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बिन फॉग लाइट दौड़ रहीं रोडवेज बसें
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 06 Jan 2018 08:08 PM IST
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सर्दी का मौसम शुरू होने से पहले ही परिवहन निगम के एमडी ने बसों की खिड़की, दरवाजे दुरुस्त कराने और उनमें फॉग लाइट लगवाने के निर्देश जारी किए थे। हालांकि अभी तक न तो निगम और न ही अनुबंधित बसों के खिड़की दरवाजे दुरुस्त हैं और न ही उनमें फॉग लाइट ही लगी हैं। जबकि बढ़ता कोहरा चालकों की दुश्वारियां बढ़ा रहा है, चालक कोहरे में बस चलाने के लिए विवश हैं। वहीं यात्री भी जान जोखिम में डालकर यात्रा करने के लिए मजबूर हैं।
लखीमपुर डिपो में 83 और गोला डिपो में 73 निगम एवं 44 बसें अनुबंधित हैं, लेकिन इनमें से न तो निगम की ही सभी बसें कोहरे में चलने के लिए दुरुस्त हैं और न ही अनुबंधित। कई बसों में तो कोहरे के लिए फॉग लाइट तक नहीं है। जबकि कोहरे में ही सड़क हादसों की संभावनाएं काफी हद तक बढ़ जाती है। वहीं लखीमपुर और गोला डिपो की बसों से रोजाना करीब 10 से 15 हजार यात्री सफर कर रहे हैं। एमडी ने इनकी यात्रा सुरक्षित बनाने के लिए बसो में फॉग लाइट लगवाने और बसों के शीशे आदि दुरुस्त कराने के निर्देश एआरएम को दिए थे। हालांकि अभी तक बसों में फॉग लाइट लगवाने के लिए न तो रोडवेज प्रशासन और अनुबंधित बस मालिक नहीं चेते हैं।
कुछ ही बसों में लगी हैं फॉग लाइट
कोहरे में भी चालक को रास्ता साफ दिखाई देता रहे, इसके लिए रोडवेज को सभी बसों में फॉग लाइट लगानी चाहिए, लेकिन चंद बसों की बात अगर छोड़ दी जाए तो विभाग की ज्यादातर बसों में फॉग लाइट नहीं लगी है।
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जुगाड़ के सहारे चल रही बसें
रोडवेज बस चालकों का कहना है कि रोजना देखरेदख न होने से बसों की हेडलाइट तक ठीक नहीं हैं। जो हैं वह भी जुगाड़ से जलती हैं। किसी बस में बैटरी खराब तो किसी में वायरिंग ही जली है। ऐसे में कोहरे में दिक्कतें और बढ़ जाती है। कई बार वर्कशाप में कहा गया, लेकिन कोई सुनता नहीं, इसलिए शिकायत के बजाय जुगाड़ से ही काम चला रहे हैं।
अनुबंधित बसों में फॉग लाइट लगवाने के लिए उनके मालिकों को एक माह पहले ही निर्देशित किया गया था। इसके बावजूद यदि बसों में फॉग लाइट नहीं लगवाई हैं तो सभी को नोटिस जारी किया जाएगा। वहीं निगम बसों में फॉग लाइट लगवाने के लिए अधिकारियों को लिखा गया है, जिनके मिलते ही लगवा दिया जाएगा।
आरके श्रीवास्तव, प्रभारी सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक, लखीमपुर डिपो
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लखीमपुर डिपो में 83 और गोला डिपो में 73 निगम एवं 44 बसें अनुबंधित हैं, लेकिन इनमें से न तो निगम की ही सभी बसें कोहरे में चलने के लिए दुरुस्त हैं और न ही अनुबंधित। कई बसों में तो कोहरे के लिए फॉग लाइट तक नहीं है। जबकि कोहरे में ही सड़क हादसों की संभावनाएं काफी हद तक बढ़ जाती है। वहीं लखीमपुर और गोला डिपो की बसों से रोजाना करीब 10 से 15 हजार यात्री सफर कर रहे हैं। एमडी ने इनकी यात्रा सुरक्षित बनाने के लिए बसो में फॉग लाइट लगवाने और बसों के शीशे आदि दुरुस्त कराने के निर्देश एआरएम को दिए थे। हालांकि अभी तक बसों में फॉग लाइट लगवाने के लिए न तो रोडवेज प्रशासन और अनुबंधित बस मालिक नहीं चेते हैं।
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कुछ ही बसों में लगी हैं फॉग लाइट
कोहरे में भी चालक को रास्ता साफ दिखाई देता रहे, इसके लिए रोडवेज को सभी बसों में फॉग लाइट लगानी चाहिए, लेकिन चंद बसों की बात अगर छोड़ दी जाए तो विभाग की ज्यादातर बसों में फॉग लाइट नहीं लगी है।
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जुगाड़ के सहारे चल रही बसें
रोडवेज बस चालकों का कहना है कि रोजना देखरेदख न होने से बसों की हेडलाइट तक ठीक नहीं हैं। जो हैं वह भी जुगाड़ से जलती हैं। किसी बस में बैटरी खराब तो किसी में वायरिंग ही जली है। ऐसे में कोहरे में दिक्कतें और बढ़ जाती है। कई बार वर्कशाप में कहा गया, लेकिन कोई सुनता नहीं, इसलिए शिकायत के बजाय जुगाड़ से ही काम चला रहे हैं।
अनुबंधित बसों में फॉग लाइट लगवाने के लिए उनके मालिकों को एक माह पहले ही निर्देशित किया गया था। इसके बावजूद यदि बसों में फॉग लाइट नहीं लगवाई हैं तो सभी को नोटिस जारी किया जाएगा। वहीं निगम बसों में फॉग लाइट लगवाने के लिए अधिकारियों को लिखा गया है, जिनके मिलते ही लगवा दिया जाएगा।
आरके श्रीवास्तव, प्रभारी सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक, लखीमपुर डिपो