशन और प्रसव करा दिए जाते हैं।
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जिला महिला अस्पताल में हर माह करीब 700 से 800 सामान्य प्रसव और 80 से 100 ऑपरेशन किए जाते हैं। आरोप है कि ऑपरेशन के नाम पर प्रति केस चार से पांच हजार रुपये तक लिए जाते हैं। इस हिसाब से हर महीने लाखों रुपये की अवैध वसूली होने की बात कही जा रही है।
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परिजनों का आरोप है कि कुछ आशा कार्यकर्ता और कथित दलाल लेबर रूम के बाहर सक्रिय रहते हैं। वे तीमारदारों को प्रसूता की जान का खतरा बताकर डराते हैं और फिर चार से पांच हजार रुपये की मांग करते हैं।
आरोप है कि किसी चिकित्सक का नाम सीधे सामने न आए, इसलिए वसूली कथित तौर पर बिचौलियों के माध्यम से कराई जाती है। मामले की शिकायतें पहले भी हो चुकी हैं, लेकिन आरोपों के मुताबिक यह सिलसिला जारी है।
केस : 1
पांच हजार रुपये मिलने के बाद हुआ ऑपरेशन
शहर के गौटेय्याबाग निवासी अफजल ने बताया कि वह 12 दिसंबर को पत्नी आफरीन के प्रसव के लिए जिला महिला अस्पताल पहुंचे थे। आरोप है कि वहां मौजूद स्टाफ ने ब्लड प्रेशर कम होने सहित अन्य समस्याएं बताकर उन्हें रेफर कर दिया। अफजल का कहना है कि 15 दिसंबर को एक कथित दलाल को पांच हजार रुपये देने के बाद उनकी पत्नी का ऑपरेशन अस्पताल में ही कर दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बाद में उनसे एक कागज पर पैसा न देने की बात लिखवाई गई।
केस-2
नहीं दिए रुपये तो बता दी खून की कमी
शहर के रामापुर निवासी शिवम वर्मा ने बताया कि 18 अप्रैल को वह गर्भवती पत्नी सीमा को लेकर जिला महिला अस्पताल गए थे। वहां ऑपरेशन के नाम पर पांच हजार रुपये की मांग की गई। रुपये देने से मना करने पर अस्पताल में बताया गया कि मरीज के शरीर में खून की कमी है और बाद में लेकर आने के लिए कहा गया। इसके बाद वह सीमा को लेकर घर आ गए। कुछ देर बाद सीमा को तेज दर्द होने लगा तो परिजन उन्हें एक निजी अस्पताल ले गए, जहां उसका प्रसव कराया।
अस्पताल में किसी मरीज को कोई रुपये नहीं देने होते हैं। ऐसा कोई मामला संज्ञान में नहीं है। यदि किसी ने मरीज से रुपये लिए हैं तो मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. अमित कुमार गुप्ता, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल