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लखनऊ पहुंचे दुधवा कर्मी, भूख हड़ताल
पलियाकलां।
Updated Fri, 19 Feb 2016 11:33 PM IST
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कर्मियों के शस्त्र जमा कर देने के चौथे दिन भी दुधवा लावारिस ही रहा। जंगल के क्या हालात हैं, इसका किसी को पता नहीं है। यहां तैनात पीआरडी जवानों को भी पहले ही हटाया जा चुका है। इधर, शुक्रवार की अलसुबह ही कर्मी ट्रेनों आदि से लखनऊ में होने वाली भूख हड़ताल में शामिल होने के लिए रवाना हो गए।
गौरतलब है डीएम पर कार्रवाई की मांग को लेकर 27 जनवरी से जिप्सी चालकों, नेचर गाइडों ने कार्य बहिष्कार कर दिया था और फिर कुछ दिन बाद इसमें फेडरेशन ऑफ फारेस्ट के बैनर तले दुधवा के कर्मी भी शामिल हो गए थे। इससे पर्यटन ठप हो गया था और सैलानियों को वापस जाने पर मजबूर होना पड़ा। पर्यटन आज तक ठप है। प्रमुख वन संरक्षक को कर्मियों ने पत्र भेजकर डीएम पर कार्रवाई की मांग की थी और इसके पूरा न होने पर उन्होंने 16 फरवरी को राजकीय शस्त्र जमा करने की चेतावनी दी थी। जिसके तहत उन्होंने 16 फरवरी को अपने शस्त्र जमा कर दिए थे। इसके बाद पार्क प्रशासन ने यहां तैनात पीआरडी जवानों को दुधवा जंगल की सुरक्षा में लगाया था, लेकिन वह भी पीआरडी कमांडेंट द्वारा वापस बुला लिए गए। इससे दुधवा की सुरक्षा करने वाला कोई भी नहीं रहा। 18 फरवरी को महावतों ने हाथी भी हवाले कर दिए। शस्त्र जमा करने के चौथे दिन भी पार्क प्रशासन जंगल की सुरक्षा व्यवस्था में किसी को नहीं लगा पाया है। जिससे दुधवा पूरी तरह असुरक्षित है। इधर, शुक्रवार की सुबह कर्मियों ने ट्रेन आदि से लखनऊ पहुंचकर वहां रखी गई भूख हड़ताल में हिस्सा लिया। फेडरेशन के उपाध्यक्ष राम कुमार ने बताया कि उन्होंने लखनऊ में प्रांतीय पदाधिकारियों को बताया है कि यहां प्रशासन ने बृहस्पतिवार की रात भूख हड़ताल में शामिल होने से रोकने के लिए पुलिस के साथ उनकी बसों को चलता कर दिया। बताया कि यहां कार्रवाई के लिए प्रमुख वन संरक्षक को पत्र सौंपा गया है, जिसके तहत वह मुख्यमंत्री तक उनकी मांगों को रखेंगे। बताया कि इसमें प्रांतीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन आदि का भी निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि हटाए गए डिप्टी डायरेक्टर की वापसी की मांग भी की गई है। कर्मियों का आंदोलन मांग पूरी न होने तक जारी रहेगा।
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गौरतलब है डीएम पर कार्रवाई की मांग को लेकर 27 जनवरी से जिप्सी चालकों, नेचर गाइडों ने कार्य बहिष्कार कर दिया था और फिर कुछ दिन बाद इसमें फेडरेशन ऑफ फारेस्ट के बैनर तले दुधवा के कर्मी भी शामिल हो गए थे। इससे पर्यटन ठप हो गया था और सैलानियों को वापस जाने पर मजबूर होना पड़ा। पर्यटन आज तक ठप है। प्रमुख वन संरक्षक को कर्मियों ने पत्र भेजकर डीएम पर कार्रवाई की मांग की थी और इसके पूरा न होने पर उन्होंने 16 फरवरी को राजकीय शस्त्र जमा करने की चेतावनी दी थी। जिसके तहत उन्होंने 16 फरवरी को अपने शस्त्र जमा कर दिए थे। इसके बाद पार्क प्रशासन ने यहां तैनात पीआरडी जवानों को दुधवा जंगल की सुरक्षा में लगाया था, लेकिन वह भी पीआरडी कमांडेंट द्वारा वापस बुला लिए गए। इससे दुधवा की सुरक्षा करने वाला कोई भी नहीं रहा। 18 फरवरी को महावतों ने हाथी भी हवाले कर दिए। शस्त्र जमा करने के चौथे दिन भी पार्क प्रशासन जंगल की सुरक्षा व्यवस्था में किसी को नहीं लगा पाया है। जिससे दुधवा पूरी तरह असुरक्षित है। इधर, शुक्रवार की सुबह कर्मियों ने ट्रेन आदि से लखनऊ पहुंचकर वहां रखी गई भूख हड़ताल में हिस्सा लिया। फेडरेशन के उपाध्यक्ष राम कुमार ने बताया कि उन्होंने लखनऊ में प्रांतीय पदाधिकारियों को बताया है कि यहां प्रशासन ने बृहस्पतिवार की रात भूख हड़ताल में शामिल होने से रोकने के लिए पुलिस के साथ उनकी बसों को चलता कर दिया। बताया कि यहां कार्रवाई के लिए प्रमुख वन संरक्षक को पत्र सौंपा गया है, जिसके तहत वह मुख्यमंत्री तक उनकी मांगों को रखेंगे। बताया कि इसमें प्रांतीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन आदि का भी निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि हटाए गए डिप्टी डायरेक्टर की वापसी की मांग भी की गई है। कर्मियों का आंदोलन मांग पूरी न होने तक जारी रहेगा।
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