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Lakhimpur Kheri News: मेडिकल कॉलेज के डॉ. इन्द्रेश को डेंटल डिवाइस का भारतीय डिज़ाइन पेटेंट
Wed, 05 Aug 2026 12:06 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 05 Aug 2026 12:06 AM IST
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लखीमपुर खीरी। ऑटोनॉमस स्टेट मेडिकल कॉलेज के दंत चिकित्सा विभाग के सीनियर रेजिडेंट डॉ. इंद्रेश राजावत को उनके विकसित डेंटल इम्प्लांट ड्रिल स्टॉप डिवाइस का भारतीय डिजाइन पेटेंट मिला है।
प्राचार्य डॉ. वाणी गुप्ता के मार्गदर्शन में विकसित इस नवाचार का डिजाइन आवेदन संख्या 505018-001 तीन अगस्त 2026 को प्रकाशित हुआ। यह डिवाइस डेंटल इम्प्लांट के दौरान हड्डी की ड्रिलिंग की निर्धारित गहराई सुनिश्चित करने में सहायक होगी। इससे चिकित्सक तय सीमा तक ही ड्रिलिंग कर सकेंगे, जिससे उपचार अधिक सुरक्षित, सटीक और प्रभावी होने के साथ अनावश्यक ड्रिलिंग से होने वाली संभावित जटिलताएं भी कम होंगी।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन के अनुसार यह नवाचार दंत चिकित्सा में अनुसंधान और आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। भविष्य में इससे मरीजों के उपचार की गुणवत्ता बेहतर होने के साथ चिकित्सकों को भी सुविधा मिलेगी।
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प्राचार्य डॉ. वाणी गुप्ता ने कहा कि यह उपलब्धि संस्थान के साथ भारतीय दंत चिकित्सा के क्षेत्र में नवाचार कर रहे शोधकर्ताओं और युवा वैज्ञानिकों के लिए भी प्रेरणादायक है। मेडिकल कॉलेज में अनुसंधान और नवाचार को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि नई तकनीकों के माध्यम से मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
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प्राचार्य डॉ. वाणी गुप्ता के मार्गदर्शन में विकसित इस नवाचार का डिजाइन आवेदन संख्या 505018-001 तीन अगस्त 2026 को प्रकाशित हुआ। यह डिवाइस डेंटल इम्प्लांट के दौरान हड्डी की ड्रिलिंग की निर्धारित गहराई सुनिश्चित करने में सहायक होगी। इससे चिकित्सक तय सीमा तक ही ड्रिलिंग कर सकेंगे, जिससे उपचार अधिक सुरक्षित, सटीक और प्रभावी होने के साथ अनावश्यक ड्रिलिंग से होने वाली संभावित जटिलताएं भी कम होंगी।
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मेडिकल कॉलेज प्रशासन के अनुसार यह नवाचार दंत चिकित्सा में अनुसंधान और आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। भविष्य में इससे मरीजों के उपचार की गुणवत्ता बेहतर होने के साथ चिकित्सकों को भी सुविधा मिलेगी।
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प्राचार्य डॉ. वाणी गुप्ता ने कहा कि यह उपलब्धि संस्थान के साथ भारतीय दंत चिकित्सा के क्षेत्र में नवाचार कर रहे शोधकर्ताओं और युवा वैज्ञानिकों के लिए भी प्रेरणादायक है। मेडिकल कॉलेज में अनुसंधान और नवाचार को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि नई तकनीकों के माध्यम से मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।