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प्रवासी परिंदों के लिए जन्नत से कम नहीं दुधवा के जलाशय

Mon, 29 Nov 2021 12:09 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 29 Nov 2021 12:09 AM IST
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Dudhwa's reservoir is no less than paradise for migratory birds
दुधवा के जलाशय में कलरव करते विदेशी परिंदे।
किशनपुर सेंक्चुरी का झादीताल और नगरिया झील मेहमान पक्षियों से गुलजार
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बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। दुधवा के हरे-भरे जंगलों के बीच स्थित किशनपुर सेंक्चुरी के झादीताल के अलावा भादीताल, नगरिया झील समेत सभी जलाशय इन दिनों प्रवासी पक्षियों से गुलजार हैं।
पक्षी प्रेमी और पक्षी विशेषज्ञों ने झीलों के इर्दगिर्द डेरा डाल दिया है। कई पक्षी विशेषज्ञ झील के किनारे दूरबीन के जरिए पक्षियों की गतिविधियों और उनकी जीवन शैली का अध्ययन कर रहे हैं। दुधवा की झीलें और जलाशय प्रवासी पक्षियों के लिए स्वर्ग माने जाते हैं। यहां बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी आकर सर्दियों के मौसम में बसेरा करते हैं। झादीताल के किनारे घनी झाड़ियां और उसके पीछे ऊंचे पेड़ प्रवासी पक्षियों को अनुकूल आवास और भोजन उपलब्ध कराते हैं। सर्दी के मौसम में यहां का प्राकृतिक सौंदर्य सैलानियों को आकर्षित करता है। इस प्राकृतिक सौंदर्य को देखने के लिए वन विभाग ने झीलों के आसपास वॉच टावर भी बना रखे हैं। इन वॉच टावरों से झीलों और जलाशयों में कलरव करने वाले रंग-बिरंगे पक्षियों को देखकर आनंद उठा रहे हैं।
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प्रवासी परिंदों के आने पर जहां पक्षी प्रेमी खुश होते हैं और पक्षियों का अध्ययन करने का उन्हें अवसर मिलता है, वहीं शिकारी भी इस दौरान सक्रिय हो जाते हैं। हालांकि वन विभाग की सुरक्षा और सतर्कता के चलते शिकारी अपने मकसद में बहुत कम कामयाब हो पाते हैं।
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बांकेगंज कस्बा के पक्षी प्रेमियों विनोद गोयल, हरीकिशन अग्रवाल, गोल्डी गोयल आदि का कहना है कि सर्दियों के मौसम में हजारों किलोमीटर की दूरी से नगरिया झील सहित दुधवा और जिले के अन्य जलाशयों में आने वाले रंग-बिरंगे प्रवासी परिंदों की सुरक्षा और निगरानी वन विभाग के साथ ही स्थानीय लोगों को भी करनी चाहिए, जिससे इनका शिकार न हो सके। तीन महीने रुककर यहां प्रवास करने वाले पक्षी प्रजनन करते हैं और गर्मियों की शुुरूआत होते ही उड़ने लायक चूजे होने पर वह उन्हें साथ लेकर अपने वतन रवाना हो जाते हैं। (संवाद)

मेहमान पक्षियों की सुरक्षा के लिए कड़े बंदोबस्त किए गए हैं। झादीताल, भादीताल समेत दुधवा टाइगर रिजर्व के सभी जलाशयों की निगरानी को वन विभाग की टीमें तैयार की गईं हैं, जो बारी-बारी से प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा में जुटी हैं। ये परिंदें कुदरत की खूबसूरत और अनमोल देन हैं, इनका शिकार न करें, न होने दें। - संजय पाठक, मुख्य वन संरक्षक, दुधवा टाइगर रिजर्व
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