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Lakhimpur Kheri News: प्राकृतिक सौंदर्य ही नहीं जैव विविधता से भी समृद्ध है दुधवा
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दुधवा के झादीताल में प्रकृति का आनंद लेते बारासिंगा हिरन। स्त्रोत-वन विभाग।
बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व प्राकृतिक सौंदर्य से जितना समृद्ध है, इससे ज्यादा जैव विविधता के लिहाज से मालामाल है। 150 से अधिक बाघों को सहेजने वाले दुधवा में कई ऐसी दुर्लभ प्राजतियों के जीव-जंतु मौजूद हैं, जो बिरले ही मिलते हैं।
बंगाल फ्लोरिकन पक्षी इनमें से एक है, जो दुनिया भर में बहुत कम संख्या में बचे हैं। अपने पुरखों की धरती पर फिर से बसाए गए गैंडों का पुनर्वासन यहां की एक बड़ी खासियत है। दुधवा का जंगल रहस्य और रोमांच से भरा हुआ है।
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर ललित कुमार वर्मा बताते हैं कि भारत-नेपाल सीमा पर स्थिति दुधवा टाइगर रिजर्व 2200 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला हुआ है। पूरे टाइगर रिजर्व को तीन प्रभागों में बांटा गया है। दुधवा नेशनल पार्क, कतर्निया घाट वन्यजीव विहार और बफरजोन।
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डीटीआर में 66 फीसदी वुडलैंड, 21 फीसदी ग्रासलैंड और 13 फीसदी वेटलैंड है, जो वन्यजीवों के प्राकृतवास, भोजन और पानी के लिए आदर्श पारिस्थितिकी है। यही कारण है कि दुधवा में सर्वाधिक प्रजातियों के वन्यजीव हैं। दुधवा नेशनल पार्क की स्थापना एक फरवरी 1977 को हुई।
सन 1987-88 में किशनपुर और कतर्नियाघाट वन्यजीव विहार को भी दुधवा में शामिल किया गया और इसे दुधवा टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया। इस बीच सन 1984 में दुधवा नेशनल पार्क में गैंडा पुनर्वासन योजना शुरू की गई,जो पूरी तरह सफल रही है।
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दुधवा टाइगर रिजर्व की यह है खासियत
पांच प्रजातियों के हिरन बारासिंगा, पाढ़ा, चीतल, काकड़ और सांभर एक साथ दुधवा में मिलते हैं।
बाघों के अलावा यहां तेंदुआ, फिशिंग कैट, जंगली हाथी, उड़न गिलहरी, भालू, मगरमच्छ जैसे दुर्लभ जीव मिलते हैं।
दुर्लभ प्रजाति का पक्षी बंगाल फ्लोरिकन भी सिर्फ दुधवा में फल-फूल रहा है।
दुधवा में ही बसी थारू जनजाति की अनूठी संस्कृति भी सैलानियों का आकर्षण।
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दुधवा की जैव विविधता
डीटीआर में 75 प्रजातियों के वृक्ष, 21 प्रजातियों की झाड़ियां, 17 प्रकार की बेल और लताओं के अलावा 179 प्रकार के जलीय पौधे मिलते हैं। इसी तरह यहां 51 प्रजातियों स्तनपायी, 15 प्रजातियों के एंफीबियन और 125 प्रजाति के सरीसृप हैं। इसके अलावा यहां 450 प्रजातियों के पक्षी विचरण करते हैं। गैंडों को संरक्षित करने वाला देश का पहला टाइगर रिजर्व है दुधवा।
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बंगाल फ्लोरिकन पक्षी इनमें से एक है, जो दुनिया भर में बहुत कम संख्या में बचे हैं। अपने पुरखों की धरती पर फिर से बसाए गए गैंडों का पुनर्वासन यहां की एक बड़ी खासियत है। दुधवा का जंगल रहस्य और रोमांच से भरा हुआ है।
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दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर ललित कुमार वर्मा बताते हैं कि भारत-नेपाल सीमा पर स्थिति दुधवा टाइगर रिजर्व 2200 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला हुआ है। पूरे टाइगर रिजर्व को तीन प्रभागों में बांटा गया है। दुधवा नेशनल पार्क, कतर्निया घाट वन्यजीव विहार और बफरजोन।
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डीटीआर में 66 फीसदी वुडलैंड, 21 फीसदी ग्रासलैंड और 13 फीसदी वेटलैंड है, जो वन्यजीवों के प्राकृतवास, भोजन और पानी के लिए आदर्श पारिस्थितिकी है। यही कारण है कि दुधवा में सर्वाधिक प्रजातियों के वन्यजीव हैं। दुधवा नेशनल पार्क की स्थापना एक फरवरी 1977 को हुई।
सन 1987-88 में किशनपुर और कतर्नियाघाट वन्यजीव विहार को भी दुधवा में शामिल किया गया और इसे दुधवा टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया। इस बीच सन 1984 में दुधवा नेशनल पार्क में गैंडा पुनर्वासन योजना शुरू की गई,जो पूरी तरह सफल रही है।
दुधवा टाइगर रिजर्व की यह है खासियत
पांच प्रजातियों के हिरन बारासिंगा, पाढ़ा, चीतल, काकड़ और सांभर एक साथ दुधवा में मिलते हैं।
बाघों के अलावा यहां तेंदुआ, फिशिंग कैट, जंगली हाथी, उड़न गिलहरी, भालू, मगरमच्छ जैसे दुर्लभ जीव मिलते हैं।
दुर्लभ प्रजाति का पक्षी बंगाल फ्लोरिकन भी सिर्फ दुधवा में फल-फूल रहा है।
दुधवा में ही बसी थारू जनजाति की अनूठी संस्कृति भी सैलानियों का आकर्षण।
दुधवा की जैव विविधता
डीटीआर में 75 प्रजातियों के वृक्ष, 21 प्रजातियों की झाड़ियां, 17 प्रकार की बेल और लताओं के अलावा 179 प्रकार के जलीय पौधे मिलते हैं। इसी तरह यहां 51 प्रजातियों स्तनपायी, 15 प्रजातियों के एंफीबियन और 125 प्रजाति के सरीसृप हैं। इसके अलावा यहां 450 प्रजातियों के पक्षी विचरण करते हैं। गैंडों को संरक्षित करने वाला देश का पहला टाइगर रिजर्व है दुधवा।

दुधवा के झादीताल में प्रकृति का आनंद लेते बारासिंगा हिरन। स्त्रोत-वन विभाग।