{"_id":"69e3dab557e40e8602000a47","slug":"dust-mites-pose-a-problem-with-150-patients-reaching-the-hospital-daily-lakhimpur-news-c-120-1-lkh1011-172599-2026-04-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lakhimpur Kheri News: धूल के सूक्ष्म कीड़े बने मुसीबत, 150 मरीज रोज पहुंच रहे अस्पताल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lakhimpur Kheri News: धूल के सूक्ष्म कीड़े बने मुसीबत, 150 मरीज रोज पहुंच रहे अस्पताल
Sun, 19 Apr 2026 12:55 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sun, 19 Apr 2026 12:55 AM IST
विज्ञापन
लखीमपुर खीरी। मौसम में बढ़ती नमी और बंद कमरों के वातावरण के कारण जिले में डस्ट माइट (धूल के सूक्ष्म कीड़े) का प्रकोप बढ़ गया है। इसके चलते एलर्जी, छींक, खांसी और अस्थमा के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं।
जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 150 मरीज नाक की एलर्जी की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं, जिनमें 30 से 40 बच्चे भी शामिल हैं। चिकित्सकों के अनुसार, हाल के दिनों में ऐसे मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है।
मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. मनोज शर्मा ने बताया कि डस्ट माइट बेहद सूक्ष्म कीट होते हैं, जिन्हें आंखों से नहीं देखा जा सकता। ये पुराने गद्दों, तकियों, कालीनों, सोफे के कवर और भारी पर्दों में पनपते हैं, जहां धूल अधिक जमा रहती है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि डस्ट माइट के मल और मृत कण हवा में मिलकर सांस के जरिये शरीर में प्रवेश करते हैं, जिससे एलर्जी और श्वसन संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं। नमी और बंद वातावरण इनके पनपने के लिए अनुकूल स्थिति बनाते हैं।
-- -- -- -- -
बचाव के उपाय
घर की नियमित साफ-सफाई रखें
बिस्तर की चादर व तकिया कवर हर सप्ताह गर्म पानी से धोएं
घर में पर्याप्त वेंटिलेशन रखें और नमी कम करें
गद्दे व कालीन समय-समय पर धूप में रखें
सफाई के दौरान मास्क का उपयोग करें और वैक्यूम क्लीनर का इस्तेमाल करें
विज्ञापन
जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 150 मरीज नाक की एलर्जी की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं, जिनमें 30 से 40 बच्चे भी शामिल हैं। चिकित्सकों के अनुसार, हाल के दिनों में ऐसे मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है।
विज्ञापन
मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. मनोज शर्मा ने बताया कि डस्ट माइट बेहद सूक्ष्म कीट होते हैं, जिन्हें आंखों से नहीं देखा जा सकता। ये पुराने गद्दों, तकियों, कालीनों, सोफे के कवर और भारी पर्दों में पनपते हैं, जहां धूल अधिक जमा रहती है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि डस्ट माइट के मल और मृत कण हवा में मिलकर सांस के जरिये शरीर में प्रवेश करते हैं, जिससे एलर्जी और श्वसन संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं। नमी और बंद वातावरण इनके पनपने के लिए अनुकूल स्थिति बनाते हैं।
बचाव के उपाय
घर की नियमित साफ-सफाई रखें
बिस्तर की चादर व तकिया कवर हर सप्ताह गर्म पानी से धोएं
घर में पर्याप्त वेंटिलेशन रखें और नमी कम करें
गद्दे व कालीन समय-समय पर धूप में रखें
सफाई के दौरान मास्क का उपयोग करें और वैक्यूम क्लीनर का इस्तेमाल करें