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संस्कृत के लिए उपयोगी है कम्प्यूटर : डॉ. मदन मोहन
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लखीमपुर खीरी। भगवान दीन आर्य कन्या डिग्री कॉलेज में संस्कृत विभाग एवं संस्कृत साहित्य परिषद की ओर से तीन दिवसीय राष्ट्रीय प्राविधिक संस्कृत शैक्षिक उपकरण निर्माण कार्यशाला एवं संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। इसमें जम्मू की राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान (मानित विश्वविद्यालय) के डॉ.मदन मोहन झा ने कहा कि संस्कृत संगणक (कंप्यूटर) के लिए नहीं बल्कि संगणक भी संस्कृत के लिए उपयोगी है।
कार्यशाला का उद्घाटन प्रोफसेर एवं मुख्य अतिथि डॉ.मदन मोहन झा ने मां सरस्वती का पूजन कर किया। कार्यशाला में संस्कृत के विविध विषयों के अध्यापन में संगणक का उपयोग, मोबाइल पर संस्कृत शिक्षण, संस्कृति विकीपीडिया का उपयोग, अपलोडिंग, संस्कृत शिक्षण हेतु विभिन्न संसाधन, बैनर पोस्टर एवं व्यंग्य चित्र का निर्माण आदि विषयों पर प्रतिभागियों के शोध पत्र प्रस्तुत पढ़े। गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. कुलदीप शुक्ल ने कहा कि वर्तमान समय में प्रत्येक विषय के अध्ययन और अध्यापन में संगणक का विशेष महत्व है, जिसमें कार्यशालाएं अपना अलग स्थान रखती हैं। प्राचार्य डॉ. सुरचना त्रिवेदी ने कहा कि आधुनिक जीवन शैली में शामिल होने के लिए प्राचीनतम संस्कृत भाषा को कंप्यूटर से जोड़ने की आवश्यकता है। संचालन गीता शुक्ला ने किया। गोष्ठी में महाविद्यालय की प्रोफेसर एवं स्टाफ मौजूद रहा।
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कार्यशाला का उद्घाटन प्रोफसेर एवं मुख्य अतिथि डॉ.मदन मोहन झा ने मां सरस्वती का पूजन कर किया। कार्यशाला में संस्कृत के विविध विषयों के अध्यापन में संगणक का उपयोग, मोबाइल पर संस्कृत शिक्षण, संस्कृति विकीपीडिया का उपयोग, अपलोडिंग, संस्कृत शिक्षण हेतु विभिन्न संसाधन, बैनर पोस्टर एवं व्यंग्य चित्र का निर्माण आदि विषयों पर प्रतिभागियों के शोध पत्र प्रस्तुत पढ़े। गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. कुलदीप शुक्ल ने कहा कि वर्तमान समय में प्रत्येक विषय के अध्ययन और अध्यापन में संगणक का विशेष महत्व है, जिसमें कार्यशालाएं अपना अलग स्थान रखती हैं। प्राचार्य डॉ. सुरचना त्रिवेदी ने कहा कि आधुनिक जीवन शैली में शामिल होने के लिए प्राचीनतम संस्कृत भाषा को कंप्यूटर से जोड़ने की आवश्यकता है। संचालन गीता शुक्ला ने किया। गोष्ठी में महाविद्यालय की प्रोफेसर एवं स्टाफ मौजूद रहा।
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