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जर्जर स्कूल भवनों के ध्वस्तीकरण से पहले फिर होगा मूल्यांकन
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लखीमपुर खीरी। बेसिक शिक्षा विभाग के जर्जर स्कूल भवनों के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया लंबे समय से लंबित थी, जिसमें अब तेजी आई है। डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड के सभी सहायक अभियंताओं को जर्जर भवनों की तकनीकी जांच, मूल्यांकन समेत कंप्यूटेट वैल्यू आदि बिंदुओं पर 20 जनवरी 2021 तक रिपोर्ट मांगी है। इसके बाद जर्जर भवनों को ध्वस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
जनपद में 709 परिषदीय विद्यालयों के पुराने भवन कई साल पहले जर्जर और निष्प्रयोज्य घोषित किए जा चुके हैं, जिन्हें अभी तक ध्वस्त नहीं किया जा सका है। इससे विद्यालयों में जर्जर भवन के गिरने की घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं, जिसमें बच्चों की जान जोखिम में पड़ चुकी है। वहीं परिषदीय विद्यालयों के कायाकल्प को लेकर अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन पहले से जर्जर घोषित भवनों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई दशकों से लंबित है। इस दौरान शासन ने कई बार ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया में बदलाव भी किया, लेकिन मामला जांच तक सीमित रहा। पहले से बनी कमेटी को भंग करके नए शासनादेश के मुताबिक नई कमेटी सितंबर 2020 में बनाई गई। इसमें ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के एक्सईएन की अध्यक्षता में एई प्रांतीय खंड और एई लघु सिंचाई को सदस्य बनाया गया। कमेटी को जर्जर भवनों का मूल्यांकन करके कंप्यूटेट वैल्यू आख्या डीएम के समक्ष प्रस्तुत करनी थी, लेकिन इसके बाद फिर से कमेटी में बदलाव करते हुए पीडब्ल्यूडी को शामिल किया गया है। डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने कमेटी की बैठक में पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड के सभी एई को जर्जर भवनों की जांच-मूल्यांकन करने के निर्देश दिए हैं।
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स्कूलों के जर्जर भवनों को ध्वस्त करने के लिए डीएम की अध्यक्षता में कमेटी की बैठक कराई गई है, जिसमें डीएम ने जर्जर भवनों का नए सिरे से मूल्यांकन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश सहायक अभियंताओं को दिए हैं। एई की रिपोर्ट आने के बाद जर्जर भवनों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।
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-बुद्ध प्रिय सिंह, बीएसए
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जनपद में 709 परिषदीय विद्यालयों के पुराने भवन कई साल पहले जर्जर और निष्प्रयोज्य घोषित किए जा चुके हैं, जिन्हें अभी तक ध्वस्त नहीं किया जा सका है। इससे विद्यालयों में जर्जर भवन के गिरने की घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं, जिसमें बच्चों की जान जोखिम में पड़ चुकी है। वहीं परिषदीय विद्यालयों के कायाकल्प को लेकर अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन पहले से जर्जर घोषित भवनों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई दशकों से लंबित है। इस दौरान शासन ने कई बार ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया में बदलाव भी किया, लेकिन मामला जांच तक सीमित रहा। पहले से बनी कमेटी को भंग करके नए शासनादेश के मुताबिक नई कमेटी सितंबर 2020 में बनाई गई। इसमें ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के एक्सईएन की अध्यक्षता में एई प्रांतीय खंड और एई लघु सिंचाई को सदस्य बनाया गया। कमेटी को जर्जर भवनों का मूल्यांकन करके कंप्यूटेट वैल्यू आख्या डीएम के समक्ष प्रस्तुत करनी थी, लेकिन इसके बाद फिर से कमेटी में बदलाव करते हुए पीडब्ल्यूडी को शामिल किया गया है। डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने कमेटी की बैठक में पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड के सभी एई को जर्जर भवनों की जांच-मूल्यांकन करने के निर्देश दिए हैं।
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स्कूलों के जर्जर भवनों को ध्वस्त करने के लिए डीएम की अध्यक्षता में कमेटी की बैठक कराई गई है, जिसमें डीएम ने जर्जर भवनों का नए सिरे से मूल्यांकन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश सहायक अभियंताओं को दिए हैं। एई की रिपोर्ट आने के बाद जर्जर भवनों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।
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-बुद्ध प्रिय सिंह, बीएसए