{"_id":"608d98408ebc3ec35c204f90","slug":"dudhwa-lakhimpur-news-bly44548734","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब रैपिड रिस्पांस टीमें करेंगी बाघों की सघन निगरानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब रैपिड रिस्पांस टीमें करेंगी बाघों की सघन निगरानी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। कोरोना संक्रमण ने एक बार फिर दुधवा के पर्यटन को ग्रहण लगा दिया है। सैलानियों के लिए दुधवा के दरवाजे समय से डेढ़ माह पहले ही बंद करने पड़े हैं। नई व्यवस्था में अब रैपिड रिस्पांस टीमें बाघों की सघन निगरानी करेंगी।
पिछले साल 15 नवंबर को शुरू हुए पर्यटन सत्र को कोरोना संक्रमण के चलते निर्धारित समय से तीन माह 27 दिन पहले बंद करना पड़ा। इस साल दुधवा का पर्यटन पिछले वर्षों की अपेक्षा 15 दिन पहले एक नवंबर से शुरू किया गया, जिसे अब कोरोना संक्रमण के कारण एक मई से बंद कर दिया गया है। इस तरह इस साल यह पर्यटन सत्र महज छह माह चल सका है। दुधवा का पर्यटन सत्र आमतौर पर 15 नवंबर से शुरू होकर 15 जून तक चलता है।
कोरोना संक्रमण के कारण पिछले साल सैलानियों की संख्या काफी कम रही थी। इस साल पिछले साल की अपेक्षा अधिक दिन पर्यटन चला, बावजूद इसमें सैलानियों की संख्या पिछले साल से कम रही। दुधवा में बड़ी संख्या में विदेशी सैलानी भी आते हैं, लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते अधिक समय तक अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बंद रहने से महज दो विदेशी सैलानी ही आए।
विज्ञापन
-
रैपिड रिस्पांस टीमें गठित
इस साल तेजी से बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के चलते केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्रधिकरण ( एनटीसीए ) से जारी गाइड लाइन पर दुधवा टाइगर रिजर्व में अमल शुरू हो गया है। बाघों और अन्य वन्यजीवों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए दुधवा टाइगर रिजर्व के मुख्य वन संरक्षक / फील्ड निदेशक संजय पाठक ने प्रत्येक रेंज में रैपिड रिस्पांस टीमों का गठन किया है। यह टीमें बाघों की गतिविधियों का लगातार अध्ययन कर यह जानकारी हासिल करेंगी कि कहीं कोई वन्यजीव खासकर बाघ या तेंदुआ कोरोना संक्रमित तो नहीं है। इसके अलावा बाघ / तेंदुओं की निगरानी के लिए टाइगर मूवमेंट वाले चिह्नित स्थलों पर कैमरे लगावाए जा रहे हैं। जिनके माध्यम से बाघों / तेंदुओं की गतिविधियों की वीडियो रिकॉर्डिंग होगी। पार्क प्रशासन के अधिकारी और पशु चिकित्सकों की टीम वीडियों रिकार्डिंग का बारीकी से अध्ययन करेंगी। इसके बाद आवीआरआई बरेली में परीक्षण करके यह पता लगाया जाएगा कि उनमें कोविड-19 के कोई लक्षण तो नहीं है। यदि किसी बाघ या तेंदुए में ऐसे लक्षण पाए जाते हैं तो इसकी सूचना उच्च स्तरीय कमेटी को दी जाएगी और संबधित को दूसरे जानवरों से अलग रखने का प्रयास किया जाएगा।
-
सुरक्षा उपकरणों से लैस रहेंगी टीमें
बाघों और अन्य वन्यजीवों की निगरानी करने वाली टीमें कोविड-19 से बचाव के सारे सुरक्षा उपकरणों से पूरी तरह लैस रहेंगी। टीम के सदस्य मॉस्क, दस्ताने पहनेंगे और हाथों को सैनिटाइज करेंगे। जंगल में यदि किसी वन्यजीव की मृत्यु हो जाती है तो उसका विसरा सुरक्षित कर आवीआरआई बरेली जांच के लिए भेजा जाएगा। वन्यजीव का शव बरामद करने से लेकर पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर और कर्मचारी पीपीई किट का इस्तेमाल करेंगे। इसके अलावा वन्यजीवों की निगरानी रख-रखाव, पेट्रोलिंग आदि कार्यों के लिए टाइगर रिजर्व प्रशासन के अधिकारियों से लेकर फील्ड स्टॉफ और वॉचरों के बीच सामाजिक दूरी बनाए रखने का पूरा ख्याल रखा जाएगा। दुधवा के पालतू हाथी सबसे ज्यादा इंसानों के संपर्क में रहते हैं। इसलिए उनकी देखभाल करने वाले महावतों और चारा कटर्स आदि को मॉस्क पहनने, हाथों को सैनिटाइज करने आदि के निर्देश दिए गए हैं।
-
वन्यजीवों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए दुधवा का पर्यटन सत्र एक मई से बंद कर दिया गया है। साथ ही बाघों / तेंदुओ और अन्य वन्यजीवों की निगरानी के लिए रैपिड रिस्पांस टीमें गठित की गईं हैं। बाघों के बाहुल्यता वाले क्षेत्र में वीडियो मोड कैमरे भी लगवाए जा रहे हैं। बढ़ते संक्रमण के बावजूद दुधवा के जंगलों में मौजूद बाघ / तेंदुआ या किसी अन्य वन्यजीव में कोरोना संक्रमण के लक्षण दिखाई नहीं दिए। - संजय पाठक, मुख्य वन संरक्षक / फील्ड निदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व
विज्ञापन
पिछले साल 15 नवंबर को शुरू हुए पर्यटन सत्र को कोरोना संक्रमण के चलते निर्धारित समय से तीन माह 27 दिन पहले बंद करना पड़ा। इस साल दुधवा का पर्यटन पिछले वर्षों की अपेक्षा 15 दिन पहले एक नवंबर से शुरू किया गया, जिसे अब कोरोना संक्रमण के कारण एक मई से बंद कर दिया गया है। इस तरह इस साल यह पर्यटन सत्र महज छह माह चल सका है। दुधवा का पर्यटन सत्र आमतौर पर 15 नवंबर से शुरू होकर 15 जून तक चलता है।
विज्ञापन
कोरोना संक्रमण के कारण पिछले साल सैलानियों की संख्या काफी कम रही थी। इस साल पिछले साल की अपेक्षा अधिक दिन पर्यटन चला, बावजूद इसमें सैलानियों की संख्या पिछले साल से कम रही। दुधवा में बड़ी संख्या में विदेशी सैलानी भी आते हैं, लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते अधिक समय तक अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बंद रहने से महज दो विदेशी सैलानी ही आए।
विज्ञापन
-
रैपिड रिस्पांस टीमें गठित
इस साल तेजी से बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के चलते केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्रधिकरण ( एनटीसीए ) से जारी गाइड लाइन पर दुधवा टाइगर रिजर्व में अमल शुरू हो गया है। बाघों और अन्य वन्यजीवों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए दुधवा टाइगर रिजर्व के मुख्य वन संरक्षक / फील्ड निदेशक संजय पाठक ने प्रत्येक रेंज में रैपिड रिस्पांस टीमों का गठन किया है। यह टीमें बाघों की गतिविधियों का लगातार अध्ययन कर यह जानकारी हासिल करेंगी कि कहीं कोई वन्यजीव खासकर बाघ या तेंदुआ कोरोना संक्रमित तो नहीं है। इसके अलावा बाघ / तेंदुओं की निगरानी के लिए टाइगर मूवमेंट वाले चिह्नित स्थलों पर कैमरे लगावाए जा रहे हैं। जिनके माध्यम से बाघों / तेंदुओं की गतिविधियों की वीडियो रिकॉर्डिंग होगी। पार्क प्रशासन के अधिकारी और पशु चिकित्सकों की टीम वीडियों रिकार्डिंग का बारीकी से अध्ययन करेंगी। इसके बाद आवीआरआई बरेली में परीक्षण करके यह पता लगाया जाएगा कि उनमें कोविड-19 के कोई लक्षण तो नहीं है। यदि किसी बाघ या तेंदुए में ऐसे लक्षण पाए जाते हैं तो इसकी सूचना उच्च स्तरीय कमेटी को दी जाएगी और संबधित को दूसरे जानवरों से अलग रखने का प्रयास किया जाएगा।
-
सुरक्षा उपकरणों से लैस रहेंगी टीमें
बाघों और अन्य वन्यजीवों की निगरानी करने वाली टीमें कोविड-19 से बचाव के सारे सुरक्षा उपकरणों से पूरी तरह लैस रहेंगी। टीम के सदस्य मॉस्क, दस्ताने पहनेंगे और हाथों को सैनिटाइज करेंगे। जंगल में यदि किसी वन्यजीव की मृत्यु हो जाती है तो उसका विसरा सुरक्षित कर आवीआरआई बरेली जांच के लिए भेजा जाएगा। वन्यजीव का शव बरामद करने से लेकर पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर और कर्मचारी पीपीई किट का इस्तेमाल करेंगे। इसके अलावा वन्यजीवों की निगरानी रख-रखाव, पेट्रोलिंग आदि कार्यों के लिए टाइगर रिजर्व प्रशासन के अधिकारियों से लेकर फील्ड स्टॉफ और वॉचरों के बीच सामाजिक दूरी बनाए रखने का पूरा ख्याल रखा जाएगा। दुधवा के पालतू हाथी सबसे ज्यादा इंसानों के संपर्क में रहते हैं। इसलिए उनकी देखभाल करने वाले महावतों और चारा कटर्स आदि को मॉस्क पहनने, हाथों को सैनिटाइज करने आदि के निर्देश दिए गए हैं।
-
वन्यजीवों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए दुधवा का पर्यटन सत्र एक मई से बंद कर दिया गया है। साथ ही बाघों / तेंदुओ और अन्य वन्यजीवों की निगरानी के लिए रैपिड रिस्पांस टीमें गठित की गईं हैं। बाघों के बाहुल्यता वाले क्षेत्र में वीडियो मोड कैमरे भी लगवाए जा रहे हैं। बढ़ते संक्रमण के बावजूद दुधवा के जंगलों में मौजूद बाघ / तेंदुआ या किसी अन्य वन्यजीव में कोरोना संक्रमण के लक्षण दिखाई नहीं दिए। - संजय पाठक, मुख्य वन संरक्षक / फील्ड निदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व