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दुधवा: सैलानियों को भा रही जैव विविधता, पक्षी भी बने आकर्षण का केंद्र
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दुधवा में थारू भोजन थाली का आनंद लेते डीडी व अन्य। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
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पलियाकलां (लखीमपुर खीरी)। दुधवा नेशनल पार्क सैलानियों के लिए एक नवंबर से खोल दिया गया है। ऐसे में काफी में सैलानी यहां पहुंच रहे हैं जो यहां की जैव विविधता और पशु-पक्षियों के साथ स्वच्छंद विचरण करते वन्यजीवों का दीदार कर रहे हैं। सैलानियों को यहां की जैव विविधता व पशु पक्षी काफी आकर्षित कर रहे हैं। साथ ही ‘टाइगर साइटिंग’ भी आकर्षण का केन्द्र बनी हुई है। इसको लेकर किशनपुर की ओर सैलानी रुख कर रहे हैं।
दुधवा नेशनल पार्क की जैव विविधता की अगर बात की जाए तो यहां पर 75 प्रजातियों के वृक्ष पाए जाते हैं। इसके अलावा पार्क में 21 प्रकार की झाड़ियां, 17 प्रकार की बेल व लताएं तथा 179 प्रकार के पानी वाले पौधे हैं। पक्षियों में बंगाल फ्लोरिकन, फिसिंग ईगल, लेस फ्लोरिकन, ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल, इंडियन पाइड हार्न बिल, लैगर फैल्कान, पीफाउल, स्पड विल्ड डक समेत पक्षियों की लगभग 450 प्रकार की प्रजातियां हैं। इन प्रजातियों को देखने के लिए दूरदराज से सैलानियों का तांता लगा हुआ है। इसके अतिरिक्त टाइगर साइटिंग करने के लिए सैलानी किशनपुर के साथ दुधवा का भ्रमण कर रहे हैं।
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स्तनपायी व रेप्टाइल की प्रजातियां भी हैं आकर्षण का केन्द्र
दुधवा नेशनल पार्क में स्तनपायी व रेंगने वाले जंतुओं की प्रजातियां भी काफी संख्या में पाई जाती हैं। दुधवा में स्तनपायी की जहां 14 प्रजातियां हैं वहीं रेप्टाइल की 10।
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शीतकालीन विदेशी परिंदे भी बने हुए हैं आकर्षण का केन्द्र
हर साल शरदकाल में आने वाले विदेशी मेहमान पक्षी भी सैलानियों के आकर्षण का केन्द्र बने हुए हैं। किशनपुर के झादीताल, दुधवा के बांकेताल, टाइगर ताल, भादीताल, छंगाताल आदि प्राकृतिक जलस्रोतों, तालाबों एवं झीलों में सायबेरियन मेहमान पक्षियों ने अपना डेरा जमाया है। जिनको देखने के लिए सैलानी हर समय उत्सुक नजर आ रहे हैं।
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दुधवा में वन्यजीवों के अलावा पशु-पक्षी को देखने के उत्सुक सैलानी आते हैं यहां पर पशु-पक्षियों की काफी प्रजातियां पाई जाती हैं। सैलानी यहां की जैव विविधता का भी आनंद ले रहे हैं।
-मनोज कुमार सोनकर, डिप्टी डायरेक्टर, दुधवा नेशनल पार्क
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सैलानियों के लिए दुधवा में मिलने लगी थारू भोजन थाली
पलियाकलां (लखीमपुर खीरी)। दुधवा नेशनल पार्क में आने वाले सैलानियों के लिए शनिवार से थारू भोजन थाली नामक कैंटीन का शुभारंभ कर दिया गया। सैलानियों को थारू संस्कृति से रूबरू कराने और उनके व्यंजनों से पहचान कराने के लिए पार्क प्रशासन ने यह कार्य शुरू किया है। इसमें ईको विकास समिति की महिलाओं द्वारा बनाए गए थारू पकवान सैलानियों को परोसे व खिलाए गए। पहले दिन कई सैलानियों ने थारू भोजन थाली का लुत्फ उठाया। उन्हें साग-रोटी, खीर और सलाद परोसा गया।
शनिवार को कैंटीन का उद्घाटन कर थारू थाली में पांच तरह के भोजनों को परोसा गया। ईको विकास समिति बलेरा द्वारा यह भोजन तैयार किए गए, जिनको केले के पत्तों पर परोसा गया। डीडी मनोज कुमार सोनकर ने बताया कि ईको समिति की प्रमुख राजकुमारी की देखरेख में थारू व्यंजन तैयार किए गए। कीमत 200-250 रुपये प्रति थाली रही।
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थारू भोजन थाली की शुरुआत सैलानियों के लिए कर दी गई है। अब सैलानी थारू व्यंजनों का मजा दुधवा कैंपस में ले सकते हैं।
-मनोज कुमार सोनकर, डिप्टी डायरेक्टर, दुधवा नेशनल पार्क
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दुधवा नेशनल पार्क की जैव विविधता की अगर बात की जाए तो यहां पर 75 प्रजातियों के वृक्ष पाए जाते हैं। इसके अलावा पार्क में 21 प्रकार की झाड़ियां, 17 प्रकार की बेल व लताएं तथा 179 प्रकार के पानी वाले पौधे हैं। पक्षियों में बंगाल फ्लोरिकन, फिसिंग ईगल, लेस फ्लोरिकन, ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल, इंडियन पाइड हार्न बिल, लैगर फैल्कान, पीफाउल, स्पड विल्ड डक समेत पक्षियों की लगभग 450 प्रकार की प्रजातियां हैं। इन प्रजातियों को देखने के लिए दूरदराज से सैलानियों का तांता लगा हुआ है। इसके अतिरिक्त टाइगर साइटिंग करने के लिए सैलानी किशनपुर के साथ दुधवा का भ्रमण कर रहे हैं।
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स्तनपायी व रेप्टाइल की प्रजातियां भी हैं आकर्षण का केन्द्र
दुधवा नेशनल पार्क में स्तनपायी व रेंगने वाले जंतुओं की प्रजातियां भी काफी संख्या में पाई जाती हैं। दुधवा में स्तनपायी की जहां 14 प्रजातियां हैं वहीं रेप्टाइल की 10।
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शीतकालीन विदेशी परिंदे भी बने हुए हैं आकर्षण का केन्द्र
हर साल शरदकाल में आने वाले विदेशी मेहमान पक्षी भी सैलानियों के आकर्षण का केन्द्र बने हुए हैं। किशनपुर के झादीताल, दुधवा के बांकेताल, टाइगर ताल, भादीताल, छंगाताल आदि प्राकृतिक जलस्रोतों, तालाबों एवं झीलों में सायबेरियन मेहमान पक्षियों ने अपना डेरा जमाया है। जिनको देखने के लिए सैलानी हर समय उत्सुक नजर आ रहे हैं।
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दुधवा में वन्यजीवों के अलावा पशु-पक्षी को देखने के उत्सुक सैलानी आते हैं यहां पर पशु-पक्षियों की काफी प्रजातियां पाई जाती हैं। सैलानी यहां की जैव विविधता का भी आनंद ले रहे हैं।
-मनोज कुमार सोनकर, डिप्टी डायरेक्टर, दुधवा नेशनल पार्क
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सैलानियों के लिए दुधवा में मिलने लगी थारू भोजन थाली
पलियाकलां (लखीमपुर खीरी)। दुधवा नेशनल पार्क में आने वाले सैलानियों के लिए शनिवार से थारू भोजन थाली नामक कैंटीन का शुभारंभ कर दिया गया। सैलानियों को थारू संस्कृति से रूबरू कराने और उनके व्यंजनों से पहचान कराने के लिए पार्क प्रशासन ने यह कार्य शुरू किया है। इसमें ईको विकास समिति की महिलाओं द्वारा बनाए गए थारू पकवान सैलानियों को परोसे व खिलाए गए। पहले दिन कई सैलानियों ने थारू भोजन थाली का लुत्फ उठाया। उन्हें साग-रोटी, खीर और सलाद परोसा गया।
शनिवार को कैंटीन का उद्घाटन कर थारू थाली में पांच तरह के भोजनों को परोसा गया। ईको विकास समिति बलेरा द्वारा यह भोजन तैयार किए गए, जिनको केले के पत्तों पर परोसा गया। डीडी मनोज कुमार सोनकर ने बताया कि ईको समिति की प्रमुख राजकुमारी की देखरेख में थारू व्यंजन तैयार किए गए। कीमत 200-250 रुपये प्रति थाली रही।
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थारू भोजन थाली की शुरुआत सैलानियों के लिए कर दी गई है। अब सैलानी थारू व्यंजनों का मजा दुधवा कैंपस में ले सकते हैं।
-मनोज कुमार सोनकर, डिप्टी डायरेक्टर, दुधवा नेशनल पार्क

दुधवा में पाया जाने वाला एक पक्षी। (फाइल फोटो)- फोटो : LAKHIMPUR