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Lakhimpur Kheri News: अनदेखी से सई नदी के उद्गम स्थल का पानी सूखा
Sun, 22 Jun 2025 11:35 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sun, 22 Jun 2025 11:35 PM IST
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जल विहीन सई नदी का उद्गम स्थल। संवाद
पसगवां। सरकारी सिस्टम और अजबापुर चीनी मिल फाउंडेशन की अनदेखी से सई नदी के उद्गम स्थल का पानी सूख गया है। इससे यहां प्रवासी पक्षियों को भोजन और पानी नहीं मिल पा रहा है। वेटलैंड का स्वरूप बिगड़ गया है।
विकास खंड पसगवां के गांव अल्लीपुर, पनई मस्तीपुर और बरखेरिया जाट के मध्य सैकड़ों एकड़ झाबर है। इसी को सई नदी का उद्गम स्थल कहा जाता है। सई नदी के उद्गम स्थल का जीर्णोद्धार और सुंदरीकरण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ड्रीम प्रोजेक्ट है।
पर्यावरण प्रेमी हरेंद्र वर्मा का कहना है कि तीन वर्ष पूर्व तक यह स्थल एक वेटलैंड रहा है। तीन वर्ष पूर्व इसमें सारस के सैकड़ों घोसले थे। इसकी जैवविविधता बहुत समृद्ध थी। सारस व अन्य प्रवासी पक्षियों के भोजन, पानी की जरूरत यहीं से पूरी होती थी, लेकिन चीनी मिल ने जेसीबी मशीन से अनधिकृत रूप से गहरी खोदाई करा दी।
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इसके कारण वेटलैंड की यह स्थिति हो गई कि न तो इसमें एक बूंद पानी बचा है और न ही कोई पक्षी रही नजर आ रहा है। यह जल एवं पर्यावरण संरक्षण के नाम पर संवेदनहीनता का प्रत्यक्ष उदाहरण है। हरेंद्र वर्मा का आरोप है कि सई नदी के उद्गम स्थल को बचाने और सुंदरीकरण के लिए अनेक बार अधिकारियों से बात हुई निरीक्षण हुआ, लेकिन कोई हल नहीं निकला।
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विकास खंड पसगवां के गांव अल्लीपुर, पनई मस्तीपुर और बरखेरिया जाट के मध्य सैकड़ों एकड़ झाबर है। इसी को सई नदी का उद्गम स्थल कहा जाता है। सई नदी के उद्गम स्थल का जीर्णोद्धार और सुंदरीकरण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ड्रीम प्रोजेक्ट है।
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पर्यावरण प्रेमी हरेंद्र वर्मा का कहना है कि तीन वर्ष पूर्व तक यह स्थल एक वेटलैंड रहा है। तीन वर्ष पूर्व इसमें सारस के सैकड़ों घोसले थे। इसकी जैवविविधता बहुत समृद्ध थी। सारस व अन्य प्रवासी पक्षियों के भोजन, पानी की जरूरत यहीं से पूरी होती थी, लेकिन चीनी मिल ने जेसीबी मशीन से अनधिकृत रूप से गहरी खोदाई करा दी।
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इसके कारण वेटलैंड की यह स्थिति हो गई कि न तो इसमें एक बूंद पानी बचा है और न ही कोई पक्षी रही नजर आ रहा है। यह जल एवं पर्यावरण संरक्षण के नाम पर संवेदनहीनता का प्रत्यक्ष उदाहरण है। हरेंद्र वर्मा का आरोप है कि सई नदी के उद्गम स्थल को बचाने और सुंदरीकरण के लिए अनेक बार अधिकारियों से बात हुई निरीक्षण हुआ, लेकिन कोई हल नहीं निकला।