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नवनियुक्त शिक्षकों को सिखाया बच्चों को पढ़ाने का सलीका
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लखीमपुर जीआईसी में नवनियुक्त शिक्षकों को प्रशिक्षण देते एसके अग्रवाल। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। राजकीय इंटर कॉलेज में बुधवार को नवनियुक्त शिक्षकों की प्रशिक्षण कार्यशाला हुई। इसमें जिले भर के राजकीय हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट कॉलेज में ज्वाइनिंग लेने वाले शिक्षक शामिल हुए। शिक्षकों को अनुशासन, अभिभावकों से सामंजस्य बनाने एवं बच्चों में पढ़ाई के प्रति रूचि पैदा कर पढ़ाने का प्रशिक्षण दिया गया।
जिले के राजकीय स्कूलों को 83 नए शिक्षक मिले हैं। इन शिक्षकों को स्कूल में अनुशासन बनाए रखने, पढ़ाने और विभागीय संरचना के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। प्रधानाचार्य डॉ. कमलेश सक्सेना ने कहा कि अभिभावक एक अबोध बालक आपके सुपुर्द करता है, जिसे जिम्मेदार नागरिक बनाने का दायित्व शिक्षक का है। एक शिक्षक को छात्र, अभिभावक और बच्चों के साथ सामंजस्य बनाकर शिक्षण कार्य करना है। विनोद कुमार ने शिक्षकों को शिक्षक जीवन में अनुशासन, स्वच्छता पर्यावरण एवं पठन सहगामी क्रिया कलापों की जानकारी दी। किरनलता वर्मा ने कहा कि एक कुशल शिक्षक वह है जो अभिभावक, छात्र, अभिभावक एवं प्रधानाचार्य के साथ बेहतर संबंध रखने की प्रेरणा दी। जीआईसी प्रधानाचार्य डॉ. आरके आर्य ने कहा कि एक कुशल शिक्षक वही है जो कक्षा में कमजोर छात्रों को चिह्नित कर उन्हें उपचारात्मक शिक्षा देकर शिक्षित करे। रिटायर्ड शिक्षक एसके अग्रवाल ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि क्लासरूप में पहले बच्चों की मनोदशा समझें और उसके अनुसार उन्हें पढ़ाएं, क्योंकि हर बच्चे की सोचने, समझने एवं याद करने की क्षमता अलग अलग होती है। कुछ बच्चों को जल्दी याद होता है तो कुछ को देर से। प्रशिक्षण कार्यशाला में नवनियुक्त 83 शिक्षक शिक्षिकाएं मौजूद रहे। संवाद
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जिले के राजकीय स्कूलों को 83 नए शिक्षक मिले हैं। इन शिक्षकों को स्कूल में अनुशासन बनाए रखने, पढ़ाने और विभागीय संरचना के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। प्रधानाचार्य डॉ. कमलेश सक्सेना ने कहा कि अभिभावक एक अबोध बालक आपके सुपुर्द करता है, जिसे जिम्मेदार नागरिक बनाने का दायित्व शिक्षक का है। एक शिक्षक को छात्र, अभिभावक और बच्चों के साथ सामंजस्य बनाकर शिक्षण कार्य करना है। विनोद कुमार ने शिक्षकों को शिक्षक जीवन में अनुशासन, स्वच्छता पर्यावरण एवं पठन सहगामी क्रिया कलापों की जानकारी दी। किरनलता वर्मा ने कहा कि एक कुशल शिक्षक वह है जो अभिभावक, छात्र, अभिभावक एवं प्रधानाचार्य के साथ बेहतर संबंध रखने की प्रेरणा दी। जीआईसी प्रधानाचार्य डॉ. आरके आर्य ने कहा कि एक कुशल शिक्षक वही है जो कक्षा में कमजोर छात्रों को चिह्नित कर उन्हें उपचारात्मक शिक्षा देकर शिक्षित करे। रिटायर्ड शिक्षक एसके अग्रवाल ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि क्लासरूप में पहले बच्चों की मनोदशा समझें और उसके अनुसार उन्हें पढ़ाएं, क्योंकि हर बच्चे की सोचने, समझने एवं याद करने की क्षमता अलग अलग होती है। कुछ बच्चों को जल्दी याद होता है तो कुछ को देर से। प्रशिक्षण कार्यशाला में नवनियुक्त 83 शिक्षक शिक्षिकाएं मौजूद रहे। संवाद
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