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Lakhimpur Kheri News: कहां-कहां दिखा बाघ, लेखा-जोखा रखेगा दुधवा टाइगर रिजर्व
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दुधवा में बाघिन को दुलार करते शावक। स्त्रोत। वन विभाग।
बांकेगंज। दुधवा में पर्यटन सत्र के दौरान बाघों के दीदार होने पर इसका लेखा-जोखा रखा जा रहा है। इसके लिए सैलानियों, गाइड और जिप्सी चालकों के लिए दुधवा पर्यटन परिसर के बुकिंग काउंटर पर साइटिंग रजिस्टर रखा गया है। किस जगह पर कहां बाघ दिखा, इसकी जानकारी यहां दर्ज की जाएगी।
दुधवा नेशनल पार्क में किशनपुर सेंक्चुरी, दक्षिण सोनारीपुर रेंज को प्रमुख पर्यटन स्थल माना जाता है। यहां हरे-भरे जंगलों के बीच बने जलाशय और कच्ची सड़क बाघों का पसंदीदा प्राकृतवास है। झादीताल के किनारे बाघ, बाघिन और उनके शावकों को विचरण करते देख यहां देश-विदेश से जंगल सफारी का लुत्फ लेने आने वाले सैलानियों की बांछें खिल जाती हैं।
दुधवा के घने जंगलों की समृद्ध जैव विविधता, प्राकृतिक सौंदर्य, हरे-भरे घास के मैदान यहां की खासियत हैं। घनी झाड़ियां और अनुकूल वातावरण होने की वजह से यहां बाघ समेत कुलाचे भरते पांच प्रजातियों के हिरन समेत अन्य वन्यजीवों की संख्या अन्य टाइगर रिजर्व के सापेक्ष बेहतर है।
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दुधवा में पर्यटन सत्र के दौरान देश-विदेश से जंगल सफारी करने आने वाले सैलानियों को बाघों के खूब दीदार होते हैं। वर्ष 2023-24 के पर्यटन सत्र में सैलानियों की संख्या ने पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए। पिछले सत्र में यहां 64753 सैलानी जंगल सफारी के लिए पहुंचे। इसमें 64401 देशी और 352 विदेशी सैलानियों ने जंगल सफरी का आनंद लिया था।
दुधवा टाइगर रिजर्व के एफडी ललित कुमार वर्मा ने बताया कि टाइगर रिजर्व प्रशासन पर्यटन सत्र में जंगल सफारी के दौरान बाघों को देखे जाने का आंकड़ा दर्ज कर रहा है। इससे पता चल सकेगा कि किन जगहों पर बाघ सबसे ज्यादा दिखते हैं।
किशनपुर सेंक्चुरी में मशहूर है पचराहा और बेलडंडा मार्ग
दुधवा में पर्यटन सत्र के दौरान यहां जंगल सफारी करने आने वाले सैलानियों की पहली पसंद पचराहा और बेलडंडा मार्ग रहता है। इन दोनों मार्गों पर बाघों की अधिक साइटिंग होती है। गर्मी के दौरान यहां जंगल के अंदर बने पक्के और कच्चे वाटर होल्स के किनारे बाघ, बाघिन और शावक अक्सर दिखाई देते हैं। इसके अलावा दक्षिण सोनारीपुर रेंज के एसडी सिंह मार्ग, स्टेशन सड़क और बांकेताल के किनारे सैलानियों को बाघ विचरण करते दिख रहे हैं।
इस साल भी खूब हो रहे बाघों के दीदार
दुधवा का पर्यटन सत्र 6 नवंबर को शुरू हुआ था। पहले ही दिन किशनपुर सेंक्चुरी में सैलानियों को कई जगह बाघ विचरण करते दिखाई दिए। इस सत्र में तो आलम यह है कि दुधवा शुरुआती दौर से ही पर्यटकों की भीड़ से गुलजार है।
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दुधवा नेशनल पार्क में किशनपुर सेंक्चुरी, दक्षिण सोनारीपुर रेंज को प्रमुख पर्यटन स्थल माना जाता है। यहां हरे-भरे जंगलों के बीच बने जलाशय और कच्ची सड़क बाघों का पसंदीदा प्राकृतवास है। झादीताल के किनारे बाघ, बाघिन और उनके शावकों को विचरण करते देख यहां देश-विदेश से जंगल सफारी का लुत्फ लेने आने वाले सैलानियों की बांछें खिल जाती हैं।
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दुधवा के घने जंगलों की समृद्ध जैव विविधता, प्राकृतिक सौंदर्य, हरे-भरे घास के मैदान यहां की खासियत हैं। घनी झाड़ियां और अनुकूल वातावरण होने की वजह से यहां बाघ समेत कुलाचे भरते पांच प्रजातियों के हिरन समेत अन्य वन्यजीवों की संख्या अन्य टाइगर रिजर्व के सापेक्ष बेहतर है।
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दुधवा में पर्यटन सत्र के दौरान देश-विदेश से जंगल सफारी करने आने वाले सैलानियों को बाघों के खूब दीदार होते हैं। वर्ष 2023-24 के पर्यटन सत्र में सैलानियों की संख्या ने पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए। पिछले सत्र में यहां 64753 सैलानी जंगल सफारी के लिए पहुंचे। इसमें 64401 देशी और 352 विदेशी सैलानियों ने जंगल सफरी का आनंद लिया था।
दुधवा टाइगर रिजर्व के एफडी ललित कुमार वर्मा ने बताया कि टाइगर रिजर्व प्रशासन पर्यटन सत्र में जंगल सफारी के दौरान बाघों को देखे जाने का आंकड़ा दर्ज कर रहा है। इससे पता चल सकेगा कि किन जगहों पर बाघ सबसे ज्यादा दिखते हैं।
किशनपुर सेंक्चुरी में मशहूर है पचराहा और बेलडंडा मार्ग
दुधवा में पर्यटन सत्र के दौरान यहां जंगल सफारी करने आने वाले सैलानियों की पहली पसंद पचराहा और बेलडंडा मार्ग रहता है। इन दोनों मार्गों पर बाघों की अधिक साइटिंग होती है। गर्मी के दौरान यहां जंगल के अंदर बने पक्के और कच्चे वाटर होल्स के किनारे बाघ, बाघिन और शावक अक्सर दिखाई देते हैं। इसके अलावा दक्षिण सोनारीपुर रेंज के एसडी सिंह मार्ग, स्टेशन सड़क और बांकेताल के किनारे सैलानियों को बाघ विचरण करते दिख रहे हैं।
इस साल भी खूब हो रहे बाघों के दीदार
दुधवा का पर्यटन सत्र 6 नवंबर को शुरू हुआ था। पहले ही दिन किशनपुर सेंक्चुरी में सैलानियों को कई जगह बाघ विचरण करते दिखाई दिए। इस सत्र में तो आलम यह है कि दुधवा शुरुआती दौर से ही पर्यटकों की भीड़ से गुलजार है।