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कोरोनाकाल में मां की मूर्तियां बनाने वाले मायूस
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मां काली की मूर्ति के साथ मूर्तिकार नरेंद्र कुमार और नीरज कुमार। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। शारदीय नवरात्र 17 अक्तूबर से प्रारंभ हो रहे हैं, लेकिन कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच इस बार दुर्गा पूजा को लेकर सामूहिक आयोजन नहीं होंगे। मां के भक्त घर पर ही मूर्ति स्थापित कर पूजन कर सकेंगे। ऐसे में मां दुर्गा की मूर्तियां बनाने वालों में भी मायूसी है।
दुर्गा पूजा पर हर साल जिले भर में कई जगह पंडाल लगते थे। भक्त मां दुर्गा की मूर्ति स्थापित कर नौ दिनों तक विधि विधान से पूजन करते थे। इसके लिए मूर्तियां बनवाते थे। मगर, कोरोना काल में सामूहिक कार्यक्रम पर रोक होने के कारण इस बार नवरात्र में धार्मिक आयोजन होना मुमकिन नहीं है। इसलिए इस बार मूर्ति बनाने का आर्डर न मिलने से कारीगर खाली बैठे हैं। कारीगरों का कहना है कि इस साल धंधा पूरी तरह से चौपट हो गया। न तो सार्वजनिक रूप से गणेश चतुर्थी मनाई गई और न ही अब दुर्गा पूजन होगा।
गोला गोकर्णनाथ। नगर क्षेत्र में दर्जनों मूर्तिकार हैं जिनके हाथों से बनी मूर्तियों से नवरात्र में माता रानी के दरबार सजते रहे हैं, लेकिन इस बार करोना संकटकाल में सार्वजनिक रूप से सभी धार्मिक आयोजनों पर पाबंदी है, ऐसे में मूर्तिकार काफी मायूस हैं। नगर के मोहल्ला कुम्हारन टोला निवासी मूर्तिकार नरेंद्र कुमार, नीरज कुमार, मुन्नूगंज निवासी हरद्वारीलाल शर्मा का कहना है कि श्रद्धालुओं ने केवल घरों में स्थापना के लिए मूर्तियों का आर्डर दिया है लेकिन बड़े आयोजन बंद है, जिनके सहारे अच्छा कारोबार होता था।
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परीक्षा की घड़ी है मातारानी जल्द सब ठीक करेंगी
मोहल्ला कुम्हारन टोला निवासी मूर्तिकार नरेंद्र कुमार और उसके चचेरे भाई नीरज कुमार का कहना है कि वह बचपन से ही मूर्तियां बनाने का काम करते हैं। प्रति वर्ष 40 से 50 मिट्टी और 20 से 25 मसाले से निर्मित मूर्तियों के आर्डर आते थे। इस वर्ष कोरोना के कारण आयोजन पर प्रतिबंध है। इसलिए घरों में माता रानी की चौकी स्थापित करने के लिए श्रद्धालुओं ने ऑर्डर दिए हैं, उन्हीं का काम कर रहे हैं। हालांकि काम काफी प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि यह परीक्षा की घड़ी है। माता रानी बड़ी दयालु हैं, जल्द ही सब कुछ ठीक करेंगी।
खीरी टाउन। कस्बे में करीब आधा दर्जन मिट्टी से मूर्ति बनाने वाले कारीगर इस बार खाली हैं। मूर्तिकार प्रकाश, कामनाथ एवं विश्वराम का कहना है कि कोरोना के कारण सामूहिक कार्यक्रम प्रतिबंधित होने के कारण मूर्ति बनाने का आर्डर नहीं मिला है। जबकि पिछले सालों में दर्जनों मूर्तियां बनाने के ऑर्डर मिलते थे। मूर्ति बनाने का काम करने वाले रमेश चंद्र ने बताया कि कोरोना माहमारी ने कामधाम ठप कर दिया। कारीगिरी पर ग्रहण लग गया। यदि ऐसा माहौल कुछ माह और रहा तो मिट्टी से मूर्ति बनाने वाले कारीगर भुखमरी की कगार पर आ जाएंगे ।
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दुर्गा पूजा पर हर साल जिले भर में कई जगह पंडाल लगते थे। भक्त मां दुर्गा की मूर्ति स्थापित कर नौ दिनों तक विधि विधान से पूजन करते थे। इसके लिए मूर्तियां बनवाते थे। मगर, कोरोना काल में सामूहिक कार्यक्रम पर रोक होने के कारण इस बार नवरात्र में धार्मिक आयोजन होना मुमकिन नहीं है। इसलिए इस बार मूर्ति बनाने का आर्डर न मिलने से कारीगर खाली बैठे हैं। कारीगरों का कहना है कि इस साल धंधा पूरी तरह से चौपट हो गया। न तो सार्वजनिक रूप से गणेश चतुर्थी मनाई गई और न ही अब दुर्गा पूजन होगा।
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गोला गोकर्णनाथ। नगर क्षेत्र में दर्जनों मूर्तिकार हैं जिनके हाथों से बनी मूर्तियों से नवरात्र में माता रानी के दरबार सजते रहे हैं, लेकिन इस बार करोना संकटकाल में सार्वजनिक रूप से सभी धार्मिक आयोजनों पर पाबंदी है, ऐसे में मूर्तिकार काफी मायूस हैं। नगर के मोहल्ला कुम्हारन टोला निवासी मूर्तिकार नरेंद्र कुमार, नीरज कुमार, मुन्नूगंज निवासी हरद्वारीलाल शर्मा का कहना है कि श्रद्धालुओं ने केवल घरों में स्थापना के लिए मूर्तियों का आर्डर दिया है लेकिन बड़े आयोजन बंद है, जिनके सहारे अच्छा कारोबार होता था।
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मोहल्ला कुम्हारन टोला निवासी मूर्तिकार नरेंद्र कुमार और उसके चचेरे भाई नीरज कुमार का कहना है कि वह बचपन से ही मूर्तियां बनाने का काम करते हैं। प्रति वर्ष 40 से 50 मिट्टी और 20 से 25 मसाले से निर्मित मूर्तियों के आर्डर आते थे। इस वर्ष कोरोना के कारण आयोजन पर प्रतिबंध है। इसलिए घरों में माता रानी की चौकी स्थापित करने के लिए श्रद्धालुओं ने ऑर्डर दिए हैं, उन्हीं का काम कर रहे हैं। हालांकि काम काफी प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि यह परीक्षा की घड़ी है। माता रानी बड़ी दयालु हैं, जल्द ही सब कुछ ठीक करेंगी।
खीरी टाउन। कस्बे में करीब आधा दर्जन मिट्टी से मूर्ति बनाने वाले कारीगर इस बार खाली हैं। मूर्तिकार प्रकाश, कामनाथ एवं विश्वराम का कहना है कि कोरोना के कारण सामूहिक कार्यक्रम प्रतिबंधित होने के कारण मूर्ति बनाने का आर्डर नहीं मिला है। जबकि पिछले सालों में दर्जनों मूर्तियां बनाने के ऑर्डर मिलते थे। मूर्ति बनाने का काम करने वाले रमेश चंद्र ने बताया कि कोरोना माहमारी ने कामधाम ठप कर दिया। कारीगिरी पर ग्रहण लग गया। यदि ऐसा माहौल कुछ माह और रहा तो मिट्टी से मूर्ति बनाने वाले कारीगर भुखमरी की कगार पर आ जाएंगे ।